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प्रतियोगिता में टीम नहीं भेजी तो कॉलेजों पर लगेगा आर्थिक दंड
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:40 AM IST
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MJP Rohilkhand university
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प्रत्येक छात्र से डेढ़ सौ रुपये खेल फीस वसूलने वाले कॉलेज अब छात्रों को खेल सुविधाओं और खेल प्रतियोगिताओं से वंचित नहीं रख पाएंगे। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज का छात्र अगर विश्वविद्यालय की अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिता में खेलना चाहता है और कॉलेज उसको नहीं भेजता तो ऐसे कॉलेजों पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
यह प्रस्ताव एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शनिवार को हुई क्रीड़ा कार्यकारिणी की बैठक में पास किया गया। यह नियम के मुताबिक पहले वर्ष में दस, दूसरे वर्ष में 20 और तीसरे वर्ष में 50 हजार का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। चौथे वर्ष में कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने की संस्तुति की जाएगी।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में टीमें नहीं भेज रहे थे। प्रत्येक कॉलेज को पांच टीमें बनाकर भेजने का आदेश भी हुआ, लेकिन कॉलेज अपनी मनमानी करते रहे, जबकि प्रत्येक छात्र से 150 रुपये फीस भी ली जाती है। कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ कि अगर खिलाड़ी खेलना चाहता है और कॉलेज नहीं भेज रहा तो उस स्थिति आर्थिक दंड लगाया जाए।
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संबद्धता के समय अब खेल सुविधाओं की अलग आख्या बनेगी। अगर सुविधाएं नहीं हैं या गलत जानकारी कॉलेज देता है तो विश्वविद्यालय की परिनियमावली के अनुसार कार्रवाई होगी। नई संबद्धता के लिए एक क्रीड़ा विशेषज्ञ भी नामित किया जाएगा। विश्वविद्यालय कैंपस में अब तक कोई कोच नहीं है, अब मानदेय पर दो फील्ड कोच रखे जाएंगे। प्रतियोगिताओं के दौरान खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की भी जाएगी। अब सभी प्रस्ताव क्रीड़ा परिषद में रखे जाएंगे।
अनुशासनहीनता पर खिलाड़ी होंगे डिबार
पिछले साल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में खिलाड़ियों और हॉस्टल के खिलाड़ियों के बीच मारपीट हो गई थी। इस बार तय हुआ कि अनुशासनहीनता पर खिलाड़ियों पर आर्थिक दंड और कॉलेज व खिलाड़ी को डिबार किया जाएगा। टीम मैनेजर या कोच का साथ में रुकना अनिवार्य रहेगा। अब पंजीकृत खिलाड़ी ही विश्वविद्यालय के स्टेडियम में जा पाएंगे। इसके लिए उन्हें एक आईडी कार्ड भी मिलेगा। इसके अलावा खेल कैलेंडर भी जारी किया गया।
मेडल विजेता खिलाड़ियों की फीस होगी माफ
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) की नार्थ जोन और नेशनल प्रतियोगिता में जो खिलाड़ी मेडल प्राप्त करेंगे उनकी फीस माफ करने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय ने पास कर दिया है। विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों के खिलाड़ियों को इसी सत्र से ये सुविधा मिलेगी। खिलाड़ियों की सिर्फ ट्यूशन फीस माफ की जाएगी। विश्वविद्यालय ने अन्य विश्वविद्यालय की तरह खेलों को बढ़ावा देने को ये कदम उठाया है। हालांकि विश्वविद्यालय में काफी समय से इसकी मांग उठाई जा रही थी।
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यह प्रस्ताव एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शनिवार को हुई क्रीड़ा कार्यकारिणी की बैठक में पास किया गया। यह नियम के मुताबिक पहले वर्ष में दस, दूसरे वर्ष में 20 और तीसरे वर्ष में 50 हजार का आर्थिक दंड लगाया जाएगा। चौथे वर्ष में कॉलेज की संबद्धता समाप्त करने की संस्तुति की जाएगी।
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दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में कॉलेज अंतर महाविद्यालयीय प्रतियोगिताओं में टीमें नहीं भेज रहे थे। प्रत्येक कॉलेज को पांच टीमें बनाकर भेजने का आदेश भी हुआ, लेकिन कॉलेज अपनी मनमानी करते रहे, जबकि प्रत्येक छात्र से 150 रुपये फीस भी ली जाती है। कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय हुआ कि अगर खिलाड़ी खेलना चाहता है और कॉलेज नहीं भेज रहा तो उस स्थिति आर्थिक दंड लगाया जाए।
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संबद्धता के समय अब खेल सुविधाओं की अलग आख्या बनेगी। अगर सुविधाएं नहीं हैं या गलत जानकारी कॉलेज देता है तो विश्वविद्यालय की परिनियमावली के अनुसार कार्रवाई होगी। नई संबद्धता के लिए एक क्रीड़ा विशेषज्ञ भी नामित किया जाएगा। विश्वविद्यालय कैंपस में अब तक कोई कोच नहीं है, अब मानदेय पर दो फील्ड कोच रखे जाएंगे। प्रतियोगिताओं के दौरान खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की भी जाएगी। अब सभी प्रस्ताव क्रीड़ा परिषद में रखे जाएंगे।
अनुशासनहीनता पर खिलाड़ी होंगे डिबार
पिछले साल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में खिलाड़ियों और हॉस्टल के खिलाड़ियों के बीच मारपीट हो गई थी। इस बार तय हुआ कि अनुशासनहीनता पर खिलाड़ियों पर आर्थिक दंड और कॉलेज व खिलाड़ी को डिबार किया जाएगा। टीम मैनेजर या कोच का साथ में रुकना अनिवार्य रहेगा। अब पंजीकृत खिलाड़ी ही विश्वविद्यालय के स्टेडियम में जा पाएंगे। इसके लिए उन्हें एक आईडी कार्ड भी मिलेगा। इसके अलावा खेल कैलेंडर भी जारी किया गया।
मेडल विजेता खिलाड़ियों की फीस होगी माफ
भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) की नार्थ जोन और नेशनल प्रतियोगिता में जो खिलाड़ी मेडल प्राप्त करेंगे उनकी फीस माफ करने का प्रस्ताव विश्वविद्यालय ने पास कर दिया है। विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों के खिलाड़ियों को इसी सत्र से ये सुविधा मिलेगी। खिलाड़ियों की सिर्फ ट्यूशन फीस माफ की जाएगी। विश्वविद्यालय ने अन्य विश्वविद्यालय की तरह खेलों को बढ़ावा देने को ये कदम उठाया है। हालांकि विश्वविद्यालय में काफी समय से इसकी मांग उठाई जा रही थी।