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परीक्षा में नकल करते पकड़े गए 85 छात्रों को विवि ने किया दोषमुक्त
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:35 AM IST
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मुख्य परीक्षा में अनुचित साधन का प्रयोग करते पकड़े गए 85 छात्रों को एमजेपी रुहेलख्ंाड विश्वविद्यालय ने दोषमुक्त करार दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह मान लिया कि इन छात्रों ने परीक्षा में कोई अनुचित साधन प्रयोग नहीं किया, लेकिन नकल करने के इल्जाम से बरी इन छात्रों को फेल होने की सजा जरूर मिल गई है। 85 में से अधिकतर छात्र फेल हैं, तीन छात्रों को तो शून्य अंक मिला है। सवाल यह है कि इन छात्रों ने अनुचति साधन का प्रयोग ही नहीं किया तो सचल दल ने उन्हें पकड़ा क्यों? आखिर यह कौन तय करेगा कि सचल दल की कार्रवाई सही थी या अनुचित साधन निस्तारण समिति का फैसला।
विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षाओं में आंतरिक और बाह्य सचल दल की छापामारी में नकल के पांच सौ से ज्यादा मामले पकड़े गए थे। सभी को अनुचित साधन का प्रयोग करते दर्शाया गया और इनके रिजल्ट रोक दिए गए। ज्यादातर छात्रों ने खुद को निर्दोष बताया तो फिर मामला परीक्षा समिति में रखा गया था। परीक्षा समिति ने 85 छात्रों को परीक्षा में अनुचित साधन का प्रयोग करने के आरोप से बरी कर दिया है। हालांकि इनमें से 61 छात्र परीक्षा में फेल हुए हैं। 24 छात्र पास हैं। विश्वविद्यालय ने इनकी सूची जारी कर दी है। ये छात्र अब परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा में अगर छात्र अनुचित साधन करते पकड़ा जाता है तो उसकी बाकी परीक्षा पर असर पड़ता ही है। कई छात्र तो इसी डर में फेल तक हो जाते हैं।
कॉलेजों से लेकर विवि तक होता है खेल
कॉलेजों से लेकर विश्वविद्यालय तक नकल के मामले में खूब खेल होता है। कोडिंग व्यवस्था शुरू होने के बाद अब परीक्षा में ही नकल कराई जाती है। अगर पकड़े जाते हैं तो विश्वविद्यालय में सेटिंग का खेल चलता है और फिर नकल करते पकड़े गए छात्र कई बार दोषमुक्त हो जाते हैं।
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नकल के मामले परीक्षा समिति में रखे जाते हैं। समिति के निर्णय के मुताबिक ही कार्रवाई की जाती है। जिन छात्रों को दोषमुक्त किया गया है, उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं रहे होंगे इसलिए उनको दोषमुक्त कर किया गया है। ये छात्र परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। - प्रोफेसर एनएन पांडेय, परीक्षा नियंत्रक
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विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षाओं में आंतरिक और बाह्य सचल दल की छापामारी में नकल के पांच सौ से ज्यादा मामले पकड़े गए थे। सभी को अनुचित साधन का प्रयोग करते दर्शाया गया और इनके रिजल्ट रोक दिए गए। ज्यादातर छात्रों ने खुद को निर्दोष बताया तो फिर मामला परीक्षा समिति में रखा गया था। परीक्षा समिति ने 85 छात्रों को परीक्षा में अनुचित साधन का प्रयोग करने के आरोप से बरी कर दिया है। हालांकि इनमें से 61 छात्र परीक्षा में फेल हुए हैं। 24 छात्र पास हैं। विश्वविद्यालय ने इनकी सूची जारी कर दी है। ये छात्र अब परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। शिक्षकों का मानना है कि परीक्षा में अगर छात्र अनुचित साधन करते पकड़ा जाता है तो उसकी बाकी परीक्षा पर असर पड़ता ही है। कई छात्र तो इसी डर में फेल तक हो जाते हैं।
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कॉलेजों से लेकर विवि तक होता है खेल
कॉलेजों से लेकर विश्वविद्यालय तक नकल के मामले में खूब खेल होता है। कोडिंग व्यवस्था शुरू होने के बाद अब परीक्षा में ही नकल कराई जाती है। अगर पकड़े जाते हैं तो विश्वविद्यालय में सेटिंग का खेल चलता है और फिर नकल करते पकड़े गए छात्र कई बार दोषमुक्त हो जाते हैं।
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नकल के मामले परीक्षा समिति में रखे जाते हैं। समिति के निर्णय के मुताबिक ही कार्रवाई की जाती है। जिन छात्रों को दोषमुक्त किया गया है, उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं रहे होंगे इसलिए उनको दोषमुक्त कर किया गया है। ये छात्र परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। - प्रोफेसर एनएन पांडेय, परीक्षा नियंत्रक