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उठो रोजेदारों.. समीना आवाज दे रही है
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बरेली। रमजान के दिनों में सहरी के लिए जगाने के परंपरा सदियों पुरानी है। इस काम को हमेशा से पुरुष करते आएं हैं। ये शायद पहला मौका होगा जब एक चार साल बच्ची रोजेदारों को सहरी जगा रही है। पहले रोजे से इस काम को बखूबी अंजाम दे रही है। अब तो रोजेदारों को उसकी प्यारी आवाज की आदत सी हो गई है।
यह बच्ची है मलूकपुर निवासी चार साल की अमीना, जो माहे रमजान में रोजेदारों को मोहल्ले की ही तंबाकू वाली नूरी मस्जिद के लाउड स्पीकर से हर रोज सहरी के लिए जगाती है। उसके दादा अनवर मोहम्मद खान मोहल्ले की ही तंबाकू वाली नूरी मस्जिद के मुतवल्ली हैं। पहले रोजे को जब उसके दादा सहरी के वक्त मस्जिद जाने लगे तो अमीना भी साथ हो ली। जब मस्जिद में लाउड स्पीकर से उसके दादा सहरी का वक्त बताने लगे तो अमीना ने उनके हाथ से माइक लेकर खुद ही बोलना शुरू कर दिया। तब से लेकर आज तक अमीना ही हर रोज रात ढाई बजे मस्जिद पहुंच कर सहरी में वक्त का एलान कर रही है। अब पूरा मोहल्ला अमीना की आवाज से ही सहरी में जागता है।
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यह बच्ची है मलूकपुर निवासी चार साल की अमीना, जो माहे रमजान में रोजेदारों को मोहल्ले की ही तंबाकू वाली नूरी मस्जिद के लाउड स्पीकर से हर रोज सहरी के लिए जगाती है। उसके दादा अनवर मोहम्मद खान मोहल्ले की ही तंबाकू वाली नूरी मस्जिद के मुतवल्ली हैं। पहले रोजे को जब उसके दादा सहरी के वक्त मस्जिद जाने लगे तो अमीना भी साथ हो ली। जब मस्जिद में लाउड स्पीकर से उसके दादा सहरी का वक्त बताने लगे तो अमीना ने उनके हाथ से माइक लेकर खुद ही बोलना शुरू कर दिया। तब से लेकर आज तक अमीना ही हर रोज रात ढाई बजे मस्जिद पहुंच कर सहरी में वक्त का एलान कर रही है। अब पूरा मोहल्ला अमीना की आवाज से ही सहरी में जागता है।
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