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परीषदीय स्कूल परीक्षा
Updated Sat, 17 Mar 2018 10:04 AM IST
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परिषदीय स्कूल परीक्षा से घायब रहे 1.62 लाख बच्चे
स्कूलों में हावी रहीं अव्यवस्थाएं, नदारद रहे उड़नदस्ते
बरेली। प्रशासन के लाख दावों के बावजूद परिषदीय स्कूलों की परीक्षा में बदइंतजामी हावी रही। पहले दिन हिंदी और कला की परीक्षा में 1.62 लाख बच्चे अनुपस्थित रहे। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर नकल विहीन परीक्षा कराने की कोई व्यवस्था नहीं थी। नकल रोकने के लिए उड़नदस्ते भी हवा-हवाई ही दिखे। कुल मिलाकर परिषदीय स्कूलों की परीक्षा के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के करीब तीन हजार स्कूलों में 3.14 लाख बच्चों को परीक्षा देनी थी लेकिन पहले दिन केवल 2.52 लाख बच्चे ही परीक्षा में शामिल हुए। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग फेल रहा। यहां नगर निगम के प्राइमरी स्कूल कालीबाड़ी प्रथम और द्वितीय में बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं थी। बच्चे अंधेरे में परीक्षा दे रहे थे। प्रधानाध्यापिका मीनू ने बताया कि उनके स्कूल में बिजली नहीं है। यही हाल आजमनगर द्वितीय प्राइमरी स्कूल का रहा। यहां 25 में से केवल 18 बच्चे ही परीक्षा देने पहुंचे। वहीं, जीजीआईसी के पुराने भवन में चल रहे एक्सिलिरेशन लर्निंग कैंप में पंजीकृत 46 बच्चों में से 37 दिव्यांग बच्चों ने ही परीक्षा दी।
मस्जिद से एलान के बावजूद 153 बच्चे रहे नदारद
रिठौरा। प्राथमिक स्कूल रिठौरा में 478 में केवल 325 बच्चे ही परीक्षा देने पहुंचे। प्रधानाध्यापिका एकता सक्सेना ने बताया कि बच्चों को परीक्षा में भेजने के लिए शुक्रवार को सुबह आठ बजे ही मस्जिद से एलान करा दिया गया था। इसके बावजूद परीक्षा में 153 बच्चों ने परीक्षा छोड़ दी। इसकी तरह क्षेत्र के अन्य परिषदीय स्कूलों में भी बड़ी संख्या में बच्चे अनुपस्थित रहे।
अनुपस्थित शिक्षा मित्र और शिक्षिकाओं का वेतन कटा
भुता। ब्लॉक में बीएसए चंदना राम इकबाल यादव पहले दिन शुरू हुई परिषदीय विद्यालयों का परीक्षा के दौरान निरीक्षण करने पहुंची। भुता प्राथमिक विद्यालय के निरीक्षण के दौरान दो अध्यापिकाएं और दो शिक्षामित्र अनुपस्थित मिले। हिंदी प्रश्नपत्र की परीक्षा में 278 में से 159 बच्चों ने परीक्षा में बैठे। बीएसए ने अनुपस्थित शिक्षिकाओं और शिक्षा मित्रों का एक दिन का वेतन काट दिया है। इसके बाद वह निरीक्षण करने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय पड़ोली पहुंचीं। वहां दो अनुदेशिकाओं को विद्यालय में देरी से पहुंचने पर नाराजगी जताई।
स्कूलों में हावी रहीं अव्यवस्थाएं, नदारद रहे उड़नदस्ते
बरेली। प्रशासन के लाख दावों के बावजूद परिषदीय स्कूलों की परीक्षा में बदइंतजामी हावी रही। पहले दिन हिंदी और कला की परीक्षा में 1.62 लाख बच्चे अनुपस्थित रहे। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों पर नकल विहीन परीक्षा कराने की कोई व्यवस्था नहीं थी। नकल रोकने के लिए उड़नदस्ते भी हवा-हवाई ही दिखे। कुल मिलाकर परिषदीय स्कूलों की परीक्षा के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के करीब तीन हजार स्कूलों में 3.14 लाख बच्चों को परीक्षा देनी थी लेकिन पहले दिन केवल 2.52 लाख बच्चे ही परीक्षा में शामिल हुए। नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग फेल रहा। यहां नगर निगम के प्राइमरी स्कूल कालीबाड़ी प्रथम और द्वितीय में बच्चों के बैठने की व्यवस्था नहीं थी। बच्चे अंधेरे में परीक्षा दे रहे थे। प्रधानाध्यापिका मीनू ने बताया कि उनके स्कूल में बिजली नहीं है। यही हाल आजमनगर द्वितीय प्राइमरी स्कूल का रहा। यहां 25 में से केवल 18 बच्चे ही परीक्षा देने पहुंचे। वहीं, जीजीआईसी के पुराने भवन में चल रहे एक्सिलिरेशन लर्निंग कैंप में पंजीकृत 46 बच्चों में से 37 दिव्यांग बच्चों ने ही परीक्षा दी।
मस्जिद से एलान के बावजूद 153 बच्चे रहे नदारद
रिठौरा। प्राथमिक स्कूल रिठौरा में 478 में केवल 325 बच्चे ही परीक्षा देने पहुंचे। प्रधानाध्यापिका एकता सक्सेना ने बताया कि बच्चों को परीक्षा में भेजने के लिए शुक्रवार को सुबह आठ बजे ही मस्जिद से एलान करा दिया गया था। इसके बावजूद परीक्षा में 153 बच्चों ने परीक्षा छोड़ दी। इसकी तरह क्षेत्र के अन्य परिषदीय स्कूलों में भी बड़ी संख्या में बच्चे अनुपस्थित रहे।
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अनुपस्थित शिक्षा मित्र और शिक्षिकाओं का वेतन कटा
भुता। ब्लॉक में बीएसए चंदना राम इकबाल यादव पहले दिन शुरू हुई परिषदीय विद्यालयों का परीक्षा के दौरान निरीक्षण करने पहुंची। भुता प्राथमिक विद्यालय के निरीक्षण के दौरान दो अध्यापिकाएं और दो शिक्षामित्र अनुपस्थित मिले। हिंदी प्रश्नपत्र की परीक्षा में 278 में से 159 बच्चों ने परीक्षा में बैठे। बीएसए ने अनुपस्थित शिक्षिकाओं और शिक्षा मित्रों का एक दिन का वेतन काट दिया है। इसके बाद वह निरीक्षण करने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय पड़ोली पहुंचीं। वहां दो अनुदेशिकाओं को विद्यालय में देरी से पहुंचने पर नाराजगी जताई।
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