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राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ाएगा नीच राजभंग योग
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बरेली। अप्रैल में बदलने जा रही सितारों की चाल प्राकृतिक और राजनीतिक हालात में उतार-चढ़ाव संकेत दे रही है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक अप्रैल में बृहस्पति और शनि वक्री हो रहे हैं, इसके साथ बुध नीच राशि और शुक्र उच्च राशि में गोचर करेंगे। ये दुर्लभ संयोग नीच भंग राजयोग और लक्ष्मी नारायण योग बनाएगा। शास्त्रों के आधार पर आंकलन किया जाए तो इन दोनों दुर्लभ योगों का संयोग प्रकृति और राजसत्ता पर विशेष प्रभाव छोड़ सकता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के अनुसार 16 अप्रैल से बृहस्पति और 30 अप्रैल से शनि वक्री हो रहे हैं। 12 अप्रैल से बुध और 15 अप्रैल से शुक्र का मीन राशि में गोचर करेंगे। बुध अपनी नीच राशि में और शुक्र अपनी उच्च राशि में विराजमान हो रहे हैं। एक ही राशि में दो ग्रहों का उच्च और नीच का होना नीच भंग राजयोग बनाता है। ये दुर्लभ संयोग है। वहीं शुक्र की बुध के साथ युति होने पर लक्ष्मी नारायण योग भी बन रहा है। इन सबके अलावा नवसंवत्सर के राजा शनि का वक्री होना और मंत्री सूर्य का अपनी मेष राशि में उच्च का होने पर शनि के प्रभाव से सूर्य का पराक्रम और तीव्र होने के आसार है। ऐसी स्थिति में शनि के प्रभाव से राजनीतिक टकराव के बाद सूर्य के प्रभाव से पूर्ण स्थायित्व वाली सरकार बनने के संकेत हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार प्राकृतिक आपदा की आशंका है।
इन राशियों को लाभ
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक नीच भंग राज योग का सभी राशियों पर सम प्रभाव होगा। वहीं, लक्ष्मी नारायण योग का प्रभाव धनु, मीन, मिथुन और कन्या राशि के जातकों के लिए ज्योतिषाचार्य बेहद शुभ मान रहे हैं।
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ग्रह का गोचर और वक्री स्थिति
10 अप्रैल से 22 अप्रैल तक गुरु वक्री रहेंगे।
30 अप्रैल से 13 सितंबर तक शनि वक्री रहेंगे।
12 अप्रैल से 3 मई तक बुध का नीच राशि मीन में गोचर रहेगा।
15 अप्रैल से 10 मई तक शुक का उच्च राशि मीन में गोच रहेगा।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के अनुसार 16 अप्रैल से बृहस्पति और 30 अप्रैल से शनि वक्री हो रहे हैं। 12 अप्रैल से बुध और 15 अप्रैल से शुक्र का मीन राशि में गोचर करेंगे। बुध अपनी नीच राशि में और शुक्र अपनी उच्च राशि में विराजमान हो रहे हैं। एक ही राशि में दो ग्रहों का उच्च और नीच का होना नीच भंग राजयोग बनाता है। ये दुर्लभ संयोग है। वहीं शुक्र की बुध के साथ युति होने पर लक्ष्मी नारायण योग भी बन रहा है। इन सबके अलावा नवसंवत्सर के राजा शनि का वक्री होना और मंत्री सूर्य का अपनी मेष राशि में उच्च का होने पर शनि के प्रभाव से सूर्य का पराक्रम और तीव्र होने के आसार है। ऐसी स्थिति में शनि के प्रभाव से राजनीतिक टकराव के बाद सूर्य के प्रभाव से पूर्ण स्थायित्व वाली सरकार बनने के संकेत हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार प्राकृतिक आपदा की आशंका है।
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इन राशियों को लाभ
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक नीच भंग राज योग का सभी राशियों पर सम प्रभाव होगा। वहीं, लक्ष्मी नारायण योग का प्रभाव धनु, मीन, मिथुन और कन्या राशि के जातकों के लिए ज्योतिषाचार्य बेहद शुभ मान रहे हैं।
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ग्रह का गोचर और वक्री स्थिति
10 अप्रैल से 22 अप्रैल तक गुरु वक्री रहेंगे।
30 अप्रैल से 13 सितंबर तक शनि वक्री रहेंगे।
12 अप्रैल से 3 मई तक बुध का नीच राशि मीन में गोचर रहेगा।
15 अप्रैल से 10 मई तक शुक का उच्च राशि मीन में गोच रहेगा।