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लोक कल्याण का वर देकर गज पर सवार होकर विदा हुईं मां जगदंबे
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बरेली। अबकी बार गज पर सवार होकर मां जगदंबे लोक कल्याण का वर देकर अपने लोक को विदा हुईं हैं। मां जगदंबे की गज की सवारी को ज्योतिषाचार्य बेहद शुभ बता रहे हैं। उनके मुताबिक घोड़े पर सवार होकर मां का आगमन हुआ था और हाथी पर सवार होकर विदा होना शुभ संकेत हैं। दूसरी ओर घरों और मंदिरों में नवरात्र पर व्रत का पारण करने के लिए विविध अनुष्ठान हुए।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक घोड़े की सवारी को राजनीतिक दूष्टिकोण से शुभ नहीं माना गया है, लेकिन गज की सवारी का संबंध ‘हथिया नक्षत्र’ से है। यानी अबकी बार हथिया नक्षत्र लगते ही भरपूर वर्षा के संकेत हैं। कहा, करीब तीन वर्ष पहले भी मां गज पर सवार होकर विदा हुई थीं। उस दौरान हथिया नक्षत्र के दौरान अच्छी वर्षा हुई थी। अबकी बार भी ऐसी ही अच्छी वर्षा के संकेत मिल रहे हैं।
दूसरी ओर नवरात्र के आखिरी दिन नवमी युक्त दशमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने सुबह विधि-विधान से हवन-पूजन किया। घरों और मंदिरों में सामूहिक पूर्णाहुति के बाद कन्या जिमाकर अखंड व्रत का पारण हुआ। दूसरी ओर सुबह से ही मंदिर मां के जयकारों से गूंजते रहे। सुख, शांति के लिए मंदिरों में हवन-पूजन कार्यक्रम भी आयोजित हुए। महाआरती के बाद उपस्थित भक्तों को प्रसाद बांटा गया। सनद रहे कि प्रथमा और नवमी पर व्रत का अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओें ने अष्टमी युक्त नवमी तिथि पर रखे व्रत का पारण दशमी पर सूर्योदय के साथ किया।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार के मुताबिक घोड़े की सवारी को राजनीतिक दूष्टिकोण से शुभ नहीं माना गया है, लेकिन गज की सवारी का संबंध ‘हथिया नक्षत्र’ से है। यानी अबकी बार हथिया नक्षत्र लगते ही भरपूर वर्षा के संकेत हैं। कहा, करीब तीन वर्ष पहले भी मां गज पर सवार होकर विदा हुई थीं। उस दौरान हथिया नक्षत्र के दौरान अच्छी वर्षा हुई थी। अबकी बार भी ऐसी ही अच्छी वर्षा के संकेत मिल रहे हैं।
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दूसरी ओर नवरात्र के आखिरी दिन नवमी युक्त दशमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने सुबह विधि-विधान से हवन-पूजन किया। घरों और मंदिरों में सामूहिक पूर्णाहुति के बाद कन्या जिमाकर अखंड व्रत का पारण हुआ। दूसरी ओर सुबह से ही मंदिर मां के जयकारों से गूंजते रहे। सुख, शांति के लिए मंदिरों में हवन-पूजन कार्यक्रम भी आयोजित हुए। महाआरती के बाद उपस्थित भक्तों को प्रसाद बांटा गया। सनद रहे कि प्रथमा और नवमी पर व्रत का अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओें ने अष्टमी युक्त नवमी तिथि पर रखे व्रत का पारण दशमी पर सूर्योदय के साथ किया।
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