{"_id":"5c72f43fbdec222c5723435f","slug":"61551037503-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नवाबगंज जमीन घोटाला- अफसरों के तबादले से घोटालेबाजों को राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नवाबगंज जमीन घोटाला- अफसरों के तबादले से घोटालेबाजों को राहत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। अफसरों के तबादले होने के साथ ही नवाबगंज जमीन घोटाले की फाइल भी दब गई है। जबकि इस मामले में रिकार्ड रूम के कई बाबुओं के साथ ही आठ लोगों को कार्रवाई के लिए चिह्नित भी किया जा चुका है। प्रशासन इस मामले में पहले ही ढिलाई दिखा रहा था। अब एक्शन लेने वाले अधिकारियों के स्थानांतरण हो चुकेे हैं।
नवाबगंज के डंडिया नजमुल निशा में अबरार हुसैन की करीब सौ बीघा जमीन की खतौनी में हापुड़ के तारिक नाम के एक शख्स ने फर्जीवाड़ा कर अपना नाम दर्ज करा लिया था। पूर्व एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने जांच शुरू कराई तो घोटालेबाजों ने इसे दबाने की कोशिश की। उनके फर्जी दस्तखत वाली चिट्ठी बनाकर नवाबगंज तहसीलदार से पत्राचार भी किया। इसके अलावा खतौनी में भी व्हाइटनर लगाकर उप संचालक चकबंदी के आदेश को भी बदलने की कोशिश की। ओपी वर्मा के आदेश पर इस मामले की जांच तत्कालीन एसीएम फर्स्ट जलालुद्दीन ने की थी। इसमें चकबंदी के अहलमद रमोद सक्सेना, तारिक के बेटे फिरोज के साथ रिकार्ड रूम, नवाबगंज तहसील के कई बाबू सहित आठ लोगों को दोषी पाया जा चुका है। इस मामले में केवल अहलमद रमोद सक्सेना और फिरोज को शांतिभंग में जेल भेजा गया। वे भी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। इस मामले का पर्दाफाश होने के बावजूद अधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ विभागीय और एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई नहीं की। अब एडीएम सिटी ओपी वर्मा और जांच अधिकारी एसीएम फर्स्ट, दोनों का ही तबादला हो गया है। इसके साथ ही मामले की फाइल भी दब गई है।
इस मामले की फाइल अभी मुझे देखनी है। इस मामले में जो भी कार्रवाई होनी है, उसे जल्द ही किया जाएगा। - महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी
विज्ञापन
नवाबगंज के डंडिया नजमुल निशा में अबरार हुसैन की करीब सौ बीघा जमीन की खतौनी में हापुड़ के तारिक नाम के एक शख्स ने फर्जीवाड़ा कर अपना नाम दर्ज करा लिया था। पूर्व एडीएम सिटी ओपी वर्मा ने जांच शुरू कराई तो घोटालेबाजों ने इसे दबाने की कोशिश की। उनके फर्जी दस्तखत वाली चिट्ठी बनाकर नवाबगंज तहसीलदार से पत्राचार भी किया। इसके अलावा खतौनी में भी व्हाइटनर लगाकर उप संचालक चकबंदी के आदेश को भी बदलने की कोशिश की। ओपी वर्मा के आदेश पर इस मामले की जांच तत्कालीन एसीएम फर्स्ट जलालुद्दीन ने की थी। इसमें चकबंदी के अहलमद रमोद सक्सेना, तारिक के बेटे फिरोज के साथ रिकार्ड रूम, नवाबगंज तहसील के कई बाबू सहित आठ लोगों को दोषी पाया जा चुका है। इस मामले में केवल अहलमद रमोद सक्सेना और फिरोज को शांतिभंग में जेल भेजा गया। वे भी जमानत पर रिहा हो चुके हैं। इस मामले का पर्दाफाश होने के बावजूद अधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ विभागीय और एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई नहीं की। अब एडीएम सिटी ओपी वर्मा और जांच अधिकारी एसीएम फर्स्ट, दोनों का ही तबादला हो गया है। इसके साथ ही मामले की फाइल भी दब गई है।
विज्ञापन
इस मामले की फाइल अभी मुझे देखनी है। इस मामले में जो भी कार्रवाई होनी है, उसे जल्द ही किया जाएगा। - महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी