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आतंकवाद के खिलाफ जारी हुआ फतवा
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बरेली। तंजीम उलमा इस्लाम की दिल्ली में संपन्न हुई इस्लामी कांफ्रेंस में आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी किया गया। इस पर कांफ्रेंस में देश-विदेश के पांच सौ मुफ्तियों ने अपना समर्थन देते हुए खुले तौर पर इस्लाम और इंसानियत के खिलाफ बताया।
इस फतवे का एलान दिल्ली में तंजीम की ओर से आयोजित ख्वाजा गरीब नवाज वर्ल्ड पीस कांफ्रेंस और जश्न-ए-सद्साला आला हजरत के मौके पर किया गया। आतंकवाद पर फतवे के लिए गरीब नवाज एजुकेशनल एवं डेवलपमेंट कौंसिल के महासचिव कारी मोहम्मद मियां मजहरी ने सवाल डाला था। इस पर दिल्ली स्थित सुन्नी दारुल इफ्ता के प्रधान मुफ्ती मोहम्मद इकबाल अहमद मिस्बाही ने फतवा दिया। इसमें इस्लाम को अमन और शांति का धर्म बताया। कहा, मुसलमान वही जो अल्लाह की किताब कुरान अजीम और सुन्नते रसूल की शिक्षा पर अमल करता हो। आतंकवाद को परिभाषित करते हुए कहा कि अकारण किसी अवाम या हुकूमत पर अपनी नासमझी या गलत नजरिए को सही और इस्लामी अकीदा मानकर लोगों के जान-माल को तबाह करना नाजायज और हराम है। फतवे में पांच बिंदुओं पर आतंकवाद को गलत साबित किया गया है। इसके मुताबिक, अल्लाह कुरान के पारा-6 की आयत 32 में कहता है कि ‘किसी इंसान को बेवजह या जमीन (दुनिया) में फसाद फैलाने या अत्याचार के बगैर किसी ने कत्ल किया (नाहक) तो मानो उसने पूरी इंसानियत की हत्या की।’ मजहबी रोशनी में यह भी कहा है कि आतंकवाद का अमल पूरी तरह गैर इस्लामी और गैर इंसानी है। इस्लाम में किसी बेकसूर इंसान को हथियार दिखाकर डराना तक नाजायज है, फिर बेकसूर की जान लेना तो जायज हो ही नहीं सकता। यह जानकारी तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने दी है।
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इस फतवे का एलान दिल्ली में तंजीम की ओर से आयोजित ख्वाजा गरीब नवाज वर्ल्ड पीस कांफ्रेंस और जश्न-ए-सद्साला आला हजरत के मौके पर किया गया। आतंकवाद पर फतवे के लिए गरीब नवाज एजुकेशनल एवं डेवलपमेंट कौंसिल के महासचिव कारी मोहम्मद मियां मजहरी ने सवाल डाला था। इस पर दिल्ली स्थित सुन्नी दारुल इफ्ता के प्रधान मुफ्ती मोहम्मद इकबाल अहमद मिस्बाही ने फतवा दिया। इसमें इस्लाम को अमन और शांति का धर्म बताया। कहा, मुसलमान वही जो अल्लाह की किताब कुरान अजीम और सुन्नते रसूल की शिक्षा पर अमल करता हो। आतंकवाद को परिभाषित करते हुए कहा कि अकारण किसी अवाम या हुकूमत पर अपनी नासमझी या गलत नजरिए को सही और इस्लामी अकीदा मानकर लोगों के जान-माल को तबाह करना नाजायज और हराम है। फतवे में पांच बिंदुओं पर आतंकवाद को गलत साबित किया गया है। इसके मुताबिक, अल्लाह कुरान के पारा-6 की आयत 32 में कहता है कि ‘किसी इंसान को बेवजह या जमीन (दुनिया) में फसाद फैलाने या अत्याचार के बगैर किसी ने कत्ल किया (नाहक) तो मानो उसने पूरी इंसानियत की हत्या की।’ मजहबी रोशनी में यह भी कहा है कि आतंकवाद का अमल पूरी तरह गैर इस्लामी और गैर इंसानी है। इस्लाम में किसी बेकसूर इंसान को हथियार दिखाकर डराना तक नाजायज है, फिर बेकसूर की जान लेना तो जायज हो ही नहीं सकता। यह जानकारी तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने दी है।
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