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32 आंगनबाड़ी केंद्र भवनों की गुणवत्ता खराब
Updated Sat, 24 Jun 2017 06:34 PM IST
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बरेली।
बाल कल्याण विभाग के सत्यापन में 32 आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता खराब पायी गई। इनकी मरम्मत कराने के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से कार्यदायी संस्थाओं को चिट्ठी लिखी गई, लेकिन संस्थाओं ने फंड न होने का हवाला देकर भवन की मरम्मत कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आठ आंगनबाड़ी केंद्रों को खराब गुणवत्ता के चलते हैंडओवर नहीं किया गया।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने मल्टी सेक्टर डेवलपमेंट योजना के तहत बरेली में अल्पसंख्यक बहुल गांवों में 119 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण स्वीकृत किए थे। प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन की लागत 4.5 लाख थी। प्रथम चरण में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को आधा बजट जारी किया गया था। केंद्रों के निर्माण का काम सीएंडडीएस और पैकफेड को मिला था। ब्लाक फरीदपुर के गांव गांधी नगर में नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र की बिल्डिंग की फर्श धंस गई। छत और खिड़की भी टूट गए। भवन तालाब भी की जमीन पर बना दिया गया। गांधी नगर ही नहीं, 32 आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता खराब पाई गई। नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता की जांच कई बार हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। न तो सीएंडडीएस ठेकेदारों से अर्थ दंड वसूला गया और न ही भवनों की मरम्मत कराई जा रही है। हैंडओवर हो चुके 111 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन की गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं बतायी जा रही है।
आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कई बार हो चुकी है। इसमें कहीं न कहीं क्वालिटी से कांप्रोमाइज किया गया है। हम कार्यदायी संस्थाओं को कई बार मरम्मत कराने के लिए पत्र लिख चुके हैं। वह कहते हैं किस फंड से मरम्मत कराएं। अब खराब भवनों को ग्राम पंचायत निधि से मरम्मत कराने की सोच रहे हैं। - बुद्धि मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल कल्याण
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बाल कल्याण विभाग के सत्यापन में 32 आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता खराब पायी गई। इनकी मरम्मत कराने के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से कार्यदायी संस्थाओं को चिट्ठी लिखी गई, लेकिन संस्थाओं ने फंड न होने का हवाला देकर भवन की मरम्मत कराने से हाथ खड़े कर दिए हैं। आठ आंगनबाड़ी केंद्रों को खराब गुणवत्ता के चलते हैंडओवर नहीं किया गया।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने मल्टी सेक्टर डेवलपमेंट योजना के तहत बरेली में अल्पसंख्यक बहुल गांवों में 119 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण स्वीकृत किए थे। प्रत्येक आंगनबाड़ी भवन की लागत 4.5 लाख थी। प्रथम चरण में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को आधा बजट जारी किया गया था। केंद्रों के निर्माण का काम सीएंडडीएस और पैकफेड को मिला था। ब्लाक फरीदपुर के गांव गांधी नगर में नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्र की बिल्डिंग की फर्श धंस गई। छत और खिड़की भी टूट गए। भवन तालाब भी की जमीन पर बना दिया गया। गांधी नगर ही नहीं, 32 आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता खराब पाई गई। नवनिर्मित आंगनबाड़ी केंद्रों की गुणवत्ता की जांच कई बार हो चुकी है लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। न तो सीएंडडीएस ठेकेदारों से अर्थ दंड वसूला गया और न ही भवनों की मरम्मत कराई जा रही है। हैंडओवर हो चुके 111 आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन की गुणवत्ता भी मानक के अनुरूप नहीं बतायी जा रही है।
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आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच कई बार हो चुकी है। इसमें कहीं न कहीं क्वालिटी से कांप्रोमाइज किया गया है। हम कार्यदायी संस्थाओं को कई बार मरम्मत कराने के लिए पत्र लिख चुके हैं। वह कहते हैं किस फंड से मरम्मत कराएं। अब खराब भवनों को ग्राम पंचायत निधि से मरम्मत कराने की सोच रहे हैं। - बुद्धि मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल कल्याण
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