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उद्योगों में अनुसंधान करेंगे 50 फीसदी शोधार्थी : डॉ. त्रिवेणी
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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर में संचालित एकेडमिक सत्र से 50 फीसदी शोधार्थियों को उद्योगों में अनुसंधान के लिए भेजने का निर्णय हुआ। उद्योग जगत अनुसंधान के अनुबंध, सहयोगी और पीपीपी मॉडल के रूप में अनुसंधान गतिविधि में प्रतिभाग भी करेंगे।
यह जानकारी शुक्रवार को आईवीआरआई में आयोजित उद्योग, स्टार्टअप, किसान उत्पादक संगठन, एकेडमिक इंटरफेस मीट की हाइब्रिड मोड आयोजित बैठक में संस्थान निदेशक डाॅ. त्रिवेणी दत्त ने दी। उन्होंने कहा कि संस्थान ने अब तक उद्योगों के साथ तकनीकि के हस्तानांतरण के लिए 156 अनुबंध किए हैं। 32 स्टार्टअप के करार हुए हैं। उद्योग और संस्थानों को आपसी सहयोग से कार्य करने पर जोर दिया। कहा कि शोधार्थी उद्योगों में अनुसंधान करेंगे तो वर्तमान जरूरत के अनुसार बेहतर खोज होंगी। लिहाजा, 50 फीसदी शोधार्थी उद्योगों में भेजे जाएंगे।
संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने कहा कि आयोजन के दौरान कुछ कंपनियों ने पीसीआर, पशुपालन संबंधी प्रौद्योगिकि, गोट मिल्क रिपलेसर, सुअर पालन प्रशिक्षण, एआई, वर्मीकम्पोस्टिंग, सुलभ चारा उत्पादन, पशु का आवास, पूरक आहार उत्पादन प्रशिक्षण की बात कही। 18 कंपनियों ने अनुसंधान, 17 कंपनियों ने उत्पादों के मानकीकरण, 20 कंपनियों ने लेटरल फ्लो किट, कैनाइन, फेलाइन रोग के लिए रियल टाइम पीसीआर, प्रजनन तकनीक, बकरी उत्पादन, सुअर पालन, प्रोबाॅयोटिक्स, फीड सप्लीमेंट में अनुसंधान, उत्पाद विकास में रुचि दिखाई। कुछ कंपनियों ने संस्थान के छात्रों को फेलोशिप, चार कंपनियों ने ऑन-कैंपस भर्ती अभियान शुरू करने की बात रखी।
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संस्थान के कोलकाता केंद्र से डॉ. श्यामल नसकर, डॉ. अर्नव सेन, डॉ. पल्लव चौधरी, आईवीआरआई इज्जतनगर के डॉ. शुभाशीष बंधोपाध्याय, आईटीएमयू प्रभारी डॉ. अनुज चौहान समेत डॉ. प्रेमांशु दंडपत, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह, संयुक्त निदेशक कैडराड डॉ. केपी सिंह, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता, डॉ. बबलू कुमार, डॉ. मिराज खान, डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह, डॉ. अखिलेश कुमार अन्य मौजूद रहे।
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यह जानकारी शुक्रवार को आईवीआरआई में आयोजित उद्योग, स्टार्टअप, किसान उत्पादक संगठन, एकेडमिक इंटरफेस मीट की हाइब्रिड मोड आयोजित बैठक में संस्थान निदेशक डाॅ. त्रिवेणी दत्त ने दी। उन्होंने कहा कि संस्थान ने अब तक उद्योगों के साथ तकनीकि के हस्तानांतरण के लिए 156 अनुबंध किए हैं। 32 स्टार्टअप के करार हुए हैं। उद्योग और संस्थानों को आपसी सहयोग से कार्य करने पर जोर दिया। कहा कि शोधार्थी उद्योगों में अनुसंधान करेंगे तो वर्तमान जरूरत के अनुसार बेहतर खोज होंगी। लिहाजा, 50 फीसदी शोधार्थी उद्योगों में भेजे जाएंगे।
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संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने कहा कि आयोजन के दौरान कुछ कंपनियों ने पीसीआर, पशुपालन संबंधी प्रौद्योगिकि, गोट मिल्क रिपलेसर, सुअर पालन प्रशिक्षण, एआई, वर्मीकम्पोस्टिंग, सुलभ चारा उत्पादन, पशु का आवास, पूरक आहार उत्पादन प्रशिक्षण की बात कही। 18 कंपनियों ने अनुसंधान, 17 कंपनियों ने उत्पादों के मानकीकरण, 20 कंपनियों ने लेटरल फ्लो किट, कैनाइन, फेलाइन रोग के लिए रियल टाइम पीसीआर, प्रजनन तकनीक, बकरी उत्पादन, सुअर पालन, प्रोबाॅयोटिक्स, फीड सप्लीमेंट में अनुसंधान, उत्पाद विकास में रुचि दिखाई। कुछ कंपनियों ने संस्थान के छात्रों को फेलोशिप, चार कंपनियों ने ऑन-कैंपस भर्ती अभियान शुरू करने की बात रखी।
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संस्थान के कोलकाता केंद्र से डॉ. श्यामल नसकर, डॉ. अर्नव सेन, डॉ. पल्लव चौधरी, आईवीआरआई इज्जतनगर के डॉ. शुभाशीष बंधोपाध्याय, आईटीएमयू प्रभारी डॉ. अनुज चौहान समेत डॉ. प्रेमांशु दंडपत, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह, संयुक्त निदेशक कैडराड डॉ. केपी सिंह, संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डॉ. एसके मेंदीरत्ता, डॉ. बबलू कुमार, डॉ. मिराज खान, डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह, डॉ. अखिलेश कुमार अन्य मौजूद रहे।

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के परिसर में आयोजित भारत नेपाल मैत्री महोत्सव में कार्यक्रम का मंचन करत

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