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मंदिर के लिए अपने ही सांसद के खिलाफ धरना देंगे विधायक
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मंदिर के लिए सांसद के खिलाफ धरना देंगे विधायक
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। शिव मंदिर की बाउंड्रीवाल निर्माण कराने पर पहले गांव के दो पक्ष आमने-सामने थे। मगर, अब दोनों पक्षों की मदद को भाजपा के ही सांसद और विधायक भिड़ गए हैं। दोनों की रस्साकसी से न केवल भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है, बल्कि अफसर पशोपेश में हैं। ‘सांसद’ ने मंदिर की दीवार का निर्माण रोकने वालों के पक्ष में डीएम से सिफारिश की तो पुलिस ने निर्माण कराने वाले पक्ष से दो-तीन लोग उठाकर थाने में बैठा लिए। यह बात जब ‘विधायक’ को पता चली तो उन्होंने इंस्पेक्टर से लेकर तहसीलदार, एसडीएम और एडीएम प्रशासन पर दोनों को तुरंत छोड़ने का दबाव बनाया। पुलिस ने दबाव में आकर उठाए गए लोगों को तुरंत छोड़ दिया, लेकिन निर्माण कार्य न कराने की सख्त हिदायत दी। ‘विधायक’ ने अफसरों को चेतावनी दी है कि मंदिर की बाउंड्रीवाल हर हाल में बनवाओ। वरना, वह अफसरों के रवैए और ‘सांसद’ का अपने विधानसभा क्षेत्र में हस्तक्षेप को लेकर मंदिर पर ही धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे। ‘विधायक’ की चेतावनी से प्रशासन ने दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश शुरू करा दी है।
बड़ा बाईपास के गांव नवदिया झादा में सड़क के किनारे बहुत पुराना शिव मंदिर बना है। लगभग सवा बीघा जमीन पर एक बड़ा शिव मंदिर है और दूसरा छोटा। एक मंदिर बजरंग बली का भी है। बगल में एक मढ़ी है, जिसमें दो कमरे और एक बरामदा है। इसमें मंदिर के पुजारी और भक्तगण रहते हैं। गांव के ही एक पक्ष ने मंदिर के चारों ओर बाउंड्रीवाल बनवाना शुरू कराया तो दूसरा पक्ष आपत्ति करने लगा। दोनों पक्षों में तनातनी हो गई। बाउंड्रीवाल का विरोध करने वाले पक्ष ने ‘सांसद’ की शरण ले ली और बनवाने वाला पक्ष ‘विधायक’ की शरण में पहुंच गया। एसडीएम सदर ने मंदिर की जमीन की जांच कानून गो और लेखपाल से कराई। इसके बाद फिर निर्माण शुरू हो गया। दूसरा पक्ष फिर सांसद जी के दरबार में पहुंच गया तो उन्होंने डीएम से बात करके काम रुकवाने का दबाव बनाया। डीएम ने पूरे मामले की जांच एडीएम प्रशासन को सौंप दी। जब विधायक को यह बात पता चली कि उनके विधानसभा क्षेत्र में ‘सांसद’( जिन्हें वह अपना राजनीतिक ‘गुरु’ भी मानते हैं) हस्तक्षेप कर रहे हैं तो वह अफसरों पर आग बबूला हो गए। विधायक ने अफसरों को चेतावनी दी कि अगर शिव मंदिर का बाउंड्रीवाल निर्माण रोका गया तो उनको वह धरने पर बैठ जाएंगे। यह सुनते ही अफसरों के हाथ पांव फूलने लगे। अब अफसर तक पशोपेश में हैं कि वह सांसद की मानें या विधायक की। फिलहाल, दोनों पक्षों में सुलह समझौते की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी की निर्माण की हिमायत
भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर के पास भी मंदिर की बाउंड्रीवाल बनाने वाला पक्ष पहुंचा तो उन्होंने प्रशासनिक अफसरों से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि जब तहसील के नक्शे में ग्राम समाज की जमीन मंदिर की है तो बाउंड्रीवाल निर्माण रोके जाने का कोई मतलब नहीं है। वह इस संबंध में मंत्री जी से भी बात कर चुके हैं। जिलाध्यक्ष के अनुसार प्रशासन ने जब जमीन की नापजोख करा ली है और वह एरिया मंदिर सीमा में आ रहा है तो बाउंड्रीवाल बनने देना चाहिए।
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बड़ा बाईपास के गांव नवदिया झादा में सड़क के किनारे बहुत पुराना शिव मंदिर बना है। लगभग सवा बीघा जमीन पर एक बड़ा शिव मंदिर है और दूसरा छोटा। एक मंदिर बजरंग बली का भी है। बगल में एक मढ़ी है, जिसमें दो कमरे और एक बरामदा है। इसमें मंदिर के पुजारी और भक्तगण रहते हैं। गांव के ही एक पक्ष ने मंदिर के चारों ओर बाउंड्रीवाल बनवाना शुरू कराया तो दूसरा पक्ष आपत्ति करने लगा। दोनों पक्षों में तनातनी हो गई। बाउंड्रीवाल का विरोध करने वाले पक्ष ने ‘सांसद’ की शरण ले ली और बनवाने वाला पक्ष ‘विधायक’ की शरण में पहुंच गया। एसडीएम सदर ने मंदिर की जमीन की जांच कानून गो और लेखपाल से कराई। इसके बाद फिर निर्माण शुरू हो गया। दूसरा पक्ष फिर सांसद जी के दरबार में पहुंच गया तो उन्होंने डीएम से बात करके काम रुकवाने का दबाव बनाया। डीएम ने पूरे मामले की जांच एडीएम प्रशासन को सौंप दी। जब विधायक को यह बात पता चली कि उनके विधानसभा क्षेत्र में ‘सांसद’( जिन्हें वह अपना राजनीतिक ‘गुरु’ भी मानते हैं) हस्तक्षेप कर रहे हैं तो वह अफसरों पर आग बबूला हो गए। विधायक ने अफसरों को चेतावनी दी कि अगर शिव मंदिर का बाउंड्रीवाल निर्माण रोका गया तो उनको वह धरने पर बैठ जाएंगे। यह सुनते ही अफसरों के हाथ पांव फूलने लगे। अब अफसर तक पशोपेश में हैं कि वह सांसद की मानें या विधायक की। फिलहाल, दोनों पक्षों में सुलह समझौते की कोशिशें शुरू हो गई हैं।
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भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी की निर्माण की हिमायत
भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्र सिंह राठौर के पास भी मंदिर की बाउंड्रीवाल बनाने वाला पक्ष पहुंचा तो उन्होंने प्रशासनिक अफसरों से फोन पर बात की। उन्होंने बताया कि जब तहसील के नक्शे में ग्राम समाज की जमीन मंदिर की है तो बाउंड्रीवाल निर्माण रोके जाने का कोई मतलब नहीं है। वह इस संबंध में मंत्री जी से भी बात कर चुके हैं। जिलाध्यक्ष के अनुसार प्रशासन ने जब जमीन की नापजोख करा ली है और वह एरिया मंदिर सीमा में आ रहा है तो बाउंड्रीवाल बनने देना चाहिए।
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