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संकर धान बीज खरीद में करोड़ों ठिकाने लग गए, सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद मचा हड़कंप
Tue, 29 Jan 2019 02:58 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Tue, 29 Jan 2019 02:58 AM IST
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बरेली। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना में कृषि विभाग ने किसानों को खरीफ सीजन में संकर प्रजाति के धान के बीज वितरण के नाम पर बरेली समेत प्रदेश के 23 जिलों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं कर करोड़ों का बजट ठिकाने लगा दिया। न तो इसमें किसानों को उन्नतिशील प्रजाति के संकर धान की खेती के लिए कहीं तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया, न ही पात्र किसानों को बुवाई के लिए समय पर बीज वितरित हुए।
अफसर और बाबुओं के चहेते (जो बीते बरसों में भी कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाते आए हैं) ही बीज, कीटनाशक, खाद और कृषि यंत्र सब्सिडी पर फायदा उठा ले गए। किसी भी ब्लाक में सार्वजनिक तौर पर क्लस्टर प्रदर्शन कराए बिना ही ट्रेनिंग और बीज वितरण की खानापूर्ति कर दी गई। अब तक अधिकांश किसानों के खातों में सब्सिडी की धनराशि ही ट्रांसफर नहीं हो सकी है। बीज वितरण में अनियमितताओं की सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है।
संकर प्रजाति के हाईब्रिड बीज किसानों को 10 साल से अधिक की प्रजाति को 1000 रुपये प्रति क्विंटल और 10 साल से कम प्रजाति 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दिया जाना था। किसानों को शत प्रतिशत सब्सिडी उनके खाते में भेजी जानी थी। खरीफ सीजन में मई तक, रबी सीजन में अक्टूबर तक और जायद सीजन में फरवरी तक क्लस्टर में इसे वितरित किया जाना था।
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चयनित किसानों को कैफेटेरिया ऑफ इंटरवेन्शन में इंगित प्रोत्साहन राशि उनके खाते में निर्धारित समय में डीबीटी (डायरेक्टर बेनीफिट ट्रांसफर) हस्तांतरित होनी थी। मगर, कृषि विभाग के स्टाफ ने अधिकांश ब्लाकों में क्लस्टर प्रदर्शन न करके चुनिंदा किसानों की सूची तैयार कर उसमें ही संकर धान खरीदने और उसमें सब्सिडी पाने वाले किसानों के नाम चढ़ा दिए। न तो खुली बैठक में किसानों का चयन किया गया और न ही पात्र किसानों का चयन करने के लिए प्रधान, एटीएम या स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद ली गई।
ये हैं लाभार्थी चयन के नियम
1- बजट का 10 प्रतिशत कंपोनेंट प्लान (एससीपी) अनुसूचित जाति एवं ट्राइबल सब प्लान (टीएसपी) अनुसूचित जनजाति के लिए चिह्नित होगा।
2- ग्राम पंचायतों की खुली बैठक में लाभार्थियों का चयन होगा
3- बजट की 33 प्रतिशत धनराशि लघु एवं सीमांत किसानों के लिए रखी जाएगी
4- लाभार्थियों में कम से कम 30 प्रतिशत महिला किसान शामिल होंगे
5-बीज एवं अन्य निवेशों पर पांच हेक्टेयर जोत सीमा तक ही किसान आच्छादित हो सकेंगे, लेकिन लाभ केवल दो हेक्टेयर सीमा तक ही मिलेगा।
6- जिला स्तरीय बीज कमेटी बनेगी, जो बीज वितरण से पहले लाभार्थियों का सत्यापन करेगी। कमेटी बीज की मांग और वितरण भी देखेगी।
7- किसानों को प्रशिक्षण, मूल्यांकन में कृषि विश्वविद्यालय के केवीके, एटीएम प्रतिष्ठित एनजीओ और संबंधित विभागों का सहयोग लिया जाएगा।
कैसे हुई बीज वितरण में अनियमितता
संकर प्रजाति हाइब्रिड धान बीज वितरण प्रति बीघा किलो पात्र किसानों को वितरित किया जाना था। जो किसान सूची में शामिल हैं, उनमें से किसी किसान के पास 10 बीघा जमीन है, उनको बीज 40 या 80 बीघे का मिल गया। क्यारा, आलमपुर जाफराबाद, रामनगर और बिथरी समेत समस्त ब्लाकों में बीज वितरण में भारी अनियमितताएं की गई हैं।
चयनित किसानों को देनी थी ट्रेनिंग
उन्नतिशील खेती से आमदनी दो गुनी करने के लिए किसानों को फसल पद्धति पर ब्लाकस्तरीय प्रशिक्षण देने के भी इंतजाम किए गए थे। इसमें एक फसली मौसम में दो सत्र प्रशिक्षण के रखे गए थे। प्रथम सत्र खरीफ के प्रारंभ में और द्वितीय सत्र कटाई के समय। तृतीय सत्र रबी के प्रारंभ और चतुर्थ सत्र रबी फसलों की कटाई के समय। प्रत्येक प्रशिक्षण में कम से कम 30 किसानों को प्रतिभाग करना था। दोनों सत्रों में एक ही तरह के किसानों को ट्रेनिंग मिलनी थी।
क्या है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
वर्ष 2007-08 मेें उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना लागू की गई। योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रफल और उत्पादकता वृद्धि को टिकाऊ बनाते हुए उत्पादन में बढ़ोत्तरी करना, भूमि की उर्वरता उत्पादकता को बढ़ाना और कृषि क्षेत्रों के स्तर पर लाभकारी परिदृश्य स्थापित करना है। वर्तमान में इस योजना में पांच घटक शामिल हैं- 1- चावल घटक में 23 जनपद हैं। 2- गेहूं घटक में 31 जनपद हैं। 3-दलहन घटक में सभी 75 जिले शामिल हैं। कोर्स सीरियल में 20 और कामर्शियल क्रॉप में 33 जनपद (जूट-पांच, कपास-4 और गन्ना-24 जिले) शामिल हैं।
23 जिलों में लागू है योजना
बरेली, अलीगढ़, बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, प्रतापगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, संत कबीरनगर, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, अमेठी, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती।
एनएफएसएम योजना में अपात्रों में चयन हो ही नहीं सकता क्योंकि हमें उनके खातों में सब्सिडी भी भेजनी होती है। हां, चयनित किसानों के खातों में अभी सब्सिडी नहीं पहुंची है। उसे भिजवाया जा रहा है। - यूपी सिंह, उप कृषि निदेशक अतिरिक्त प्रभार
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अफसर और बाबुओं के चहेते (जो बीते बरसों में भी कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाते आए हैं) ही बीज, कीटनाशक, खाद और कृषि यंत्र सब्सिडी पर फायदा उठा ले गए। किसी भी ब्लाक में सार्वजनिक तौर पर क्लस्टर प्रदर्शन कराए बिना ही ट्रेनिंग और बीज वितरण की खानापूर्ति कर दी गई। अब तक अधिकांश किसानों के खातों में सब्सिडी की धनराशि ही ट्रांसफर नहीं हो सकी है। बीज वितरण में अनियमितताओं की सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मच गया है।
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संकर प्रजाति के हाईब्रिड बीज किसानों को 10 साल से अधिक की प्रजाति को 1000 रुपये प्रति क्विंटल और 10 साल से कम प्रजाति 2000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से दिया जाना था। किसानों को शत प्रतिशत सब्सिडी उनके खाते में भेजी जानी थी। खरीफ सीजन में मई तक, रबी सीजन में अक्टूबर तक और जायद सीजन में फरवरी तक क्लस्टर में इसे वितरित किया जाना था।
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चयनित किसानों को कैफेटेरिया ऑफ इंटरवेन्शन में इंगित प्रोत्साहन राशि उनके खाते में निर्धारित समय में डीबीटी (डायरेक्टर बेनीफिट ट्रांसफर) हस्तांतरित होनी थी। मगर, कृषि विभाग के स्टाफ ने अधिकांश ब्लाकों में क्लस्टर प्रदर्शन न करके चुनिंदा किसानों की सूची तैयार कर उसमें ही संकर धान खरीदने और उसमें सब्सिडी पाने वाले किसानों के नाम चढ़ा दिए। न तो खुली बैठक में किसानों का चयन किया गया और न ही पात्र किसानों का चयन करने के लिए प्रधान, एटीएम या स्वयं सेवी संस्थाओं की मदद ली गई।
ये हैं लाभार्थी चयन के नियम
1- बजट का 10 प्रतिशत कंपोनेंट प्लान (एससीपी) अनुसूचित जाति एवं ट्राइबल सब प्लान (टीएसपी) अनुसूचित जनजाति के लिए चिह्नित होगा।
2- ग्राम पंचायतों की खुली बैठक में लाभार्थियों का चयन होगा
3- बजट की 33 प्रतिशत धनराशि लघु एवं सीमांत किसानों के लिए रखी जाएगी
4- लाभार्थियों में कम से कम 30 प्रतिशत महिला किसान शामिल होंगे
5-बीज एवं अन्य निवेशों पर पांच हेक्टेयर जोत सीमा तक ही किसान आच्छादित हो सकेंगे, लेकिन लाभ केवल दो हेक्टेयर सीमा तक ही मिलेगा।
6- जिला स्तरीय बीज कमेटी बनेगी, जो बीज वितरण से पहले लाभार्थियों का सत्यापन करेगी। कमेटी बीज की मांग और वितरण भी देखेगी।
7- किसानों को प्रशिक्षण, मूल्यांकन में कृषि विश्वविद्यालय के केवीके, एटीएम प्रतिष्ठित एनजीओ और संबंधित विभागों का सहयोग लिया जाएगा।
कैसे हुई बीज वितरण में अनियमितता
संकर प्रजाति हाइब्रिड धान बीज वितरण प्रति बीघा किलो पात्र किसानों को वितरित किया जाना था। जो किसान सूची में शामिल हैं, उनमें से किसी किसान के पास 10 बीघा जमीन है, उनको बीज 40 या 80 बीघे का मिल गया। क्यारा, आलमपुर जाफराबाद, रामनगर और बिथरी समेत समस्त ब्लाकों में बीज वितरण में भारी अनियमितताएं की गई हैं।
चयनित किसानों को देनी थी ट्रेनिंग
उन्नतिशील खेती से आमदनी दो गुनी करने के लिए किसानों को फसल पद्धति पर ब्लाकस्तरीय प्रशिक्षण देने के भी इंतजाम किए गए थे। इसमें एक फसली मौसम में दो सत्र प्रशिक्षण के रखे गए थे। प्रथम सत्र खरीफ के प्रारंभ में और द्वितीय सत्र कटाई के समय। तृतीय सत्र रबी के प्रारंभ और चतुर्थ सत्र रबी फसलों की कटाई के समय। प्रत्येक प्रशिक्षण में कम से कम 30 किसानों को प्रतिभाग करना था। दोनों सत्रों में एक ही तरह के किसानों को ट्रेनिंग मिलनी थी।
क्या है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
वर्ष 2007-08 मेें उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना लागू की गई। योजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रफल और उत्पादकता वृद्धि को टिकाऊ बनाते हुए उत्पादन में बढ़ोत्तरी करना, भूमि की उर्वरता उत्पादकता को बढ़ाना और कृषि क्षेत्रों के स्तर पर लाभकारी परिदृश्य स्थापित करना है। वर्तमान में इस योजना में पांच घटक शामिल हैं- 1- चावल घटक में 23 जनपद हैं। 2- गेहूं घटक में 31 जनपद हैं। 3-दलहन घटक में सभी 75 जिले शामिल हैं। कोर्स सीरियल में 20 और कामर्शियल क्रॉप में 33 जनपद (जूट-पांच, कपास-4 और गन्ना-24 जिले) शामिल हैं।
23 जिलों में लागू है योजना
बरेली, अलीगढ़, बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, प्रतापगढ़, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, संत कबीरनगर, उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, अमेठी, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती।
एनएफएसएम योजना में अपात्रों में चयन हो ही नहीं सकता क्योंकि हमें उनके खातों में सब्सिडी भी भेजनी होती है। हां, चयनित किसानों के खातों में अभी सब्सिडी नहीं पहुंची है। उसे भिजवाया जा रहा है। - यूपी सिंह, उप कृषि निदेशक अतिरिक्त प्रभार