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लोकसभा चुनाव- 2019- बरेली के मतदाताओं को रास नहीं आए बाहरी प्रत्याशी
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बरेली। देश की राजधानी दिल्ली और प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीच में उत्तराखंड का प्रवेश द्वार कहा जाने वाला बरेली शहर राजनीतिक दृष्टि से हमेशा एक अलग मिजाज का शहर रहा है। बरेली के मतदाताओं ने किसी भी लोकसभा चुनाव में बाहरी प्रत्याशियों को बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दी। पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की पत्नी बेगम आबिदा अहमद जरूर एक बार उपचुनाव और दूसरी बार चुनाव जीतकर संसद भवन पहुुंची। बाकी जो भी बाहरी प्रत्याशी लड़े, उनको पराजय का ही मुंह देखना पड़ा। इस बार हालांकि प्रमुख राजनीतिक दलों में से कोई भी प्रत्याशी बाहरी नहीं है। भाजपा, कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के सभी स्थानीय प्रत्याशी ही एक दूसरे को कांटे की टक्कर दे रहे हैं।
वर्ष 1951 और 57 में चुनाव जीते कांग्रेस प्रत्याशी सतीशचंद्रा और 1962 में जनसंघ प्रत्याशी बृजराज सिंह, 1967 में संसद सदस्य चुने गए बीबी लाल सभी स्थानीय प्रत्याशी थी। उसके बाद वर्ष 1971 में एक बार फिर से कांग्रेस से सतीशचंद्रा ने लोकसभा चुनाव में जीत का परचम फहराया। जनता लहर में वर्ष 1977 में राममूर्ति और 1980 में लोकसभा चुनाव जीते मिसिर यार खां भी बरेली के ही रहने वाले थे। वर्ष 1981 के उपचुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की पत्नी बेगम आबिदा अहमद को उतारा। वह उपचुनाव जीत गईं। फिर वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी लहर में राजीव गांधी ने भी एक बार फिर से आबिदा अहमद को ही टिकट दिया और वह दोबारा संसद सदस्य चुनी गईं। मगर, इसके बाद आबिदा बेगम जनता दल के मंडल कमंडल के दौर यानी 1989 में भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार के हाथों पराजित हो गईं। तभी से कांग्रेस समेत बाकी प्रमुख दलों ने बरेली में बाहरी प्रत्याशी पर दांव लगाना बंद कर दिया और स्थानीय दावेदारों को ही टिकट दिए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी स्थानीय ही हैं।
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वर्ष 1951 और 57 में चुनाव जीते कांग्रेस प्रत्याशी सतीशचंद्रा और 1962 में जनसंघ प्रत्याशी बृजराज सिंह, 1967 में संसद सदस्य चुने गए बीबी लाल सभी स्थानीय प्रत्याशी थी। उसके बाद वर्ष 1971 में एक बार फिर से कांग्रेस से सतीशचंद्रा ने लोकसभा चुनाव में जीत का परचम फहराया। जनता लहर में वर्ष 1977 में राममूर्ति और 1980 में लोकसभा चुनाव जीते मिसिर यार खां भी बरेली के ही रहने वाले थे। वर्ष 1981 के उपचुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की पत्नी बेगम आबिदा अहमद को उतारा। वह उपचुनाव जीत गईं। फिर वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उपजी लहर में राजीव गांधी ने भी एक बार फिर से आबिदा अहमद को ही टिकट दिया और वह दोबारा संसद सदस्य चुनी गईं। मगर, इसके बाद आबिदा बेगम जनता दल के मंडल कमंडल के दौर यानी 1989 में भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार के हाथों पराजित हो गईं। तभी से कांग्रेस समेत बाकी प्रमुख दलों ने बरेली में बाहरी प्रत्याशी पर दांव लगाना बंद कर दिया और स्थानीय दावेदारों को ही टिकट दिए। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी स्थानीय ही हैं।
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