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साइबर थाने की सक्रियता से बचे सिपाही के 3.32 लाख रुपये
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ठगों ने रविवार को खाता हैक कर निकाल ली थी रकम
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बरेली। यूपी-112 में तैनात सिपाही मनोज को साइबर ठगों द्वारा खाते से उड़ाए गए 3.32 लाख रुपये वापस मिलने की उम्मीद ही नहीं थी, लेकिन वह खुशकिस्मत निकले। दूसरे दिन ही पूरी रकम उनके खाते में वापस आ गई। यह संभव हुआ साइबर थाने की टीम की सक्रियता से।
यूपी-112 में तैनात सिपाही मनोज कुमार के मोबाइल पर रविवार को मेसेज आया। इसे पढ़कर उनके होश उड़ गए। इसमें मनोज के खाते का बैलेंस शून्य बताया गया था। खाते में जमा 332088 रुपये निकाले जा चुके थे। रविवार होने के कारण वह बैंक जाकर शिकायत भी नहीं कर सके, लेकिन मेसेज आते ही तत्काल साइबर थाने जाकर शिकायत कर दी। इसके बाद साइबर थाने की टीम ठगों तक पहुंचने में जुट गई। एसआई शशांक सिंह ने बैंक से जानकारी जुटाई तो पता चला कि ठगों ने सिपाही के खाते में जमा रकम से एफडी बनवा ली है, लेकिन अभी रकम खाते से ट्रांसफर नहीं की गई है। अगर एक दिन की भी देरी हो जाती तो रकम निकल जाती। इसके बाद उन्होंने बैंक लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसी से संपर्क कर सिपाही के खाते से निकाली गई रकम को आगे किसी खाते में ट्रांसफर न करने के लिए कहा तो रकम होल्ड कर दी गई। सोमवार को साइबर थाने की टीम ने पूरी रकम सिपाही के खाते में वापस डलवा दी।
यूपी-112 में तैनात सिपाही मनोज कुमार के मोबाइल पर रविवार को मेसेज आया। इसे पढ़कर उनके होश उड़ गए। इसमें मनोज के खाते का बैलेंस शून्य बताया गया था। खाते में जमा 332088 रुपये निकाले जा चुके थे। रविवार होने के कारण वह बैंक जाकर शिकायत भी नहीं कर सके, लेकिन मेसेज आते ही तत्काल साइबर थाने जाकर शिकायत कर दी। इसके बाद साइबर थाने की टीम ठगों तक पहुंचने में जुट गई। एसआई शशांक सिंह ने बैंक से जानकारी जुटाई तो पता चला कि ठगों ने सिपाही के खाते में जमा रकम से एफडी बनवा ली है, लेकिन अभी रकम खाते से ट्रांसफर नहीं की गई है। अगर एक दिन की भी देरी हो जाती तो रकम निकल जाती। इसके बाद उन्होंने बैंक लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसी से संपर्क कर सिपाही के खाते से निकाली गई रकम को आगे किसी खाते में ट्रांसफर न करने के लिए कहा तो रकम होल्ड कर दी गई। सोमवार को साइबर थाने की टीम ने पूरी रकम सिपाही के खाते में वापस डलवा दी।
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सिपाही ने तत्काल सूचना देकर समझदारी दिखाई। अगर एक दिन की भी देरी हो जाती तो खाते से रकम निकल जाती। लोगों को इस तरह के मामलों में सचेत रहना चाहिए। किसी भी सूरत में किसी को ओटीपी न बताएं। - अनिल कुमार, इंस्पेक्टर साइबर थाना।
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