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Bareilly News: मलेरिया को मात दे चुके 2,817 लोगों की होगी माइक्रोस्कोपी जांच
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बरेली। प्रदेश के मलेरिया प्रभावित संवेदनशील जिलों की सूची में अपना जिला शामिल रहा है। मलेरिया से निपटने के लिए जरूरी है कि इलाज से परजीवी नष्ट हो जाएं, पर कई मरीज दवा का कोर्स पूरा नहीं करते। शरीर में मौजूद परजीवी बाद में सक्रिय होकर बीमारी की वजह बनते हैं। मरीज मलेरिया का वाहक बन जाता है। लिहाजा, जिले में मलेरिया को मात दे चुके 2,817 लोगों की अब माइक्रोस्कोपी जांच की तैयारी है।
मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से इसकी स्वीकृति मिल गई है। अब स्लाइड्स के जरिये स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के रक्त के नमूनों की जांच करेंगे। इसके लिए आशा और एएनएम को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र सिंह के मुताबिक फेल्सीपेरम मलेरिया की चपेट में आने वाले मरीजों की दवा चार से पांच दिन चलती है। जबकि, विवैक्स मरीजों को 14 दिन दवा खानी होती है। चार से पांच दिन दवा खाने पर बुखार उतर जाता है। इसके बाद मरीज दवा खाना दोड़ देते हैं। नतीजा, शरीर में परजीवी निष्क्रिय अवस्था में पड़े रहते हैं। वाद में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर ये उभरकर दोबारा व्यक्ति को मरीज बना देते हैं।
... तो दोबारा खानी पड़ेगी दवा
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में इस वर्ष मलेरिया की चपेट में रहे 2,817 मरीजों के रक्त के नमूने की माइक्रोस्कोपी जांच की जाएगी। अगर किसी व्यक्ति में परजीवी मौजूद मिलेंगे तो उनको दोबारा संबंंधित दवा का कोर्स पूरा करना पड़ेगा। अगर वे इसमें अनाकानी करेंगे तो क्षेत्र के प्रबुद्ध वर्ग और जरूरत के अनुसार प्रशासनिक सहयोग भी लिया जाएगा।
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मलेरिया मरीजों के फॉलोअप के तौर पर माइक्रोस्कोपी जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टीम मरीज के घर पहुंचकर स्लाइड से जांच करेगी। अगले वर्ष मरीजों की तादाद में काफी कम होने की उम्मीद है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
अमर उजाला ब्यूरो
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मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से इसकी स्वीकृति मिल गई है। अब स्लाइड्स के जरिये स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के रक्त के नमूनों की जांच करेंगे। इसके लिए आशा और एएनएम को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिला मलेरिया अधिकारी सत्येंद्र सिंह के मुताबिक फेल्सीपेरम मलेरिया की चपेट में आने वाले मरीजों की दवा चार से पांच दिन चलती है। जबकि, विवैक्स मरीजों को 14 दिन दवा खानी होती है। चार से पांच दिन दवा खाने पर बुखार उतर जाता है। इसके बाद मरीज दवा खाना दोड़ देते हैं। नतीजा, शरीर में परजीवी निष्क्रिय अवस्था में पड़े रहते हैं। वाद में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर ये उभरकर दोबारा व्यक्ति को मरीज बना देते हैं।
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... तो दोबारा खानी पड़ेगी दवा
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में इस वर्ष मलेरिया की चपेट में रहे 2,817 मरीजों के रक्त के नमूने की माइक्रोस्कोपी जांच की जाएगी। अगर किसी व्यक्ति में परजीवी मौजूद मिलेंगे तो उनको दोबारा संबंंधित दवा का कोर्स पूरा करना पड़ेगा। अगर वे इसमें अनाकानी करेंगे तो क्षेत्र के प्रबुद्ध वर्ग और जरूरत के अनुसार प्रशासनिक सहयोग भी लिया जाएगा।
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मलेरिया मरीजों के फॉलोअप के तौर पर माइक्रोस्कोपी जांच कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। टीम मरीज के घर पहुंचकर स्लाइड से जांच करेगी। अगले वर्ष मरीजों की तादाद में काफी कम होने की उम्मीद है। - डॉ. विश्राम सिंह, सीएमओ
अमर उजाला ब्यूरो