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Bareilly News: बहेड़ी में हेपेटाइटिस के 270 मरीज, अतिसंवेदनशील सूची में दर्ज

Sat, 28 Dec 2024 02:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2024 02:20 AM IST
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270 hepatitis patients in Bahedi, registered in susceptible list
बरेली। हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए चल रही जांच में बहेड़ी ब्लॉक में सर्वाधिक मरीज मिले हैं। लिहाजा, इसे अतिसंवेदनशील सूची में दर्ज कर सघन जांच और इलाज के लिए हेल्थ यूनिट बनाया जाएगा। वायरल लोड की जांच भी स्थानीय स्तर पर होगी, ताकि मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
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राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में वर्ष 2020 से हेपेटाइटिस रोकथाम की कवायद जारी है। मरीज ट्रैक करने के लिए अनाथालय, कारागार, महिला आश्रय गृह, वृद्धाश्रम आदि स्थानों पर नियमित सघन जांच हो रही है। साथ ही, ओपीडी में पहुंच रहे संदिग्ध लक्षण वाले मरीजों की भी जांच हो रही है।
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नोडल अधिकारी डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक जिले में अभी हेपेटाइटिस सी के 877 मरीज मिले हैं। इनमें सर्वाधिक 217 बहेड़ी के हैं। इसी तरह हेपेटाइटिस बी के 190 मरीजों में से 53 बहेड़ी के हैं, जो अब तक मिले कुल मरीजों का एक चौथाई है।
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बताया कि वर्ष 2011 में भी बहेड़ी के हथमना और पुलभट्टा इलाके में हेपेटाइटिस बी, सी के सर्वाधिक केस मिले थे। तब दिल्ली से स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम जांच के लिए बहेड़ी पहुंची थी। हालांकि, केस कम हुए पर अब फिर से बढ़ने लगे हैं। लिहाजा, बहेड़ी अतिसंवेदनशील क्षेत्र है।

शासन से मिली हेल्थ यूनिट संचालन की अनुमति
हेपेटाइटिस के मरीजों को बेहतर और घर पर ही इलाज की सुविधा मुहैया कराने के लिए हेल्थ यूनिट खोलने के लिए शासन ने मंजूरी दी है। सीएचसी के एक डाॅक्टर को इलाज के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि स्थानीय स्तर पर ही संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग हो और वायरल लोड जांच के बाद उन्हें दवाएं भी मिल सकें। सीबी नॉट मशीन से रोग की पुष्टि के बाद वायरल लोड की जांच होगी।


निशुल्क है संदिग्ध की जांच और मरीजों का इलाज
हेल्थ यूनिट पर हेपेटाइटिस बी, सी मरीजों का इलाज निशुल्क होगा। हेपेटाइटिस बी के मरीजों की दवा आजीवन चलती है। जबकि हेपेटाइटिस सी के मरीजों की दवा का तीन माह का कोर्स होता है। तीन माह के इलाज में करीब 1.2 लाख रुपये खर्च होते हैं। बताया कि कई मरीज दवा का कोर्स पूरा नहीं करते तो कई संदिग्ध जांच के लिए तैयार नहीं होते। लिहाजा, उनकी जांच स्थानीय स्तर पर ही कराई जाएगी। अमर उजाला ब्यूरो
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