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विदेश यात्रा करके लौटे 23 लोग ट्रेस तीन में मिले कोरोना के गंभीर लक्षण
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : demo photo
तीन लोग लापता, बाकी 15 लोगों को आइसोलेट कराकर सैंपल जांच के लिए भेजे
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अब तक नहीं पता कुल कितने लोगों की हुई वापसी, खतरे की जद में माना जा रहा बरेली
बरेली। पांच दिसंबर के बाद जिले में दूसरे देशों की यात्रा करके लौटे 23 लोगों को ट्रेस किए जाने के बाद इनमें से 15 को कोविड अस्पताल में आइसोलेट कराया गया है। इनमें से तीन में कोरोना के गंभीर लक्षण मिले हैं। सभी 15 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विदेश से लौटे तीन लोग लापता हैं। उनके ब्योरे में पूरा पता और फोन नंबर न होने से उन्हें तलाश करने की कोशिश कामयाब नहीं हो पा रही है। कई महीनों से निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो जाने की वजह से अब तक यह भी पता नहीं लग पाया है कि बरेली में हाल ही में विदेश यात्रा करके कितने लोग लौटे हैं। इसे बरेली के लिए खतरे का संकेत माना जा रहा है।
पश्चिम के कई देशों में कोरोना की अपेक्षाकृत कई गुना ज्यादा घातक नई स्ट्रेन मिलने के बाद पूरे देश में अलर्ट जारी किया गया है। करीब 70 गुना ज्यादा संक्रामक होने की वजह से इन देशों में तेजी से संक्रमण फैल रहा है। प्रदेश सरकार ने 25 नवंबर के बाद दूसरे देशों से लौटे लोगों को ट्रेस कर उनके सैंपल की जांच कराने के साथ उनकी लगातार निगरानी करने का भी निर्देश दिया है। बरेली में यह कवायद शुरू होने के बाद सर्विलांस सेल ने बृहस्पतिवार को 23 लोगों को ट्रेस किया। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें राजेंद्रनगर के दो, सिविल लाइंस के दो, गोल्डन ग्रीन पार्क के दो, पीलीभीत बाईपास के दो और रामपुर बाग और इज्जतनगर के रहने वाले तीन-तीन लोग शामिल हैं। ये सभी पांच दिसंबर के बाद बरेली लौटे हैं।
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ट्रेस करने के बाद विदेश से लौटने वाले लोगों को तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय में सैंपल कराने के लिए बुलाने को मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया तो इनमें से 15 लोगों से ही संपर्क हो पाया। बाकी आठ लोगों में तीन के दिल्ली में होने और दो के वापस कनाडा चले जाने की जानकारी मिली। तीन के बारे में कुछ पता नहीं लग पाया। बताया गया कि इन लोगों की ओर से दर्ज कराया गया पता अधूरा होने के साथ उनका फोन नंबर भी उपलब्ध नहीं है, जिससे उनसे संपर्क का रास्ता नहीं बन पाया।
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14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाना था मगर पता ही 20 दिन बाद लगा
सर्विलांस सेल दूसरे देशों से लौटे जिन लोगों से बृहस्पतिवार को संपर्क करने में कामयाब हो पाई, उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर ही उनका कोविड टेस्ट हो चुका है। सरकारी गाइड लाइन के मुताबिक इन लोगों को सात दिन के लिए संस्थागत और फिर सात दिन तक होम क्वारंटीन किया जाना चाहिए था लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का निगरानी तंत्र इस बीच पूरी तरह निष्क्रिय होने की वजह से इन लोगों को ट्रेस ही करीब 20 दिन बाद कर सका, वह भी तब जब सरकार ने कड़े निर्देश जारी किए गए। अंदेशा है कि अगर दूसरे देशों से लौटे लोगों में एक भी व्यक्ति कोरोना की नई स्ट्रेन से संक्रमित हुआ तो हालात खतरनाक हो सकते हैं।
स्पाइक जीन बेस्ड होगी आरटीपीसीआर जांच
शासन की ओर से जारी गाइड लाइन के मुताबिक विदेश से वापस आने वालों की आरटीपीसीआर जांच की जाएगी और इसमें निगेटिव मिलने के बाद भी उनकी निगरानी की जाएगी। संक्रमित पाए जाने वाले लोगों की जीन बेस्ड आरटीपीसीआर जांच कराने को कहा गया है जिसके लिए निर्धारित लैब से संपर्क किया जाएगा।
फिर सामुदायिक संक्रमण का पता लगाने को होगा सर्वे
लगातार सैंपलिंग और सर्दी बढ़ने के बावजूद संक्रमितों की कम होती तादाद ने सामुदायिक संक्रमण की आशंका को बढ़ा दिया है। लिहाजा केंद्र सरकार की ओर से एक बार फिर जिले में सीरो सर्विलांस के जरिये लोगों में एंटीबॉडी का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि अप्रैल में जब संक्रमितों की तादाद 22 से 30 के बीच ठहर गई थी, तब भी सीरो सर्विलांस सर्वे हुआ था। इस सर्वे में तीन लोग ऐसे मिले थे जो किसी संक्रमित के संपर्क में नहीं आए लेकिन फिर भी उनमें एंटीबॉडी पाई गई थी। इसके बाद अगस्त में भी जांच हुई पर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई।
ऐसे लोग जो करीब महीने भर के भीतर विदेश से वापस आए हैं, उनसे अपील है कि तत्काल अपनी जांच कराएं। ऐसे लोगों के आसपास रहने वालों से भी सूचना और सहयोग अपेक्षित है ताकि उनकी प्राथमिकता के आधार पर जांच कराई जा सके। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
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अब तक नहीं पता कुल कितने लोगों की हुई वापसी, खतरे की जद में माना जा रहा बरेली बरेली। पांच दिसंबर के बाद जिले में दूसरे देशों की यात्रा करके लौटे 23 लोगों को ट्रेस किए जाने के बाद इनमें से 15 को कोविड अस्पताल में आइसोलेट कराया गया है। इनमें से तीन में कोरोना के गंभीर लक्षण मिले हैं। सभी 15 लोगों के सैंपल जांच के लिए भेज दिए गए हैं और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। विदेश से लौटे तीन लोग लापता हैं। उनके ब्योरे में पूरा पता और फोन नंबर न होने से उन्हें तलाश करने की कोशिश कामयाब नहीं हो पा रही है। कई महीनों से निगरानी तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो जाने की वजह से अब तक यह भी पता नहीं लग पाया है कि बरेली में हाल ही में विदेश यात्रा करके कितने लोग लौटे हैं। इसे बरेली के लिए खतरे का संकेत माना जा रहा है।
पश्चिम के कई देशों में कोरोना की अपेक्षाकृत कई गुना ज्यादा घातक नई स्ट्रेन मिलने के बाद पूरे देश में अलर्ट जारी किया गया है। करीब 70 गुना ज्यादा संक्रामक होने की वजह से इन देशों में तेजी से संक्रमण फैल रहा है। प्रदेश सरकार ने 25 नवंबर के बाद दूसरे देशों से लौटे लोगों को ट्रेस कर उनके सैंपल की जांच कराने के साथ उनकी लगातार निगरानी करने का भी निर्देश दिया है। बरेली में यह कवायद शुरू होने के बाद सर्विलांस सेल ने बृहस्पतिवार को 23 लोगों को ट्रेस किया। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इनमें राजेंद्रनगर के दो, सिविल लाइंस के दो, गोल्डन ग्रीन पार्क के दो, पीलीभीत बाईपास के दो और रामपुर बाग और इज्जतनगर के रहने वाले तीन-तीन लोग शामिल हैं। ये सभी पांच दिसंबर के बाद बरेली लौटे हैं।
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ट्रेस करने के बाद विदेश से लौटने वाले लोगों को तीन सौ बेड कोविड चिकित्सालय में सैंपल कराने के लिए बुलाने को मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया तो इनमें से 15 लोगों से ही संपर्क हो पाया। बाकी आठ लोगों में तीन के दिल्ली में होने और दो के वापस कनाडा चले जाने की जानकारी मिली। तीन के बारे में कुछ पता नहीं लग पाया। बताया गया कि इन लोगों की ओर से दर्ज कराया गया पता अधूरा होने के साथ उनका फोन नंबर भी उपलब्ध नहीं है, जिससे उनसे संपर्क का रास्ता नहीं बन पाया।
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14 दिन के लिए क्वारंटीन किया जाना था मगर पता ही 20 दिन बाद लगा
सर्विलांस सेल दूसरे देशों से लौटे जिन लोगों से बृहस्पतिवार को संपर्क करने में कामयाब हो पाई, उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर ही उनका कोविड टेस्ट हो चुका है। सरकारी गाइड लाइन के मुताबिक इन लोगों को सात दिन के लिए संस्थागत और फिर सात दिन तक होम क्वारंटीन किया जाना चाहिए था लेकिन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का निगरानी तंत्र इस बीच पूरी तरह निष्क्रिय होने की वजह से इन लोगों को ट्रेस ही करीब 20 दिन बाद कर सका, वह भी तब जब सरकार ने कड़े निर्देश जारी किए गए। अंदेशा है कि अगर दूसरे देशों से लौटे लोगों में एक भी व्यक्ति कोरोना की नई स्ट्रेन से संक्रमित हुआ तो हालात खतरनाक हो सकते हैं।स्पाइक जीन बेस्ड होगी आरटीपीसीआर जांच
शासन की ओर से जारी गाइड लाइन के मुताबिक विदेश से वापस आने वालों की आरटीपीसीआर जांच की जाएगी और इसमें निगेटिव मिलने के बाद भी उनकी निगरानी की जाएगी। संक्रमित पाए जाने वाले लोगों की जीन बेस्ड आरटीपीसीआर जांच कराने को कहा गया है जिसके लिए निर्धारित लैब से संपर्क किया जाएगा।फिर सामुदायिक संक्रमण का पता लगाने को होगा सर्वे
लगातार सैंपलिंग और सर्दी बढ़ने के बावजूद संक्रमितों की कम होती तादाद ने सामुदायिक संक्रमण की आशंका को बढ़ा दिया है। लिहाजा केंद्र सरकार की ओर से एक बार फिर जिले में सीरो सर्विलांस के जरिये लोगों में एंटीबॉडी का पता लगाने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि अप्रैल में जब संक्रमितों की तादाद 22 से 30 के बीच ठहर गई थी, तब भी सीरो सर्विलांस सर्वे हुआ था। इस सर्वे में तीन लोग ऐसे मिले थे जो किसी संक्रमित के संपर्क में नहीं आए लेकिन फिर भी उनमें एंटीबॉडी पाई गई थी। इसके बाद अगस्त में भी जांच हुई पर रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई।ऐसे लोग जो करीब महीने भर के भीतर विदेश से वापस आए हैं, उनसे अपील है कि तत्काल अपनी जांच कराएं। ऐसे लोगों के आसपास रहने वालों से भी सूचना और सहयोग अपेक्षित है ताकि उनकी प्राथमिकता के आधार पर जांच कराई जा सके। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ