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सर्वार्थ सिद्धि योग में अष्टमी संग आज मनेगी रामनवमी
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सर्वार्थ सिद्धि योग में अष्टमी संग आज मनेगी रामनवमी
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। अबकी बार 13 अप्रैल यानी आज पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थसिद्धि, धृति, मित्र और बुधादित्य योग के शुभ संयोगों में रामनवमी मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक रामनवमी की तिथि मध्याह्न काल में पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र प्रधान होनी चाहिए, जो कि अष्टमी के दिन पड़ रही है। इसलिए अबकी बार मध्याह्न काल व्यापनी नवमी तिथि में श्रीराम नवमी मनाई जाएगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि शनिवार को सुबह 11.41 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि आ जाएगी। पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 8.58 बजे तक रहेगी और फिर पुष्य नक्षत्र का संयोग बन जाएगा। 14 अप्रैल रविवार को नवमी तिथि सुबह 9.35 बजे तक रहेगी, जिसके बाद दशमी लग जाएगी। नवमी मध्यान्ह को स्पर्श नहीं करेगी। 14 को मध्यान्ह 11.06 बजे से शुरू होगा और पुष्य नक्षत्र सुबह 7.39 बजे तक खत्म हो जाएगा। इस परिस्थिति में 13 अप्रैल को अष्टमी सुबह 11.41 बजे तक रहेगी। फिर नवमी शुरू हो जाएगी। इसलिए 13 अप्रैल को ही चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में मध्याह्न काल पड़ रहा है। इसलिए शनिवार को ही रामनवमी मनाया जाना शास्त्र सम्मत होगा।
उन्होेंने पुष्य नक्षत्र से मित्र योग के संयोग में पूजन से विषम परिस्थितियों में भी मजबूती से डटे रहने की सामर्थ्य प्राप्त होने की बात कही है। कहा, अवतार तिथि जो भी हो वह श्रेष्ठ कहलाती है उसमें किए जाने वाला काम कभी नहीं बिगड़ता। विधि-विधान से पूजा-अर्चन करने और कराने वालों को चौगुना फल प्राप्त होता है।
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बुधादित्य और धृति योग का शुभ फल
बताया कि बन रहे बुधादित्य योग में श्री गणेश-लक्ष्मी नवग्रह के पूजन से व्यापार में बढ़ोतरी होगी। व्यापारियों के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा। नए कार्यों का शुभारंभ करना से उत्तम फल प्राप्त होगा। असफलता के मध्य सफलता मिलेगी। प्लॉट खरीदना अथवा मकान निर्माण के लिए यह सर्वोत्तम फल देने वाला मुहूर्त है।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. सौरभ शंखधार ने बताया कि शनिवार को सुबह 11.41 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी, जिसके बाद नवमी तिथि आ जाएगी। पुनर्वसु नक्षत्र सुबह 8.58 बजे तक रहेगी और फिर पुष्य नक्षत्र का संयोग बन जाएगा। 14 अप्रैल रविवार को नवमी तिथि सुबह 9.35 बजे तक रहेगी, जिसके बाद दशमी लग जाएगी। नवमी मध्यान्ह को स्पर्श नहीं करेगी। 14 को मध्यान्ह 11.06 बजे से शुरू होगा और पुष्य नक्षत्र सुबह 7.39 बजे तक खत्म हो जाएगा। इस परिस्थिति में 13 अप्रैल को अष्टमी सुबह 11.41 बजे तक रहेगी। फिर नवमी शुरू हो जाएगी। इसलिए 13 अप्रैल को ही चैत्र शुक्ल नवमी तिथि का पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में मध्याह्न काल पड़ रहा है। इसलिए शनिवार को ही रामनवमी मनाया जाना शास्त्र सम्मत होगा।
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उन्होेंने पुष्य नक्षत्र से मित्र योग के संयोग में पूजन से विषम परिस्थितियों में भी मजबूती से डटे रहने की सामर्थ्य प्राप्त होने की बात कही है। कहा, अवतार तिथि जो भी हो वह श्रेष्ठ कहलाती है उसमें किए जाने वाला काम कभी नहीं बिगड़ता। विधि-विधान से पूजा-अर्चन करने और कराने वालों को चौगुना फल प्राप्त होता है।
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बुधादित्य और धृति योग का शुभ फल
बताया कि बन रहे बुधादित्य योग में श्री गणेश-लक्ष्मी नवग्रह के पूजन से व्यापार में बढ़ोतरी होगी। व्यापारियों के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा। नए कार्यों का शुभारंभ करना से उत्तम फल प्राप्त होगा। असफलता के मध्य सफलता मिलेगी। प्लॉट खरीदना अथवा मकान निर्माण के लिए यह सर्वोत्तम फल देने वाला मुहूर्त है।