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आरटीओ कार्यालय के लिए मुफ्त जमीन दो तो बस जाए टीपीनगर
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बरेली। एक बार फिर आरटीओ ने अपना कार्यालय ट्रांसपोर्ट नगर में बनाने की कवायद शुरू करते हुए बीडीए को इसके लिए लिखे पत्र में वहां तीन एकड़ जमीन निशुल्क मुहैया कराने को कहा है। अधिकारियों ने आरटीओ कार्यालय बनने के बाद टीपी नगर बसाए जाने का अटका काम भी पूरा होने की संभावना जताई है।
आरटीओ अधिकारियोें के अनुसार ट्रांसपोर्ट नगर बसाने में ट्रांसपोर्टर अड़ंगा बने हुए हैं। वे सुविधाओं की कमी का हवाला देकर प्रशासन और बीडीए की तमाम कोशिशों के बाद भी टीपी नगर में शिफ्ट होने को तैयार नहीं हैं। ट्रांसपोर्टर जो समस्याएं गिना रहे हैं, उनमें एक टीपी नगर से आरटीओ कार्यालय की लंबी दूरी भी है। ऐसे में अगर आरटीओ कार्यालय बना तो वहां ट्रांसपोर्टर भी शिफ्ट हो सकते हैं। बता दें कि 2017 में कमिश्नर सभागार में हुई बीडीए की बोर्ड मीटिंग में टीपी नगर के लेआउट से आरटीओ कार्यालय खोलने का प्रस्ताव निरस्त हो चुका है। उसके स्थान पर छोटे-छोटे प्लॉट बनाकर विक्रय की येाजना बनाई गई थी ताकि टीपी नगर पहुंचने वाले वाहनों की रिपेयरिंग, सर्विसिंग आदि काम कराए जा सकें। ट्रांसपोर्टर ने इस फैसले का स्वागत किया लेकिन आरटीओ कार्यालय हटाने पर एतराज भी जताया था।
1990 में बना था प्रस्ताव
एआरटीओ आरपी सिंह ने बताया कि टीपी नगर बसाने की मुहिम शुरू होने के बाद 1990-91 में आरटीओ कार्यालय खोलने का प्रस्ताव रखा गया था। टीपी नगर के लेआउट में करीब पांच एकड़ तक जमीन का निर्धारण हुआ था लेकिन कार्यालय बनाने के लिए जब बीडीए से निशुल्क जमीन मांगी गई तो उन्होंने जमीन खरीदने की बात कही जिसे लेकर शासन और प्रशासन स्तर से काफी पत्राचार हुआ लेकिन जमीन नहीं मिल सकी। प्रस्ताव अधर में अटक गया। लंबे समय बाद 2015 में फिर कवायद शुरू हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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वाहनों की जांच के लिए मिले जमीन
आरटीओ अनिल गुप्ता ने कहा कि कार्यालय बनाने के लिए अगर निशुल्क जमीन मुहैया कराने में बीडीए असमर्थ हो तो वह वाहनों की जांच और प्रमाणीकरण करने के लिए कुछ भूमि उपलब्ध करा सकता है। इससे ट्रांसपोर्टरों समेत आरटीओ को काफी राहत मिलेगी। बताया कि इन कार्यालयों के बनने से ट्रांसपोर्टरोें को भी फायदा होगा और संभावना है कि भारी वाहन टीपी नगर जाने से शहर में जाम की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिलेगी।
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आरटीओ अधिकारियोें के अनुसार ट्रांसपोर्ट नगर बसाने में ट्रांसपोर्टर अड़ंगा बने हुए हैं। वे सुविधाओं की कमी का हवाला देकर प्रशासन और बीडीए की तमाम कोशिशों के बाद भी टीपी नगर में शिफ्ट होने को तैयार नहीं हैं। ट्रांसपोर्टर जो समस्याएं गिना रहे हैं, उनमें एक टीपी नगर से आरटीओ कार्यालय की लंबी दूरी भी है। ऐसे में अगर आरटीओ कार्यालय बना तो वहां ट्रांसपोर्टर भी शिफ्ट हो सकते हैं। बता दें कि 2017 में कमिश्नर सभागार में हुई बीडीए की बोर्ड मीटिंग में टीपी नगर के लेआउट से आरटीओ कार्यालय खोलने का प्रस्ताव निरस्त हो चुका है। उसके स्थान पर छोटे-छोटे प्लॉट बनाकर विक्रय की येाजना बनाई गई थी ताकि टीपी नगर पहुंचने वाले वाहनों की रिपेयरिंग, सर्विसिंग आदि काम कराए जा सकें। ट्रांसपोर्टर ने इस फैसले का स्वागत किया लेकिन आरटीओ कार्यालय हटाने पर एतराज भी जताया था।
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1990 में बना था प्रस्ताव
एआरटीओ आरपी सिंह ने बताया कि टीपी नगर बसाने की मुहिम शुरू होने के बाद 1990-91 में आरटीओ कार्यालय खोलने का प्रस्ताव रखा गया था। टीपी नगर के लेआउट में करीब पांच एकड़ तक जमीन का निर्धारण हुआ था लेकिन कार्यालय बनाने के लिए जब बीडीए से निशुल्क जमीन मांगी गई तो उन्होंने जमीन खरीदने की बात कही जिसे लेकर शासन और प्रशासन स्तर से काफी पत्राचार हुआ लेकिन जमीन नहीं मिल सकी। प्रस्ताव अधर में अटक गया। लंबे समय बाद 2015 में फिर कवायद शुरू हुई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
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वाहनों की जांच के लिए मिले जमीन
आरटीओ अनिल गुप्ता ने कहा कि कार्यालय बनाने के लिए अगर निशुल्क जमीन मुहैया कराने में बीडीए असमर्थ हो तो वह वाहनों की जांच और प्रमाणीकरण करने के लिए कुछ भूमि उपलब्ध करा सकता है। इससे ट्रांसपोर्टरों समेत आरटीओ को काफी राहत मिलेगी। बताया कि इन कार्यालयों के बनने से ट्रांसपोर्टरोें को भी फायदा होगा और संभावना है कि भारी वाहन टीपी नगर जाने से शहर में जाम की समस्या से भी काफी हद तक निजात मिलेगी।