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एनपीए: घाटे की भरपाई ग्राहकों की जेब से

Fri, 08 Mar 2019 01:49 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Fri, 08 Mar 2019 01:49 AM IST
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एनपीए: घाटे की भरपाई ग्राहकों की जेब से
बरेली। एनपीए खातों से हुए घाटे की भरपाई बैंक ग्राहकों की जेब काटकर कर रहे हैं। कुछ समय से छोटी-मोटी सुविधाओं तक के लिए ग्राहकों से पैसा वसूल किया जा रहा है और उन्हें इसकी भनक तक नहीं है। हद तो यह है कि एटीएम अगर ‘नो कैश’ का मेसेज दे रहा है या फिर ‘ट्रांजेक्शन फेल’ हो रहा है, तब भी इसका खामियाजा ग्राहकों को भुगतना पड़ रहा है। छोटी-छोटी कटौती कर लगातार चूना लगने की ग्राहकों को पहले तो खबर ही नहीं लगती, अगर कोई ग्राहक शिकायत करता भी है तो बैंक उन्हें कोई जवाब देने को तैयार नहीं होते। हालांकि यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन ने इस कटौती को अवैध बताते हुए इसका विरोध शुरू कर दिया है।
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बैंकों में एनपीए खातों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे उनका आर्थिक ढांचा चरमरा रहा है। इसकी भरपाई करने के लिए बैंक तमाम सुविधाओं के नाम पर अनापशनाप शुल्क लगा रहे हैं। आमतौर पर कैश निकालने और जमा करने, डेबिट कार्ड पर इंश्योरेंस फीस और वार्षिक शुल्क, बैलेंस इनक्वायरी और मिनी स्टेटमेंट, एकाउंट बंद करने, खाते में पर्याप्त रकम न होने, डेबिट कार्ड से ट्रांजक्शन फेल होने, एसएमएस अलर्ट, चेंज इन मोबाइल नंबर, केवाईसी से संबंधित कोई बदलाव, सीडीएम के जरिये कैश जमा करने, चेक बुक जारी करने सहित दूसरी कई सुविधाओं पर भी बैंक शुल्क की वसूली कर रही हैं। ग्राहकों की शिकायत यह है कि इसमें ज्यादातर कटौती के बारे में उन्हें बैंक की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी जाती है। बैंक से ही जुड़े लोग नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि बैंकों में रोजाना ही इस अवैध कटौती के खिलाफ तमाम शिकायतें आती हैं लेकिन ग्राहकों को ऊटपटांग जवाब देकर चलता कर दिया जाता है।
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यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन लगातार इस तरह के चार्ज ग्राहकों पर लगाने का विरोध करती आई है। ऐसा करने के बजाय एनपीए खातों की वसूली के लिए कड़े कानून बनाए जाने चाहिए। -संजीव मेहरोत्रा, सहायक महामंत्री यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन
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यह बैंकों की अपनी नीति पर है कि वह किन सेवाओं पर शुल्क लेंगी। बैंक प्रबंधन की कोशिश है कि ग्राहक के हितों का भी ध्यान रखा जाए। - ओपी बढे़रा, लीड बैंक मैनेजर
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