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मैनेजमेंट को स्टे मिला तो बोर्ड के जरिये घेरने की कोशिश
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बरेली। बरेली कॉलेज मैनेजमेंट विवाद के बीच कॉलेज में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। कॉलेज राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है। मैनेजमेंट और बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन चुनाव कराने के बजाए राजनीतिक चालें चली जा रही हैं। विश्वविद्यालय ने मैनेजमेंट भंग किया, बोर्ड के 14 सदस्य अवैध घोषित किए। मैनेजमेंट ने कोर्ट से स्टे ले लिया तो अब सोसाइटी रजिस्ट्रार ने बोर्ड पदाधिकारियों के अधिकार सीज कर खातों पर रोक लगा दी। इस पूरे मामले को बोर्ड के सदस्य सोची समझी कार्रवाई मान रहे हैं। दबी जुबान उनका कहना है कि मैनेजमेंट को कोर्ट से स्टे मिला इसलिए बोर्ड को जरिये उन्हें घेरने की कोशिश हुई है। हालांकि खुलकर कोई भी बोलने को तैयार नहीं।
कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रशासनिक अफसर कॉलेज में सीधे हाथ डालना नहीं चाहते। चर्चा है कि इसलिए ही सोसाइटी रजिस्ट्रार ने दो साल बाद अचानक बोर्ड पदाधिकारियों के अधिकार सीज कर दिए। अब कोर्ट की अगली सुनवाई में विश्वविद्यालय और प्रशासन उतनी ही मजबूती से अपना जवाब रख सकेगा। सवाल उठना लाजमी है कि जब दो साल से चुनाव लंबित है तो बोर्ड के सदस्य उससे कतरा क्यों रहे हैं? वहीं, सोसाइटी रजिस्ट्रार के आदेश के बाद बोर्ड के खातों से लेनदेन पर शुक्रवार से रोक लग गई। कमिश्नर ने स्पष्ट कह दिया कि अब कोर्ट का फैसला आने तक कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही कोई कदम आगे बढ़ाया जाएगा।
-रणवीर प्रसाद, कमिश्नर
अब मुझे कुछ नहीं कहना, मामला कोर्ट में चल रहा है। जैसा आदेश होगा वैसा किया जाएगा। बाकी प्रशासनिक अफसर, जो उनके मन में आए करें।
-डॉ. रजनी अग्रवाल,- कालातीत सचिव, बोर्ड ऑफ कंट्रोल बरेली कॉलेज
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कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद प्रशासनिक अफसर कॉलेज में सीधे हाथ डालना नहीं चाहते। चर्चा है कि इसलिए ही सोसाइटी रजिस्ट्रार ने दो साल बाद अचानक बोर्ड पदाधिकारियों के अधिकार सीज कर दिए। अब कोर्ट की अगली सुनवाई में विश्वविद्यालय और प्रशासन उतनी ही मजबूती से अपना जवाब रख सकेगा। सवाल उठना लाजमी है कि जब दो साल से चुनाव लंबित है तो बोर्ड के सदस्य उससे कतरा क्यों रहे हैं? वहीं, सोसाइटी रजिस्ट्रार के आदेश के बाद बोर्ड के खातों से लेनदेन पर शुक्रवार से रोक लग गई। कमिश्नर ने स्पष्ट कह दिया कि अब कोर्ट का फैसला आने तक कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
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हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही कोई कदम आगे बढ़ाया जाएगा।
-रणवीर प्रसाद, कमिश्नर
अब मुझे कुछ नहीं कहना, मामला कोर्ट में चल रहा है। जैसा आदेश होगा वैसा किया जाएगा। बाकी प्रशासनिक अफसर, जो उनके मन में आए करें।
-डॉ. रजनी अग्रवाल,- कालातीत सचिव, बोर्ड ऑफ कंट्रोल बरेली कॉलेज