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बैंक कर्मियों ने विलय के खिलाफ जताया विरोध
Thu, 27 Dec 2018 01:43 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 27 Dec 2018 01:43 AM IST
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बरेली। दो बैंकों का बड़ौदा बैंक में प्रस्तावित विलय और वेतन समझौता लागू नहीं होने से नाराज बैंक कर्मचारी संगठनों ने कामकाज ठप रखा। सरकारी बैंक नहीं खुलने से करीब 250 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित रहा। दूर दराज गांवों से आए उपभोक्ताओं को हड़ताल का पता नहीं था, ऐसे में उन्हें परेशान होकर लौटना पड़ा। हालांकि निजी बैंकों में सामान्य तरीके से कामकाज हुआ।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंक कर्मी बुधवार सुबह दस बजे से बैंक ऑफ बड़ौदा जोन कार्यालय परिसर में एकत्र होने लगे। सभी शाखा और संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भी पहुंचे। वक्ताओं ने विलय और प्रबंधन की वादाखिलाफी पर बरसना शुरू किया। उन्होंने विलय को जनविरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार निजीकरण की ओर बैंकिंग सेवा ले जाना चाहती है। संचालक संयुक्त मोर्चा के संयोजक दिनेश सक्सेना ने कहा के सरकार पूंजीपतियों की कठपुतली बन गई है और उनके हित साधने में लग गई है। ट्रेड यूनियन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि बैंकों के विलय से सरकार आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की शर्तों को पूरा करने को बैंकों को कर्मचारी यूनियन विहीन कर देना चाहती है। ओपी वढे़रा ने कहा कि बड़े पूंजीपति देश छोड़ कर भाग रहे हैं और सरकार नहीं रोक पा रही है। अरविंद रस्तोगी, रवि आनंद, संदीप अग्रवाल, पंकज शर्मा, मलिक सिंह कालरा आदि ने संबोधित किया।
नहीं खुले ताले, करोड़ों का लेनदेन ठप
एक दिवसीय हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं अस्तव्यस्त रहीं। सुबह से ही किसी भी सरकारी बैंक शाखा का ताला नहीं खुला था। तमाम गैर जानकार लोग पहुंच गए थे। जब बैंक पर ताला लगा देखा तो वे मायूस होकर लौट गए। कर्मचारी यूनियनों ने दावा किया है कि करीब 250 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। जबकि कारोबारियों का कहना है कि सरकारी बैंकों से हर दिन बड़े स्तर पर लेनदेन होता है। इसमें चेक, कैश और अन्य कारोबारियों गतिविधियां भी शामिल हैं, इसलिए करीब 500 करोड़ रुपये का कामकाज प्रभावित हुआ है। उधर, कई एटीएम में ‘नो कैश’ जैसी स्थिति हो गयी।
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पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर बैंक कर्मी बुधवार सुबह दस बजे से बैंक ऑफ बड़ौदा जोन कार्यालय परिसर में एकत्र होने लगे। सभी शाखा और संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी भी पहुंचे। वक्ताओं ने विलय और प्रबंधन की वादाखिलाफी पर बरसना शुरू किया। उन्होंने विलय को जनविरोधी करार देते हुए कहा कि सरकार निजीकरण की ओर बैंकिंग सेवा ले जाना चाहती है। संचालक संयुक्त मोर्चा के संयोजक दिनेश सक्सेना ने कहा के सरकार पूंजीपतियों की कठपुतली बन गई है और उनके हित साधने में लग गई है। ट्रेड यूनियन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि बैंकों के विलय से सरकार आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की शर्तों को पूरा करने को बैंकों को कर्मचारी यूनियन विहीन कर देना चाहती है। ओपी वढे़रा ने कहा कि बड़े पूंजीपति देश छोड़ कर भाग रहे हैं और सरकार नहीं रोक पा रही है। अरविंद रस्तोगी, रवि आनंद, संदीप अग्रवाल, पंकज शर्मा, मलिक सिंह कालरा आदि ने संबोधित किया।
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नहीं खुले ताले, करोड़ों का लेनदेन ठप
एक दिवसीय हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं अस्तव्यस्त रहीं। सुबह से ही किसी भी सरकारी बैंक शाखा का ताला नहीं खुला था। तमाम गैर जानकार लोग पहुंच गए थे। जब बैंक पर ताला लगा देखा तो वे मायूस होकर लौट गए। कर्मचारी यूनियनों ने दावा किया है कि करीब 250 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ है। जबकि कारोबारियों का कहना है कि सरकारी बैंकों से हर दिन बड़े स्तर पर लेनदेन होता है। इसमें चेक, कैश और अन्य कारोबारियों गतिविधियां भी शामिल हैं, इसलिए करीब 500 करोड़ रुपये का कामकाज प्रभावित हुआ है। उधर, कई एटीएम में ‘नो कैश’ जैसी स्थिति हो गयी।
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