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कैंट में अवैध रूप से रहने वाले मतदाता सूची से होंगे बाहर
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बरेली। कैंटोनमेंट की मतदाता सूची में शामिल अवैध रूप से रहने वाले लोगों को सूची से हटाने की कवायद जल्द शुरू होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक शुरू होने जा रहे वार्षिक मतदाता पुनरीक्षण अभियान के तहत यह किया जाना है। इसके लिए मुख्यालय से आदेश जारी होने के साथ ही अधिकारियों ने अवैध रूप से बसे लोगों की गुपचुप पहचान की प्रक्रिया शुरू करा दी है।
कैंट एक्ट के अनुसार छावनी क्षेत्र में छह माह से ज्यादा समय से रह रहे लोगों को मतदाता सूची में शामिल कर उन्हें मताधिकार प्रदान करने का प्रावधान है, जिसकी वजह से कैंट क्षेत्र की मतदाता सूची में कई ऐसे लोग भी शामिल हो गए हैं, जो कैंट के मूल निवासी ही नहीं है। कैंट बोर्ड में न तो इनकी कोई संपत्ति दर्ज है और न ही ये लोग टैक्स ही अदा करते हैं। बावजूद इसके कैंट एक्ट के प्रावधान के तहत इन्हें मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया।
सूत्रों की मानें तो दूरदराज के इलाकों से आकर अवैध तरीके से कैंट में बसे ऐसे लोगों की वास्तविकता पता नहीं चलती। मजदूरी करके गुजर बसर करते हैं और फिर झुग्गी, झोपड़ी बनाकर यहां रहने लगते हैं। फिर नियमों की आड़ में यहां के मतदाता बन जाते हैं, जिन्हें अब बाहर करने के लिए सघन सर्वे शुरू होगा। कार्यालय सहायक पारसनाथ के मुताबिक पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू होने वाला है। गाइड लाइंस के अनुसार मतदाता सूची तैयार की जाएगी।
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सुरक्षा मेें लगा सकते हैं ‘सेंध’
बताते हैं कि मतदाता सूची में शामिल ‘अवैध निवासी’ सैन्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। पिछले वर्ष भी इन निवासियों की पहचान के लिए मुहिम शुरू हुई थी, जिसमें कुछ हद तक कामयाबी भी मिली थी, लेकिन पूरी तरह से खोजबीन पूरी नहीं हो सकी थी। इसलिए अबकी बार मुस्तैदी के साथ चिह्नित करने के आदेश हैं। सूत्रों के अनुसार पिछले वर्षों में कैंट बोर्ड का सदस्य बनने के लिए तथाकथित नेताओं ने वोट की मंशा से ऐसे लोगों का भी नाम मतदाता सूची में शामिल करवाया है। जिनकी अनुमानित संख्या करीब छह सौ से अधिक पहुंच रही है।
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कैंट एक्ट के अनुसार छावनी क्षेत्र में छह माह से ज्यादा समय से रह रहे लोगों को मतदाता सूची में शामिल कर उन्हें मताधिकार प्रदान करने का प्रावधान है, जिसकी वजह से कैंट क्षेत्र की मतदाता सूची में कई ऐसे लोग भी शामिल हो गए हैं, जो कैंट के मूल निवासी ही नहीं है। कैंट बोर्ड में न तो इनकी कोई संपत्ति दर्ज है और न ही ये लोग टैक्स ही अदा करते हैं। बावजूद इसके कैंट एक्ट के प्रावधान के तहत इन्हें मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया।
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सूत्रों की मानें तो दूरदराज के इलाकों से आकर अवैध तरीके से कैंट में बसे ऐसे लोगों की वास्तविकता पता नहीं चलती। मजदूरी करके गुजर बसर करते हैं और फिर झुग्गी, झोपड़ी बनाकर यहां रहने लगते हैं। फिर नियमों की आड़ में यहां के मतदाता बन जाते हैं, जिन्हें अब बाहर करने के लिए सघन सर्वे शुरू होगा। कार्यालय सहायक पारसनाथ के मुताबिक पुनरीक्षण कार्यक्रम शुरू होने वाला है। गाइड लाइंस के अनुसार मतदाता सूची तैयार की जाएगी।
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सुरक्षा मेें लगा सकते हैं ‘सेंध’
बताते हैं कि मतदाता सूची में शामिल ‘अवैध निवासी’ सैन्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। पिछले वर्ष भी इन निवासियों की पहचान के लिए मुहिम शुरू हुई थी, जिसमें कुछ हद तक कामयाबी भी मिली थी, लेकिन पूरी तरह से खोजबीन पूरी नहीं हो सकी थी। इसलिए अबकी बार मुस्तैदी के साथ चिह्नित करने के आदेश हैं। सूत्रों के अनुसार पिछले वर्षों में कैंट बोर्ड का सदस्य बनने के लिए तथाकथित नेताओं ने वोट की मंशा से ऐसे लोगों का भी नाम मतदाता सूची में शामिल करवाया है। जिनकी अनुमानित संख्या करीब छह सौ से अधिक पहुंच रही है।