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अदालत सुनवाई करती रही, पुलिस ने सबूत नष्ट कर डाले
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बरेली। पुलिस और गोवंशीय पशुओं के तस्करों की दोस्ती 15 दिन के ही अंदर अदालत में एक बार फिर जाहिर हो गई। इसी दोस्ती की वजह से भारी मात्रा में गोवंशीय पशुओं को काटे जाने की सूचना पर छापा मारने पहुंची पुलिस टीम पर गोलियां चलाने के 14 आरोपी अदालत से बरी हो गए। दरअसल जिस विवेचक पर अदालत में उनके खिलाफ पुख्ता सबूत पेश करने की जिम्मेदारी थी, उसने इसके बजाय मौके पर बरामद हुई गायों की खालों जैसा अहम सबूत ही नष्ट कर दिया। वह भी अदालत और अपने उच्चाधिकारियों से अनुमति लिए बगैर। अदालत ने इस मामले में विवेचक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
नवाबगंज के गांव टांडा सादात में आठ अगस्त 2014 को बड़े पैमाने पर गोवंशीय पशुओं का वध किए जाने की सूचना पुलिस को मिली थी जिसके बाद इंस्पेक्टर नवाबगंज सुनील कुमार पचौरी ने पुलिस टीम के साथ गांव में छापा मारा था। पुलिस गांव पहुंची तो पशु तस्कर पशुओं का वध करने के बाद उनकी खालों की सफाई करने में जुटे हुए थे। पुलिस को देखते ही उन्होंने उस पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। दोनों ओर से गोलियां चलने के बाद पुलिस ने कई पशु तस्करों को गिरफ्तार कर लिया था और मौके से 16 खालें भी बरामद कीं। गोवंशीय पशुओं के वध और पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किए जाने के आरोप में रूप सिंह की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
मुकदमे की सुनवाई हुई तो मौके से बरामद खालें अदालत में पेश नहीं की जा सकीं। अदालत को बताया गया कि खालें नष्ट की जा चुकी हैं। अदालत ने जवाबतलब किया तो पुलिस यह नहीं बता सकी कि ऐसा किसके आदेश पर किया गया। अदालत ने इसके बाद पकड़े गए आरोपी शानू, मोसिब, लईक, कुन्ना, बाबू, रियासत, शफीक अहमद, गुडडे उर्फ इमरान ,अलीम , सुक्खा, इमरान उर्फ इरफान, सेबू , मुस्तकीम और हसीब को उन पर लगे आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने तत्कालीन एसएचओ नवाबगंज सुनील कुमार पचौरी और चिक लेखक रूप सिंह के खिलाफ विधिक कर्तव्यों में लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
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बाइक की बरामदगी न दिखाने पर
भी फंसी थी हाफिजगंज पुलिस
हाल ही में एक और मामले में पशु तस्कर की मदद करने पर पुलिस अदालत में बेनकाब हुई थी। दरअसल हाफिजगंज इलाके में पकड़े गए एक पशु तस्कर की पुलिस ने बाइक भी बरामद की थी। मीडिया को भी इसकी जानकारी दी गई लेकिन जब अदालत में आरोपी को पेश किया तो फर्द में बाइक की बरामदगी नहीं दिखाई गई थी। अदालत ने इसका संज्ञान लेते हुए विवेचक का जवाब तलब कर लिया था। हालांकि पुलिस अफसरों ने इसके बावजूद इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
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नवाबगंज के गांव टांडा सादात में आठ अगस्त 2014 को बड़े पैमाने पर गोवंशीय पशुओं का वध किए जाने की सूचना पुलिस को मिली थी जिसके बाद इंस्पेक्टर नवाबगंज सुनील कुमार पचौरी ने पुलिस टीम के साथ गांव में छापा मारा था। पुलिस गांव पहुंची तो पशु तस्कर पशुओं का वध करने के बाद उनकी खालों की सफाई करने में जुटे हुए थे। पुलिस को देखते ही उन्होंने उस पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। दोनों ओर से गोलियां चलने के बाद पुलिस ने कई पशु तस्करों को गिरफ्तार कर लिया था और मौके से 16 खालें भी बरामद कीं। गोवंशीय पशुओं के वध और पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किए जाने के आरोप में रूप सिंह की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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मुकदमे की सुनवाई हुई तो मौके से बरामद खालें अदालत में पेश नहीं की जा सकीं। अदालत को बताया गया कि खालें नष्ट की जा चुकी हैं। अदालत ने जवाबतलब किया तो पुलिस यह नहीं बता सकी कि ऐसा किसके आदेश पर किया गया। अदालत ने इसके बाद पकड़े गए आरोपी शानू, मोसिब, लईक, कुन्ना, बाबू, रियासत, शफीक अहमद, गुडडे उर्फ इमरान ,अलीम , सुक्खा, इमरान उर्फ इरफान, सेबू , मुस्तकीम और हसीब को उन पर लगे आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने तत्कालीन एसएचओ नवाबगंज सुनील कुमार पचौरी और चिक लेखक रूप सिंह के खिलाफ विधिक कर्तव्यों में लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
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बाइक की बरामदगी न दिखाने पर
भी फंसी थी हाफिजगंज पुलिस
हाल ही में एक और मामले में पशु तस्कर की मदद करने पर पुलिस अदालत में बेनकाब हुई थी। दरअसल हाफिजगंज इलाके में पकड़े गए एक पशु तस्कर की पुलिस ने बाइक भी बरामद की थी। मीडिया को भी इसकी जानकारी दी गई लेकिन जब अदालत में आरोपी को पेश किया तो फर्द में बाइक की बरामदगी नहीं दिखाई गई थी। अदालत ने इसका संज्ञान लेते हुए विवेचक का जवाब तलब कर लिया था। हालांकि पुलिस अफसरों ने इसके बावजूद इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया।