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आत्महत्या को उकसाने पर पति को सात साल कैद
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बरेली। पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने पर अपर सत्र न्यायाधीश सतीश चंद्र द्विवेदी की अदालत ने पति को सात साल कैद की सजा सुनाई है।
घटना की रिपोर्ट सिरौली थाना क्षेत्र के गांव वरसेर निवासी मृतका के पिता मेवाराम ने 21 अप्रैल 2014 को लिखाई थी, जिसमें कहा था कि उनकी बेटी सुनीता की शादी घटना से दस साल पहले गांव संग्रामपुर, थाना सिरौली के ओमकार से हुई थी। पति अक्सर मारपीट करते हुए उसे परेशान करता था। घटना वाले दिन उन्हें फोन से सूचना मिली कि उसकी बेटी को मार दिया गया है। जब वह बेटी की ससुराल पहुंचे तो बाहर से दरवाजे पर ताला लगा था। पुलिस के साथ घर में जाकर देखा तो सुनीता की लाश छत के कुंडे में लटकी मिली। आरोप लगाया कि पति ओमकार और ससुर सेवाराम ने उसे मारकर छत से लटका दिया। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील केएम खान और राजेश्वरी गंगवार ने पक्ष रखा। कोर्ट ने सेवाराम को बरी करते पति ओमकार को दोषी माना। ब्यूरो
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घटना की रिपोर्ट सिरौली थाना क्षेत्र के गांव वरसेर निवासी मृतका के पिता मेवाराम ने 21 अप्रैल 2014 को लिखाई थी, जिसमें कहा था कि उनकी बेटी सुनीता की शादी घटना से दस साल पहले गांव संग्रामपुर, थाना सिरौली के ओमकार से हुई थी। पति अक्सर मारपीट करते हुए उसे परेशान करता था। घटना वाले दिन उन्हें फोन से सूचना मिली कि उसकी बेटी को मार दिया गया है। जब वह बेटी की ससुराल पहुंचे तो बाहर से दरवाजे पर ताला लगा था। पुलिस के साथ घर में जाकर देखा तो सुनीता की लाश छत के कुंडे में लटकी मिली। आरोप लगाया कि पति ओमकार और ससुर सेवाराम ने उसे मारकर छत से लटका दिया। अभियोजन की ओर से सरकारी वकील केएम खान और राजेश्वरी गंगवार ने पक्ष रखा। कोर्ट ने सेवाराम को बरी करते पति ओमकार को दोषी माना। ब्यूरो