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‘हमसे ही जेबें भरते हैं और आज हमें ही बाहर निकाल रहे’
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Wed, 11 Jul 2018 12:16 AM IST
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बैचलर ऑफ एलिमेंट्री एजूकेशन (बीएलएड) की मंगलवार से शुरू ही काउंसलिंग में कॉलेज संचालकों के पहुंचने पर हंगामा हो गया। उनको काउंसलिंग कक्ष से बाहर निकाल दिया गया, जिसके बाद कॉलेज संचालकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों पर कई तरह के आरोप लगाए। कहा, प्रैक्टिकल से लेकर शिक्षकों के अप्रूवल में कॉलेजों से मोटा पैसा वसूला जाता है। आज कॉलेजों को ही बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। गुस्साए कॉलेज संचालकों ने काफी हंगामा किया।
दरअसल, इस बार बीएलएड काउंसलिंग में दस हजार रुपये एडवांस नहीं जमा कराए जा रहे जिस कारण कॉलेजों को नहीं बुलाया गया। इस बार बीएलएड के 36 कॉलेजों में 1800 सीटें भरी जानी हैं। अभ्यर्थियों की संख्या 1200 ही है। कॉलेजों को लग रहा है उनकी सीटें नहीं भर पाएंगी इसलिए कॉलेज काउंसलिंग में पहुंच गए। हालांकि कॉलेज संचालकों का कहना था कि छात्रों को काउंसलिंग की जानकारी नहीं है इसलिए वे आए। पहले उनको गेट पर ही रोक दिया गया। जैसे तैसे वह काउंसलिंग कक्ष में पहुंचे तो उनको वहां से भी बाहर निकाल दिया गया, जिस कारण हंगामा और बढ़ गया। शिक्षकों और कॉलेज संचालकों के बीच काफी नोकझोंक भी हो गई। इसके बाद कॉलेज संचालकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के खिलाफ जहर उगला। कहा, विश्वविद्यालय कॉलेजों में ताला डलवा दे। एडमिशन हो नहीं रहे हैं और कॉलेज चलाने के लिए अधिकारियों की जेबें भरनी पड़ती हैं। आरोप लगाया कि कॉलेजों के पैनल में वही गिने चुने शिक्षक भेजे जाते हैं जिनसे इनकी सेटिंग हैं। सबसे ज्यादा शिक्षक लखनऊ भेजे जाते हैं। पैनल के नाम पर एक लाख रुपये तक वसूले जाते हैं। इससे अच्छा है कि कॉलेज बंद करा दिए जाएं।
कॉलेज संचालकों की बात
हमको कोई सूचना नहीं दी गई इसलिए काउंसलिंग में आए। ग्रामीण इलाके के छात्रों को जानकारी नहीं इसलिए हम लोग आए। काउंसलिंग सेंटर पर हम लोगों के साथ बहुत गलत व्यवहार किया गया। यही शिक्षक प्रैक्टिकल और पैनल में आकर जेबें भरके पैसे लेकर जाते हैं। आज हमको ही बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। अगर हम भी यही व्यवहार करें तो क्या करेंगे।
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-मनीष चौहान, रौशन सिंह कॉलेज, संभल
विश्वविद्यालय ने कॉलेजों को सिर्फ कमाई का जरिया बना रखा है, कॉलेज बंद भी हो जाएं तो इनको फर्क नहीं। स्नातक में एडमिशन इतने हुए कि कॉलेज बंद होने की नौबत आ गई। बायो के प्रैक्टिकल में विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने 75 हजार रुपये मांगे थे। कॉलेज क्या सिर्फ शिक्षकों की जेबें भरने के लिए हैं। हमारे कॉलेज बंद होने की नौबत आ गई है।
-प्रमोद यादव, राज किरन डिग्री कॉलेज मुरादाबाद
बीएलएड की फीस अन्य कॉलेजों में पचास हजार से ज्यादा है। हम 25 हजार ही ले सकते हैं। कॉलेज की मान्यता के लिए पहले अधिकारियों की जेबें भरी, अब सीटें भरने के लाले हैं। फिर कॉलेज खोलने का क्या फायदा। विश्वविद्यालय में हर काम के लिए कॉलेजों से पैसा वसूला जाता है। हमारे साथ ही ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
-सुरेश चौहान, महाराजा पृथ्वीराज चौहान कॉलेज, रामपुर
पहले दिन सिर्फ 129 प्रवेश
बीएलएड की इस बार 36 कॉलेजों में 1800 सीटें हैं। पहले दिन 300 रैंक तक वाले अभ्यर्थियों को बुलाया गया था जिसमें 129 ने ही एडमिशन लिए। यही हाल रहा तो इस बार बीएलएड की पचास फीसदी भी सीटें नहीं भर पाएंगी।
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दरअसल, इस बार बीएलएड काउंसलिंग में दस हजार रुपये एडवांस नहीं जमा कराए जा रहे जिस कारण कॉलेजों को नहीं बुलाया गया। इस बार बीएलएड के 36 कॉलेजों में 1800 सीटें भरी जानी हैं। अभ्यर्थियों की संख्या 1200 ही है। कॉलेजों को लग रहा है उनकी सीटें नहीं भर पाएंगी इसलिए कॉलेज काउंसलिंग में पहुंच गए। हालांकि कॉलेज संचालकों का कहना था कि छात्रों को काउंसलिंग की जानकारी नहीं है इसलिए वे आए। पहले उनको गेट पर ही रोक दिया गया। जैसे तैसे वह काउंसलिंग कक्ष में पहुंचे तो उनको वहां से भी बाहर निकाल दिया गया, जिस कारण हंगामा और बढ़ गया। शिक्षकों और कॉलेज संचालकों के बीच काफी नोकझोंक भी हो गई। इसके बाद कॉलेज संचालकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और शिक्षकों के खिलाफ जहर उगला। कहा, विश्वविद्यालय कॉलेजों में ताला डलवा दे। एडमिशन हो नहीं रहे हैं और कॉलेज चलाने के लिए अधिकारियों की जेबें भरनी पड़ती हैं। आरोप लगाया कि कॉलेजों के पैनल में वही गिने चुने शिक्षक भेजे जाते हैं जिनसे इनकी सेटिंग हैं। सबसे ज्यादा शिक्षक लखनऊ भेजे जाते हैं। पैनल के नाम पर एक लाख रुपये तक वसूले जाते हैं। इससे अच्छा है कि कॉलेज बंद करा दिए जाएं।
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कॉलेज संचालकों की बात
हमको कोई सूचना नहीं दी गई इसलिए काउंसलिंग में आए। ग्रामीण इलाके के छात्रों को जानकारी नहीं इसलिए हम लोग आए। काउंसलिंग सेंटर पर हम लोगों के साथ बहुत गलत व्यवहार किया गया। यही शिक्षक प्रैक्टिकल और पैनल में आकर जेबें भरके पैसे लेकर जाते हैं। आज हमको ही बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। अगर हम भी यही व्यवहार करें तो क्या करेंगे।
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-मनीष चौहान, रौशन सिंह कॉलेज, संभल
विश्वविद्यालय ने कॉलेजों को सिर्फ कमाई का जरिया बना रखा है, कॉलेज बंद भी हो जाएं तो इनको फर्क नहीं। स्नातक में एडमिशन इतने हुए कि कॉलेज बंद होने की नौबत आ गई। बायो के प्रैक्टिकल में विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने 75 हजार रुपये मांगे थे। कॉलेज क्या सिर्फ शिक्षकों की जेबें भरने के लिए हैं। हमारे कॉलेज बंद होने की नौबत आ गई है।
-प्रमोद यादव, राज किरन डिग्री कॉलेज मुरादाबाद
बीएलएड की फीस अन्य कॉलेजों में पचास हजार से ज्यादा है। हम 25 हजार ही ले सकते हैं। कॉलेज की मान्यता के लिए पहले अधिकारियों की जेबें भरी, अब सीटें भरने के लाले हैं। फिर कॉलेज खोलने का क्या फायदा। विश्वविद्यालय में हर काम के लिए कॉलेजों से पैसा वसूला जाता है। हमारे साथ ही ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
-सुरेश चौहान, महाराजा पृथ्वीराज चौहान कॉलेज, रामपुर
पहले दिन सिर्फ 129 प्रवेश
बीएलएड की इस बार 36 कॉलेजों में 1800 सीटें हैं। पहले दिन 300 रैंक तक वाले अभ्यर्थियों को बुलाया गया था जिसमें 129 ने ही एडमिशन लिए। यही हाल रहा तो इस बार बीएलएड की पचास फीसदी भी सीटें नहीं भर पाएंगी।