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बाजार में कम आए खरीदार तो सज गई चुनाव की चौपाल
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बरेली। मतदान के चलते मंगलवार को शहर से लेकर आसपास के कस्बों में भी बाजार बंद रहे, लेकिन गांव-देहात में लगने वाले स्थायी बाजार फिर भी लगे। रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के लिए लोग यहां पहुंचे तो चुनावी चर्चा के लिए यहां भी चौपाल सज गई। अमर उजाला की टीम जब बल्लिया बाजार में पहुंची तो कुछ ऐसे ही हालात नजर आए।
दातागंज रोड पर देवचरा से कुछ दूरी पर स्थित बल्लिया बाजार मंगलवार को लगी जरूर थी, लेकिन हमेशा की अपेक्षा काफी कम दुकानें लगी थीं। ग्राहक भी कम थे। ऐसे में दुकानदार और ग्राहक चुनावी चर्चा में भी खूब मशगूल रहे। तिरकुनिया से आए नन्हकू यादव ने कहा इस बार तो हाथी और फूल में ही टक्कर होगी। मगर सरकार तो मोदी की ही बननी चाहिए। झिंझरी गांव से आए छेदालाल ने कहा कि मैं तो वोट डाल आया हूं। मुकाबला फूल और हाथी में ही लग रहा है। अन्य लोगों की बातें ध्यान से सुन रहे रामपुर कांकर गांव से सब्जी की दुकान लगाने आए नत्थूलाल ने कहा कि आज तो बाजार में भीड़ भी नहीं है और सब्जी भी कम लाए हैं। बेचने के बाद ही वोट डालने जाएंगे। उनकी बातें सुनकर पास ही पकौड़ी, समोसा बेच रहे नेक शाह मौर्य भी बातचीत में शामिल हो गए। बोले- इस बार तो मुसलमान और यादव भी हाथी पर वोट दे रहे हैं, ऐसे में जीत तो हाथी की ही पक्की है, लेकिन टक्कर कमल के फूल से ही होगी।
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दातागंज रोड पर देवचरा से कुछ दूरी पर स्थित बल्लिया बाजार मंगलवार को लगी जरूर थी, लेकिन हमेशा की अपेक्षा काफी कम दुकानें लगी थीं। ग्राहक भी कम थे। ऐसे में दुकानदार और ग्राहक चुनावी चर्चा में भी खूब मशगूल रहे। तिरकुनिया से आए नन्हकू यादव ने कहा इस बार तो हाथी और फूल में ही टक्कर होगी। मगर सरकार तो मोदी की ही बननी चाहिए। झिंझरी गांव से आए छेदालाल ने कहा कि मैं तो वोट डाल आया हूं। मुकाबला फूल और हाथी में ही लग रहा है। अन्य लोगों की बातें ध्यान से सुन रहे रामपुर कांकर गांव से सब्जी की दुकान लगाने आए नत्थूलाल ने कहा कि आज तो बाजार में भीड़ भी नहीं है और सब्जी भी कम लाए हैं। बेचने के बाद ही वोट डालने जाएंगे। उनकी बातें सुनकर पास ही पकौड़ी, समोसा बेच रहे नेक शाह मौर्य भी बातचीत में शामिल हो गए। बोले- इस बार तो मुसलमान और यादव भी हाथी पर वोट दे रहे हैं, ऐसे में जीत तो हाथी की ही पक्की है, लेकिन टक्कर कमल के फूल से ही होगी।
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