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कुछ दिन मंत्री के बेटे की मौत की याद नहीं दिलाएगा हाईवे का गड्ढा

Fri, 28 Jun 2019 02:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 28 Jun 2019 02:23 AM IST
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कुछ दिन मंत्री के बेटे की मौत की याद नहीं दिलाएगा हाईवे का गड्ढा
बरेली/फरीदपुर। तमाम आम लोगों की जान ले चुका लखनऊ हाईवे बुधवार को उत्तराखंड के मंत्री के बेटे के खून से भी रंग गया तब कहीं गहरी नींद में सोए एनएचएआई अफसरों को हल्का सा झटका तो लगा लेकिन इसका बहुत ज्यादा असर फिर भी नहीं दिखाई दिया। बृहस्पतिवार को एनएचएआई ने मंत्री के बेटे की जान लेने वाले खतरनाक गड्ढे को बजरी और रेतीली मिट्टी से पाटकर इतना भर कर दिया कि आने वाले कुछ दिन तक यह गड्ढा मंत्री के बेटे की कड़वी याद अपने भीतर दफन रखेगा। लेकिन यह भी तय है कि दो-चार दिन में जब बजरी और मिट्टी गड्ढे से उखड़ेगी तो यह गड्ढा फिर और लोगों की जान लेने की कोशिश करेगा। हाईवे के दूसरे गड्ढे भी ऐसा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। बरसात शुरू होने के बाद तो इस हाईवे पर सुरक्षित सफर कर पाना ही मुश्किल होगा।
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बुधवार को उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के बेटे की मौत के बाद गुरुवार को एनएचएआई की टीम ने गौसगंज के पास हादसे की वजह बने खतरनाक गड्ढे को पाट दिया। हालांकि हैवी ट्रैफिक गुजरा तो काफी बजरी और मिट्टी साथ उड़ा ले गया। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि हाईवे को ठीक करने के लिए छह करोड़ का ठेका दिया जा चुका है। फिलहाल सीतापुर की ओर काम शुरू कराया गया है, दो-तीन दिन के अंदर बरेली की ओर भी मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा।
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बता दें कि इरा कंपनी के काम छोड़ने के बाद यह हाईवे दुुर्दशाग्रस्त हो चुका है। फरीदपुर से पहले गौसगंज के पास एक तरफ रोड न बनी होने से वन वे ट्रैफिक है। यहां रूट डायवर्जन के पास ही बड़ा गड्ढा हो गया है। बुधवार को इसी गड्ढे ने मंत्री के बेटे की जान ले ली थी। हालांकि यहां पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन एनएचएआई अफसरों ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। मंत्री के बेटे की मौत के बाद एनएचएआई की टीम मौके पर पहुंची भी लेकिन गड्ढा भरने के नाम पर खानापूरी ही की। लिहाजा हादसे का खतरा कम नहीं हुआ है।
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बारिश में रेत होगा महंगा इसलिए फिलहाल काम नहीं
हाईवे पर बरेली से सीतापुर के बीच इरा कंपनी के छोड़े गए अधूरे काम के लिए करीब 700 करोड़ रुपये की जरूरत है। बताते हैं कि एनएचएआई मुख्यालय के अधिकारी इस काम को शुरू कराने का टेंडर पहले कराना चाहते थे लेकिन यह प्रक्रिया समय से पूरी नहीं हो सकी। सूत्रों की मानें तो अधिकारी अब इस काम को इसलिए कराने से हिचक रहे हैं क्योंकि जुलाई में खनन बंद हो जाएगा। इससे रेत और बजरी के रेट भी बढ़ जाएंगी। इसलिए कोशिश की जा रही है कि मेन प्रोजेक्ट के अधूरे काम को बारिश के बाद ही शुरू कराया जाए।


लखनऊ-सीतापुर के बीच हाईवे की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। इसके लिए एनएचएआई के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। मीटिंग के सिलसिले में बाहर गया था। वापस आ गया हूं। जल्द ही इस पर चर्चा होगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
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