{"_id":"5d0554b88ebc3e0d7b79cde2","slug":"156063044413-bareilly-news88","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुलिस-प्रशासन, अफसरों ने नहीं सुनी तो रिटायर्ड अफसर को लेनी पड़ी कोर्ट की शरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुलिस-प्रशासन, अफसरों ने नहीं सुनी तो रिटायर्ड अफसर को लेनी पड़ी कोर्ट की शरण
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। देश की हवाई सीमाओं की 37 साल तक रक्षा करते हुए तीन युद्ध लड़ने वाला एयरफोर्स का स्क्वाड्रन लीडर भी सिस्टम की मनमानी से हार गया। रिटायर होने के बाद बरेली में बसे यह एयरफोर्स अफसर इज्जतनगर के कंजादासपुर गांव में दो बीघा जमीन खरीदने के चक्कर में दबंग किस्म के भूमाफिया के चक्कर में पड़ गया। उसने एयरफोर्स अफसर से जमीन की कीमत तो वसूल कर ली, लेकिन उस पर कब्जा नहीं दिया। पहले टालमटोल की और फिर दबंगई दिखाते हुए उनसे मारपीट तक की गई। रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर महीनों तक पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के साथ थाने के चक्कर काटते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। राष्ट्रपति को पत्र लिखा फिर भी कोई राहत नहीं मिली। आखिरकार अदालत की शरण लेनी पड़ी। अब अदालत ने भूमाफिया को तीन साल और उसके दो गुर्गों को एक-एक साल कैद की सजा सुनाई है।
योगेंद्र सिंह भसीन एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर थे। उन्होंने वायु सेना के जरिये 37 साल तक देश की सेवा की। इस दौरान तीन युद्ध में हिस्सा लेकर प्रशस्ति पत्र भी हासिल किया। योगेंद्र सिंह जनवरी 94 में स्क्वाड्रन लीडर के पद से रिटायर हुए तो हवाई अडडे के पास ही इज्जतनगर के गांव कंजादास पुर में इकराम खां नाम के शख्स से दो बीघा जमीन खरीदी। बकौल योगेंद्र सिंह 25 मार्च 1998 को उन्होंने इकराम खां को इस जमीन की पूरी कीमत 1.80 लाख रुपये भी इकराम खां को दे दिए। इकराम खां ने उन्हें सीलिंग से जमीन बेचने की परमिशन मिलते ही रजिस्ट्री करा देने का भरोसा दिलाया। मगर इसके बाद इकराम खां ने उनके साथ टालमटोल शुरू कर दी। उन्होंने कुछ समय बाद उस पर दबाव बनाया तो वह रजिस्ट्री कराने से साफ मुकर गया और उन्हें जान से मारने की धमकी तक दे डाली।
रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर के मुताबिक उन्होंने इसकी शिकायत जिला प्रशासन के साथ पुलिस से भी की लेकिन किसी स्तर पर भी कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। 25 जनवरी 1999 को इकराम खां अपने साथ तीन बदमाशों को लेकर जमीन पर पहुंचा। इसी दौरान योगेंद्र सिंह उससे जमीन की रजिस्ट्री कराने की बात कहने पहुंचे तो इकराम के साथ गटटू खां, टुंडा खां, शहवाज खां ने उन पर हमला कर दिया। उनके शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने उन्हें बचाया। इस घटना की भी उन्होंने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने इस बार भी कोई कार्रवाई नहीं की। निराश होकर उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति आरके नारायन को चिट्ठी लिखी मगर फिर भी कोई राहत नहीं मिली। इस बीच इकराम और उसके साथियों ने उनकी जमीन बेचनी शुरू कर दी। इस पर उन्होंने अदालत में इस्तगासा दायर कर दिया।
विज्ञापन
सीजेएम अनिल कुमार सेठ की अदालत ने शनिवार को इस परिवाद में फैसला सुनाते हुए इकराम खां को दोषी करार दिया और उसे तीन साल कैद की सजा सुनाते हुए दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने इसके अलावा गटटू खां और शहबाज खां को भी एक-एक साल कैद की सजा सुनाई। टुंडा खां की मुकदमे के दौरान ही मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
योगेंद्र सिंह भसीन एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर थे। उन्होंने वायु सेना के जरिये 37 साल तक देश की सेवा की। इस दौरान तीन युद्ध में हिस्सा लेकर प्रशस्ति पत्र भी हासिल किया। योगेंद्र सिंह जनवरी 94 में स्क्वाड्रन लीडर के पद से रिटायर हुए तो हवाई अडडे के पास ही इज्जतनगर के गांव कंजादास पुर में इकराम खां नाम के शख्स से दो बीघा जमीन खरीदी। बकौल योगेंद्र सिंह 25 मार्च 1998 को उन्होंने इकराम खां को इस जमीन की पूरी कीमत 1.80 लाख रुपये भी इकराम खां को दे दिए। इकराम खां ने उन्हें सीलिंग से जमीन बेचने की परमिशन मिलते ही रजिस्ट्री करा देने का भरोसा दिलाया। मगर इसके बाद इकराम खां ने उनके साथ टालमटोल शुरू कर दी। उन्होंने कुछ समय बाद उस पर दबाव बनाया तो वह रजिस्ट्री कराने से साफ मुकर गया और उन्हें जान से मारने की धमकी तक दे डाली।
विज्ञापन
रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर के मुताबिक उन्होंने इसकी शिकायत जिला प्रशासन के साथ पुलिस से भी की लेकिन किसी स्तर पर भी कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। 25 जनवरी 1999 को इकराम खां अपने साथ तीन बदमाशों को लेकर जमीन पर पहुंचा। इसी दौरान योगेंद्र सिंह उससे जमीन की रजिस्ट्री कराने की बात कहने पहुंचे तो इकराम के साथ गटटू खां, टुंडा खां, शहवाज खां ने उन पर हमला कर दिया। उनके शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने उन्हें बचाया। इस घटना की भी उन्होंने पुलिस को सूचना दी, लेकिन पुलिस ने इस बार भी कोई कार्रवाई नहीं की। निराश होकर उन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति आरके नारायन को चिट्ठी लिखी मगर फिर भी कोई राहत नहीं मिली। इस बीच इकराम और उसके साथियों ने उनकी जमीन बेचनी शुरू कर दी। इस पर उन्होंने अदालत में इस्तगासा दायर कर दिया।
विज्ञापन
सीजेएम अनिल कुमार सेठ की अदालत ने शनिवार को इस परिवाद में फैसला सुनाते हुए इकराम खां को दोषी करार दिया और उसे तीन साल कैद की सजा सुनाते हुए दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने इसके अलावा गटटू खां और शहबाज खां को भी एक-एक साल कैद की सजा सुनाई। टुंडा खां की मुकदमे के दौरान ही मौत हो चुकी है।