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नगर निगम में क्यों लगाई ‘दोहरी’ निषेधाज्ञा
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बरेली। नगर निगम परिसर में धारा 144 लागू करने को लेकर पेच सामने आ रहा है। नगर निगम में धारा 144 सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने 11 जून को लागू की थी। इस पर हल्ला मचने के बाद खुद डीएम ने यह सवाल उठाया है कि जब ईद से पहले से ही पूरे जिले में धारा 144 लागू थी तो फिर नगर निगम के लिए खास तौर पर अलग से निषेधाज्ञा लगाने की क्या जरूरत थी। डीएम ने सिटी मजिस्ट्रेट से इस बारे में पूछताछ भी की। हालांकि सिटी मजिस्ट्रेट का तर्क है कि नगर निगम में प्रदर्शनकारी काफी उग्र थे और आपत्तिजनक नारेबाजी कर रहे थे। इससे माहौल बिगड़ने के पूरे आसार थे। इसलिए नगर निगम परिसर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए खास तौर पर निषेधाज्ञा लागू करने का निर्णय लिया था।
इंदिरा मार्केट में अवैध तौर से पोर्टेबल शॉप रखने के प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की जांच पर नगर आयुक्त सैमुअल पाल एन. ने पार्षद विनोद सैनी सहित दो लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया था। इस कार्रवाई के बाद से पार्षदों में उबाल था। 11 जून को नगर निगम में पहुंचकर पार्षदों ने हंगामा करते हुए नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की थी। इसके बाद शाम को सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने नगर निगम और उसकी दो सौ मीटर की परिधि में धारा-144 लागू कर दी, जबकि डीएम के आदेश पर ईद से पहले ही जिले में निषेधाज्ञा लागू है।
डीएम का कहना है कि जब जिले में पहले से ही यह धारा लागू है तो अकेले नगर निगम में ही इस धारा को अलग से लगाने का क्या औचित्य था। इस बात से खुद डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह हैरत में हैं। बताते हैं कि इसे लेकर उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट से स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा है। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट ने साफ कहा है कि अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए सरकारी कामकाज में बाधा होने से रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर निगम में अलग से निषेधाज्ञा लागू की है।
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धरने की परमिशन पर भी गफलत
नगर निगम में पार्षदों के धारा 144 का उल्लंघन करने को लेकर भी अफसर स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार का कहना है कि कुछ दिन पहले पार्षदों ने धरने के लिए प्रार्थनापत्र जरूर दिया था। इसकी जांच पुलिस को भेजी थी। प्रदर्शन के लिए कोई परमिशन नहीं दी गई है जबकि डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने पार्षदों को धरने के लिए मौखिक अनुमति दी थी।
धारा 144 को सिर्फ नगर निगम में लागू करने का औचित्य नहीं था। जिलेभर में निषेधाज्ञा पहले से ही लागू है। सिटी मजिस्ट्रेट से इस बारे में पूछा गया है। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
11 जून को नगर निगम में प्रदर्शन के बाद मैंने महसूस किया कि यहां हालात खराब हो सकते हैं। इसलिए इस धारा-144 लागू की थी। इसमें सामान्य दिशा-निर्देश ही थे। -संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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इंदिरा मार्केट में अवैध तौर से पोर्टेबल शॉप रखने के प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार की जांच पर नगर आयुक्त सैमुअल पाल एन. ने पार्षद विनोद सैनी सहित दो लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया था। इस कार्रवाई के बाद से पार्षदों में उबाल था। 11 जून को नगर निगम में पहुंचकर पार्षदों ने हंगामा करते हुए नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की थी। इसके बाद शाम को सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने नगर निगम और उसकी दो सौ मीटर की परिधि में धारा-144 लागू कर दी, जबकि डीएम के आदेश पर ईद से पहले ही जिले में निषेधाज्ञा लागू है।
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डीएम का कहना है कि जब जिले में पहले से ही यह धारा लागू है तो अकेले नगर निगम में ही इस धारा को अलग से लगाने का क्या औचित्य था। इस बात से खुद डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह हैरत में हैं। बताते हैं कि इसे लेकर उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट से स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा है। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट ने साफ कहा है कि अपने विवेक का इस्तेमाल करते हुए सरकारी कामकाज में बाधा होने से रोकने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए नगर निगम में अलग से निषेधाज्ञा लागू की है।
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धरने की परमिशन पर भी गफलत
नगर निगम में पार्षदों के धारा 144 का उल्लंघन करने को लेकर भी अफसर स्थिति स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार का कहना है कि कुछ दिन पहले पार्षदों ने धरने के लिए प्रार्थनापत्र जरूर दिया था। इसकी जांच पुलिस को भेजी थी। प्रदर्शन के लिए कोई परमिशन नहीं दी गई है जबकि डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने पार्षदों को धरने के लिए मौखिक अनुमति दी थी।
धारा 144 को सिर्फ नगर निगम में लागू करने का औचित्य नहीं था। जिलेभर में निषेधाज्ञा पहले से ही लागू है। सिटी मजिस्ट्रेट से इस बारे में पूछा गया है। -वीरेंद्र कुमार सिंह, जिलाधिकारी
11 जून को नगर निगम में प्रदर्शन के बाद मैंने महसूस किया कि यहां हालात खराब हो सकते हैं। इसलिए इस धारा-144 लागू की थी। इसमें सामान्य दिशा-निर्देश ही थे। -संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट