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देवी-देवताओं को कार्टून बनाने वाले सीरियल का बहिष्कार हो
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बरेली। ‘बाल हनुमान, श्री कृष्णा और बाल गणेश जैसे कार्टून कैरेक्टर हिंदू धर्म का मखौल बना रहे हैं। बच्चों के मनोरंजन के लिए ईश्वर को ‘खिलौना’ बना दिया गया है। ऐसे सीरियल की वजह से बच्चे धर्म से जुड़ने के बजाय दूर हो रहे हैं, इसलिए ऐसे सीरियल का बहिष्कार किया जाना चाहिए।’ वृंदावन से आए बाबा चित्र विचित्र ने रविवार को रामायण मंदिर में आयोजित प्रेसवार्ता में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि टीवी पर प्रसारित हो रहे राधा कृष्णा सीरियल में एक भी प्रसंग वेद पुराणों या ग्रंथों के अनुसार नहीं है। दर्शकों का मनोरंजन करने और टीआरपी के लिए मनमाने तरीके से ईश्वर की छवि को पेश किया जा रहा है जो बेहद निंदनीय है। ऐसे सीरियल का बहिष्कार न करने की वजह से ही एक के बाद एक नए-नए सीरियल आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही बेढंगेपन से ईश्वर की गलत छवि प्रस्तुत की जाती रहेगी तो हिंदू संस्कार और संस्कृति का लोप होना तय है। धार्मिक स्थलों पर बढ़ रही युवाओं की तादाद पर कहा कि युवा धर्म स्थलों को पर्यटन स्थल मानकर जा रहे हैं। युवाओं को धर्म स्थलों की महत्ता और धाम की मर्यादा को बरकार रखने का सुझाव दिया। यह भी कहा कि शादी, बर्थडे, तिलकोत्सव जैसे आयोजनों के आमंत्रण पत्रों पर भगवान की तस्वीर नहीं छपवानी चाहिए क्योंकि इससे भगवान का अनादर होता है। अलीगढ़ में मासूम के साथ हुई दरिंदगी और निर्मम हत्या की घटना को सांप्रदायिक रूप दिए जाने को गलत बताते हुए कहा कि अपराधी का कोई धर्म नहीं होता।
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उन्होंने कहा कि टीवी पर प्रसारित हो रहे राधा कृष्णा सीरियल में एक भी प्रसंग वेद पुराणों या ग्रंथों के अनुसार नहीं है। दर्शकों का मनोरंजन करने और टीआरपी के लिए मनमाने तरीके से ईश्वर की छवि को पेश किया जा रहा है जो बेहद निंदनीय है। ऐसे सीरियल का बहिष्कार न करने की वजह से ही एक के बाद एक नए-नए सीरियल आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही बेढंगेपन से ईश्वर की गलत छवि प्रस्तुत की जाती रहेगी तो हिंदू संस्कार और संस्कृति का लोप होना तय है। धार्मिक स्थलों पर बढ़ रही युवाओं की तादाद पर कहा कि युवा धर्म स्थलों को पर्यटन स्थल मानकर जा रहे हैं। युवाओं को धर्म स्थलों की महत्ता और धाम की मर्यादा को बरकार रखने का सुझाव दिया। यह भी कहा कि शादी, बर्थडे, तिलकोत्सव जैसे आयोजनों के आमंत्रण पत्रों पर भगवान की तस्वीर नहीं छपवानी चाहिए क्योंकि इससे भगवान का अनादर होता है। अलीगढ़ में मासूम के साथ हुई दरिंदगी और निर्मम हत्या की घटना को सांप्रदायिक रूप दिए जाने को गलत बताते हुए कहा कि अपराधी का कोई धर्म नहीं होता।
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