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बंद वार्ड की शोभा बढ़ा रहे बेड, मरीज हो रहे परेशान
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बरेली। जिला अस्पताल में मलेरिया और डायरिया के रोगियों की बढ़ती संख्या के चलते उपचार के इंतजाम कम पड़ने लगे हैं। काफी प्रयास के बाद जिला अस्पताल में 19 बेड का एक वार्ड तो मिला, लेकिन यह भी नाकाफी साबित हो रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस का कहना है कि पिछले साल मलेरिया के बढ़े रोगियों की संख्या को देखते हुए खाली पड़े 100 बेड वाले पांच वार्ड लिए गए थे। मगर इस बार उन वार्डों को देने में जिला महिला अस्पताल की सीएमएस टालमटोल कर रही हैं।
मलेरिया के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को दवा, स्लाइड आदि की सुविधा तो दी जाती है, लेकिन मरीजों को भर्ती करने से कतराते हैं। कई बार तो प्राथमिक उपचार दिए बगैर ही जिला अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। इसी लापरवाही में तीन दिन पहले हाफिजगंज क्षेत्र में एक महिला की सीएचसी पर मौत हो चुकी है। ऐसे में जिला अस्पताल में मलेरिया व डायरिया के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसके चलते डायरिया व मलेरिया/डेंगू के 10-10 बेड वाले वार्ड नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता के मुताबिक जिला महिला अस्पताल में 100 बेड के पांच वार्ड बंद पड़े हैं। पिछली बार इस स्थिति में यह वार्ड जिला अस्पताल ने अपने मरीजों के लिए मांग लिए थे। इस साल भी उन्होंने वार्ड मांगे लेकिन महिला जिला अस्पताल की सीएमएस ने काफी न नुकुर के बाद 19 बेड का सिर्फ एक वार्ड ही दिया है, जो मलेरिया के रोगियों से भर गया है। उन्होंने कहा, यदि महिला अस्पताल में खाली पड़े अन्य वार्ड भी मिल जाएंगे तो सहूलियत हो जाएगी। फिलहाल, जिला अस्पताल के डायरिया वार्ड में पांच बेड बढ़ाकर 15 कर दिए गए हैं।
डॉक्टर वापस लेने की चेतावनी पर मिला एक वार्ड
सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि सीएमओ के माध्यम से उन्होंने पत्र भेज कर जिला महिला अस्पताल के खाली पड़े वार्ड मांगे लेकिन नहीं सुना गया। इसके बाद जब उन्होंने सीएमएओ डॉ. विनीत शुक्ल ने जिला अस्पताल से जिला महिला अस्पताल में अटैच डाक्टर वापस लेने की चेतावनी दी तब एक वार्ड दिया गया।
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यह सही है कि जिला अस्पताल ने जिला महिला अस्पताल के खाली पड़े वार्ड मांगे हैं। पिछले साल पांचों वार्ड खाली थे, इसलिए तत्कालीन सीएमएस ने दे दिए। अब कुछ वार्डों में महिला अस्पताल का कीमती सामान रखा है। एक वार्ड ही खाली था, जो उन्हें दे दिया। यदि और आवश्यकता होगी तो उसका भी इंतजाम किया जाएगा।
डा. अलका शर्मा, सीएमएस महिला जिला अस्पताल
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मलेरिया के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को दवा, स्लाइड आदि की सुविधा तो दी जाती है, लेकिन मरीजों को भर्ती करने से कतराते हैं। कई बार तो प्राथमिक उपचार दिए बगैर ही जिला अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। इसी लापरवाही में तीन दिन पहले हाफिजगंज क्षेत्र में एक महिला की सीएचसी पर मौत हो चुकी है। ऐसे में जिला अस्पताल में मलेरिया व डायरिया के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसके चलते डायरिया व मलेरिया/डेंगू के 10-10 बेड वाले वार्ड नाकाफी साबित हो रहे हैं। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता के मुताबिक जिला महिला अस्पताल में 100 बेड के पांच वार्ड बंद पड़े हैं। पिछली बार इस स्थिति में यह वार्ड जिला अस्पताल ने अपने मरीजों के लिए मांग लिए थे। इस साल भी उन्होंने वार्ड मांगे लेकिन महिला जिला अस्पताल की सीएमएस ने काफी न नुकुर के बाद 19 बेड का सिर्फ एक वार्ड ही दिया है, जो मलेरिया के रोगियों से भर गया है। उन्होंने कहा, यदि महिला अस्पताल में खाली पड़े अन्य वार्ड भी मिल जाएंगे तो सहूलियत हो जाएगी। फिलहाल, जिला अस्पताल के डायरिया वार्ड में पांच बेड बढ़ाकर 15 कर दिए गए हैं।
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डॉक्टर वापस लेने की चेतावनी पर मिला एक वार्ड
सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि सीएमओ के माध्यम से उन्होंने पत्र भेज कर जिला महिला अस्पताल के खाली पड़े वार्ड मांगे लेकिन नहीं सुना गया। इसके बाद जब उन्होंने सीएमएओ डॉ. विनीत शुक्ल ने जिला अस्पताल से जिला महिला अस्पताल में अटैच डाक्टर वापस लेने की चेतावनी दी तब एक वार्ड दिया गया।
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यह सही है कि जिला अस्पताल ने जिला महिला अस्पताल के खाली पड़े वार्ड मांगे हैं। पिछले साल पांचों वार्ड खाली थे, इसलिए तत्कालीन सीएमएस ने दे दिए। अब कुछ वार्डों में महिला अस्पताल का कीमती सामान रखा है। एक वार्ड ही खाली था, जो उन्हें दे दिया। यदि और आवश्यकता होगी तो उसका भी इंतजाम किया जाएगा।
डा. अलका शर्मा, सीएमएस महिला जिला अस्पताल