{"_id":"5cf6e118bdec2207594b2698","slug":"15596833478-bareilly-news74","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिजली विभाग में नई स्थानांतरण नीति लागू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिजली विभाग में नई स्थानांतरण नीति लागू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। पावर कारपोरेशन ने नई स्थानांतरण नीति जारी कर दी है। कई नियम बदलने से अधिकारी और कर्मचारियों में खलबली मची है, क्योंकि नीति में साफ कहा गया है कि दबाव और सिफारिश करने वाले कर्मी पर सख्त कार्रवाई होगी। इस बार लिपिक संवर्ग भी जनपद से बाहर तैनात करने की तैयारी है।
मंगलवार शाम मुख्यालय से नई स्थानांतरण नीति जारी हुई है। इसमें कहा गया है कि कोई कर्मी और अधिकारी पुन: उसी पद पर तैनात नहीं हो पाएंगे। इसके साथ ही तैनाती अवधि में भी बदलाव किया गया है। अवधि में बदलाव होने से नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ में मलाईदार पदों पर काबिज अभियंता बड़ी तादात में इधर-उधर होंगे। इससे खलबली मची हुई है, लेकिन लिपिक संवर्ग का कहना है कि उन्हें जनपद से बाहर नहीं भेजा जा सकता है, क्योंकि कारपोरेशन इसके लिए पहले आदेश करे कि अन्य जनपद अथवा सर्किल में स्थानांतरण होने पर उसकी वरिष्ठता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि अन्य स्थान पर तैनाती होने पर वरिष्ठता क्रम उसकी नियुक्ति से होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। नई नीति में कहा गया है कि जो कर्मी मान्यता प्राप्त संगठनों में दो वर्ष से ज्यादा समय से अध्यक्ष/ सचिव पदों पर हैं, उन्हें भी हटाया जाएगा। दो साल बाद रिटायर होने वालेे कर्मी भी इधर-उधर किए जा सकते हैं।
विज्ञापन
मंगलवार शाम मुख्यालय से नई स्थानांतरण नीति जारी हुई है। इसमें कहा गया है कि कोई कर्मी और अधिकारी पुन: उसी पद पर तैनात नहीं हो पाएंगे। इसके साथ ही तैनाती अवधि में भी बदलाव किया गया है। अवधि में बदलाव होने से नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ में मलाईदार पदों पर काबिज अभियंता बड़ी तादात में इधर-उधर होंगे। इससे खलबली मची हुई है, लेकिन लिपिक संवर्ग का कहना है कि उन्हें जनपद से बाहर नहीं भेजा जा सकता है, क्योंकि कारपोरेशन इसके लिए पहले आदेश करे कि अन्य जनपद अथवा सर्किल में स्थानांतरण होने पर उसकी वरिष्ठता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि अन्य स्थान पर तैनाती होने पर वरिष्ठता क्रम उसकी नियुक्ति से होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। नई नीति में कहा गया है कि जो कर्मी मान्यता प्राप्त संगठनों में दो वर्ष से ज्यादा समय से अध्यक्ष/ सचिव पदों पर हैं, उन्हें भी हटाया जाएगा। दो साल बाद रिटायर होने वालेे कर्मी भी इधर-उधर किए जा सकते हैं।
विज्ञापन