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ग्रहों के शुभ संयोग में वट सावित्री पूजन से अखंड रहेगा सुहाग
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बरेली। अबकी बार सोमवती अमावस्या पर किए जाने वाले वट सावित्री का पूजन सुहागिनों के लिए बेहद शुभ फलदायी होने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 3 जून ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर तीन शुभ योगों का संयोग हो रहा है। उन्होंने शुभ योगों में किए जाने वाले व्रत, पूजन व अन्य अनुष्ठान का कई गुना फल प्राप्त होने की संभावना जताई है।
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक अमावस्या तिथि दो जून को शाम 4.39 बजे से शुरू होकर तीन जून को दिन में 3.31 बजे तक रहेगी। ज्योतिष ग्रंथों में उदयाचल सूर्य का महत्व अधिक होने से तीन जून को वट सावित्री का पूजन और सोमवती अमावस्या मनायी जाएगी। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। बताया कि इस बार वट सावित्री व्रत पर पड़ने वाले चार संयोग सुहािगनों की मुरादें पूरी करेंगे। वट सावित्री पर सोमवती अमावस्या के अलावा पहला सवार्थ सिद्धि योग, दूसरा अमृत सिद्धि और तीसरा त्रिग्रही योग का संयोग बन रहा है। इस दिन शनि जयंती भी मनायी जाएगी। उन्होंने बरगद/पीपल पूजने से शनि, मंगल, राहू के अशुभ प्रभाव दूर होने की बात कही।
वट वृक्ष का है खास महत्व
वट सावित्री का व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। ये व्रत सावित्री द्वारा अपने पति को पुनर्जीवित करने के लिए किया गया था। मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्ना, तने में विष्णु और डालियों/पत्तियों में भगवान शिव का वास होता है। इसलिए वट पूजा से अखंड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है।
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वट सावित्री पूजन विधि
इस दिन सुबह स्नान के बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य, ब्रह्ना जी की मूर्ति और संभव हो तो सत्यवान व सावित्री की मूर्ति रखें। वट वृक्ष के नीचे जाकर ब्रह्मा जी की पूजा के बाद बरगद की जड़ में जल दें। वट वृक्ष पूजन में वट के तने पर कच्चा सूत लपेटें और सात या 108 बार परिक्रमा करें।
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ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 3 जून ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर तीन शुभ योगों का संयोग हो रहा है। उन्होंने शुभ योगों में किए जाने वाले व्रत, पूजन व अन्य अनुष्ठान का कई गुना फल प्राप्त होने की संभावना जताई है।
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक अमावस्या तिथि दो जून को शाम 4.39 बजे से शुरू होकर तीन जून को दिन में 3.31 बजे तक रहेगी। ज्योतिष ग्रंथों में उदयाचल सूर्य का महत्व अधिक होने से तीन जून को वट सावित्री का पूजन और सोमवती अमावस्या मनायी जाएगी। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। बताया कि इस बार वट सावित्री व्रत पर पड़ने वाले चार संयोग सुहािगनों की मुरादें पूरी करेंगे। वट सावित्री पर सोमवती अमावस्या के अलावा पहला सवार्थ सिद्धि योग, दूसरा अमृत सिद्धि और तीसरा त्रिग्रही योग का संयोग बन रहा है। इस दिन शनि जयंती भी मनायी जाएगी। उन्होंने बरगद/पीपल पूजने से शनि, मंगल, राहू के अशुभ प्रभाव दूर होने की बात कही।
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वट वृक्ष का है खास महत्व
वट सावित्री का व्रत महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। ये व्रत सावित्री द्वारा अपने पति को पुनर्जीवित करने के लिए किया गया था। मान्यता है कि वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्ना, तने में विष्णु और डालियों/पत्तियों में भगवान शिव का वास होता है। इसलिए वट पूजा से अखंड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है।
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वट सावित्री पूजन विधि
इस दिन सुबह स्नान के बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य, ब्रह्ना जी की मूर्ति और संभव हो तो सत्यवान व सावित्री की मूर्ति रखें। वट वृक्ष के नीचे जाकर ब्रह्मा जी की पूजा के बाद बरगद की जड़ में जल दें। वट वृक्ष पूजन में वट के तने पर कच्चा सूत लपेटें और सात या 108 बार परिक्रमा करें।