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गठबंधन के जातीय समीकरणों पर भारी मोदी लहर
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बरेली। 2019 का लोकसभा चुनाव भाजपा बनाम सपा-बसपा गठबंधन के बीच कांटे के मुकाबले में माना जा रहा था। एक तरफ मोदी फैक्टर था तो दूसरी ओर सपा-बसपा का मुस्लिम, दलित (खासतौर से जाटव) और पिछड़ा वर्ग (खासतौर से यादव) समीकरणों पर टिका था। सपा-बसपा का गणित कागजों पर तो बहुत मजबूत था, लेकिन मोदी लहर और भाजपा का बूथ मैनेजमेंट इन पर भारी पड़ा। गैर जाटव दलित और गैर यादव पिछड़ों के अलावा सवर्ण और राष्ट्रवादी विचारधारा वाले मतदाताओं ने प्रचंड बहुमत की सरकार बना दी।
एक अनुमान के अनुसार बरेली लोकसभा सीट पर सपा-बसपा गठबंधन पांच लाख मुस्लिम, दो लाख दलित और 40 हजार यादव (सब अनुमानित आंकड़े हैं) समेत कुछ अन्य पिछड़ी जातियों की लामबंदी में जीत की उम्मीद लगाए था। उस हिसाब में जातीय समीकरणों से देखा जाए तो गठबंधन प्रत्याशी भगवतसरन गंगवार कागजों में बहुत मजबूत प्रत्याशी थे, लेकिन जब वोट पड़े तो हकीकत में कागजी समीकरण धराशायी हो गए। मुस्लिम वोट भले ही ज्यादातर गठबंधन को मिला, लेकिन वह कांग्रेस और भाजपा में भी बंटा। दूसरी बात औसतन 10 से 15 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं ने इस बार हर चुनाव के मुकाबले कम मतदान किया। उसका भी असर पड़ा। दलितों में जाटव भी पूरी तरह गठबंधन के पक्ष में नहीं जा पाए। बाकी गैर जाटव दलित और गैर यादव पिछड़े मतदाताओं ने भाजपा को चुना। भाजपा के आधार वोट में शामिल हिंदुओं की अधिकांश जातियों ने एकजुट होकर मोदी के पक्ष में वोटिंग की। पंजाबी, सिंधी समेत अन्य वोट भी भाजपा को मिलने से दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशी बेहद मजबूत निकले। दोनों सीटों पर भाजपा को अनुमान से कहीं अधिक वोट हासिल हुए और पार्टी ने एतिहासिक जीत दर्ज की।
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एक अनुमान के अनुसार बरेली लोकसभा सीट पर सपा-बसपा गठबंधन पांच लाख मुस्लिम, दो लाख दलित और 40 हजार यादव (सब अनुमानित आंकड़े हैं) समेत कुछ अन्य पिछड़ी जातियों की लामबंदी में जीत की उम्मीद लगाए था। उस हिसाब में जातीय समीकरणों से देखा जाए तो गठबंधन प्रत्याशी भगवतसरन गंगवार कागजों में बहुत मजबूत प्रत्याशी थे, लेकिन जब वोट पड़े तो हकीकत में कागजी समीकरण धराशायी हो गए। मुस्लिम वोट भले ही ज्यादातर गठबंधन को मिला, लेकिन वह कांग्रेस और भाजपा में भी बंटा। दूसरी बात औसतन 10 से 15 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं ने इस बार हर चुनाव के मुकाबले कम मतदान किया। उसका भी असर पड़ा। दलितों में जाटव भी पूरी तरह गठबंधन के पक्ष में नहीं जा पाए। बाकी गैर जाटव दलित और गैर यादव पिछड़े मतदाताओं ने भाजपा को चुना। भाजपा के आधार वोट में शामिल हिंदुओं की अधिकांश जातियों ने एकजुट होकर मोदी के पक्ष में वोटिंग की। पंजाबी, सिंधी समेत अन्य वोट भी भाजपा को मिलने से दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशी बेहद मजबूत निकले। दोनों सीटों पर भाजपा को अनुमान से कहीं अधिक वोट हासिल हुए और पार्टी ने एतिहासिक जीत दर्ज की।
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