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मुस्लिम वोटरों की पहली पसंद रहा सपा-बसपा गठबंधन
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बरेली। मुस्लिम मतदाताओं की पहली पसंद हालांकि सपा-बसपा गठबंधन था। इस बार मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा खासतौर से मोदी को हराने के लिए पूरी तरह एकजुट होकर सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में वोट डाले। मगर, हिंदुओं खासतौर से दलित जातियों का समर्थन न मिलने की वजह से गठबंधन भाजपा पर बढ़त नहीं बना पाया। हालांकि मुस्लिम मतदाताओं की एकजुटता भी भाजपा की राह नहीं रोक पायी।
जिस तरह से वोटों की गिनती निकलकर सामने आई है। उससे स्पष्ट है कि अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं ने मोदी को हराने के लिए एकमुश्त सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में मतदान किया। इसके चलते कांग्रेस प्रत्याशी को भी बहुत ज्यादा वोट नहीं मिल पाए, जितनी की उम्मीद थी। सपा-बसपा गठबंधन के नेता मुस्लिमों के अलावा यादव और जाटव समेत अन्य दलितों के जातीय समीकरणों से वोट मिलने की उम्मीद लगाए थे। मगर, मोदी के राष्ट्रवाद के आगे जातीय समीकरण बौने साबित हुए। मुस्लिमों के कुछ वोट कांग्रेस को भी मिले। खासतौर से नवाबगंज में मुस्लिम मतदाता गठबंधन और कांग्रेस में बंट गए। प्रगतिशील सपा को मुस्लिम वोट बहुत अधिक नहीं मिल पाए।
भाजपा को भी मुस्लिम वोट मिलने का अनुमान
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि सपा-बसपा के मुस्लिम वोट बैंक में वह भी 10 से 12 फीसदी तक सेंध लगाने में कामयाब रहे। एक भाजपा नेता के अनुसार तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के अलावा प्रधानमंत्री आवास और आयुष्मान योजना का फायदा उठाने कुछ मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा को भी वोट दिए हैं। तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के हक की लड़ाई अब तक भाजपा ने ही लड़ी है। इसलिए इन महिलाओं का भाजपा की ओर झुकाव स्वाभाविक है। शहर के परतापुर चौधरी, सौदागरान, मलूकपुर, बिहारीपुर, परतापुर के अलावा भोजीपुरा, मीरगंज और नवाबगंज में मुस्लिम वोट ठीक-ठाक संख्या में भाजपा को मिले हैं। मतगणना के बाहर भाजपा के कैंप में भी कुछ मुस्लिम चेहरे नजर आ रहे थे। फिर भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार को मिले कुल वोटों से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुस्लिम वोट भाजपा को भी मिले हैं।
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जिस तरह से वोटों की गिनती निकलकर सामने आई है। उससे स्पष्ट है कि अधिकांश मुस्लिम मतदाताओं ने मोदी को हराने के लिए एकमुश्त सपा-बसपा गठबंधन के पक्ष में मतदान किया। इसके चलते कांग्रेस प्रत्याशी को भी बहुत ज्यादा वोट नहीं मिल पाए, जितनी की उम्मीद थी। सपा-बसपा गठबंधन के नेता मुस्लिमों के अलावा यादव और जाटव समेत अन्य दलितों के जातीय समीकरणों से वोट मिलने की उम्मीद लगाए थे। मगर, मोदी के राष्ट्रवाद के आगे जातीय समीकरण बौने साबित हुए। मुस्लिमों के कुछ वोट कांग्रेस को भी मिले। खासतौर से नवाबगंज में मुस्लिम मतदाता गठबंधन और कांग्रेस में बंट गए। प्रगतिशील सपा को मुस्लिम वोट बहुत अधिक नहीं मिल पाए।
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भाजपा को भी मुस्लिम वोट मिलने का अनुमान
भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि सपा-बसपा के मुस्लिम वोट बैंक में वह भी 10 से 12 फीसदी तक सेंध लगाने में कामयाब रहे। एक भाजपा नेता के अनुसार तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के अलावा प्रधानमंत्री आवास और आयुष्मान योजना का फायदा उठाने कुछ मुस्लिम मतदाताओं ने भाजपा को भी वोट दिए हैं। तीन तलाक पीड़ित महिलाओं के हक की लड़ाई अब तक भाजपा ने ही लड़ी है। इसलिए इन महिलाओं का भाजपा की ओर झुकाव स्वाभाविक है। शहर के परतापुर चौधरी, सौदागरान, मलूकपुर, बिहारीपुर, परतापुर के अलावा भोजीपुरा, मीरगंज और नवाबगंज में मुस्लिम वोट ठीक-ठाक संख्या में भाजपा को मिले हैं। मतगणना के बाहर भाजपा के कैंप में भी कुछ मुस्लिम चेहरे नजर आ रहे थे। फिर भाजपा प्रत्याशी संतोष गंगवार को मिले कुल वोटों से भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि मुस्लिम वोट भाजपा को भी मिले हैं।
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