{"_id":"5c6ef8d6bdec22736c04d51f","slug":"151550776534-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाल रजिस्ट्री विभाग का- ..तो ऐसे हो रहा है एक प्रॉपर्टी पर कई बार लोन लेने का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाल रजिस्ट्री विभाग का- ..तो ऐसे हो रहा है एक प्रॉपर्टी पर कई बार लोन लेने का खेल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। बैंक बंधक बनाई जाने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री के रिकार्ड निबंधन विभाग को भेजने में देरी करते हैं। कई बार रजिस्ट्री विभाग और बैंक का स्टाफ मिलकर यह खेल करता है। निबंधन विभाग के पास बंधक बने बैनामों का रिकार्ड भेजने में देरी करने पर इस संपत्ति पर दोबारा लोन हासिल करने का रास्ता खुल जाता है। ऐसे कई केस सामने आने के बाद रजिस्ट्री विभाग की तरफ से सॉफ्टेवयर तैयार किया गया है। इस सॉफ्टवेयर के जरिये जैसे ही कोई बैंक किसी संपत्ति को बंधक बनाएगी, उसका ऑनलाइन रिकार्ड तत्काल रजिस्ट्री विभाग के पास आ जाएगा। इसके बाद रजिस्ट्री को लेकर होेने वाला फर्जीवाड़ा भी बंद होने का दावा किया जा रहा है।
रजिस्ट्री विभाग को बैंकों की ओर से बंधक बनाए गए बैनामों की सूचना समय से नहीं भेजी जा रही है। बताते हैं कि बंधक बनाई जाने वाली संपत्तियों का यह रिकार्ड भेजने में कभी-कभी डेढ़ से दो महीने और कभी इससे भी ज्यादा वक्त लगा दिया जाता है। घोटालेबाज इस बीच उसी संपत्ति पर दोबारा ऋण के लिए आवेदन कर देते हैं। संबंधित बैंक रजिस्ट्री दफ्तर से तस्दीक करता है कि संपत्ति की रजिस्ट्री कहीं बंधक तो नहीं है। वहां से सही सूचना न मिलने पर उसी संपत्ति पर दोबारा लोन मंजूर हो जाता है। बताया जाता है कि रजिस्ट्री विभाग और बैंकों के बीच इस घपले को लेकर कई बार पत्राचार भी हो चुका है, लेकिन फिर भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। बताते हैं कि गड़बड़ी करने वाले लोग बैंक कर्मचारियों से मिलकर बंधक बनाई गई संपत्ति की सूचना भेजने में जानबूझकर देरी कराते हैं। अब निबंधक विभाग ने इससे निपटने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया है। इसके बाद बंधक बनने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्रियां सीधे निबंधन विभाग के पास पहुंच जाएंगी।
रजिस्ट्री विभाग में आए दिन खराब रहता है सर्वर
शासन ने बैनामा प्रक्रिया भले ही ऑनलाइन कर दी हो लेकिन सर्वर के आए दिन गड़बड़ रहने से यह प्रक्रिया बाधित रहती है। ऐसे दूर-दराज से बैनामा के लिए आने वाले लोगों को काफी परेशानी तो होती है। उन्हें वकील और गवाहों के लिए फिर से मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा कातिबों का कामकाज भी ठप हो जाता है। बृहस्पतिवार को रजिस्ट्री विभाग में दिनभर सर्वर खराब रहने से रजिस्ट्री का कामकाज पूरी तरह से बाधित रहा।
विज्ञापन
बैंक जिन संपत्तियों को बंधक बनाते हैं, उनके बैनामों का रिकार्ड भेजने में देरी होती है। इससे गड़बड़ियां हो रही थी। इसे रोकने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसके काम करते ही बैंकों से सीधे ऑनलाइन रजिस्ट्रियां मिल जाएंगी। -अमरेश त्रिपाठी, डीआईजी स्टांप
विज्ञापन
रजिस्ट्री विभाग को बैंकों की ओर से बंधक बनाए गए बैनामों की सूचना समय से नहीं भेजी जा रही है। बताते हैं कि बंधक बनाई जाने वाली संपत्तियों का यह रिकार्ड भेजने में कभी-कभी डेढ़ से दो महीने और कभी इससे भी ज्यादा वक्त लगा दिया जाता है। घोटालेबाज इस बीच उसी संपत्ति पर दोबारा ऋण के लिए आवेदन कर देते हैं। संबंधित बैंक रजिस्ट्री दफ्तर से तस्दीक करता है कि संपत्ति की रजिस्ट्री कहीं बंधक तो नहीं है। वहां से सही सूचना न मिलने पर उसी संपत्ति पर दोबारा लोन मंजूर हो जाता है। बताया जाता है कि रजिस्ट्री विभाग और बैंकों के बीच इस घपले को लेकर कई बार पत्राचार भी हो चुका है, लेकिन फिर भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। बताते हैं कि गड़बड़ी करने वाले लोग बैंक कर्मचारियों से मिलकर बंधक बनाई गई संपत्ति की सूचना भेजने में जानबूझकर देरी कराते हैं। अब निबंधक विभाग ने इससे निपटने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया है। इसके बाद बंधक बनने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्रियां सीधे निबंधन विभाग के पास पहुंच जाएंगी।
विज्ञापन
रजिस्ट्री विभाग में आए दिन खराब रहता है सर्वर
शासन ने बैनामा प्रक्रिया भले ही ऑनलाइन कर दी हो लेकिन सर्वर के आए दिन गड़बड़ रहने से यह प्रक्रिया बाधित रहती है। ऐसे दूर-दराज से बैनामा के लिए आने वाले लोगों को काफी परेशानी तो होती है। उन्हें वकील और गवाहों के लिए फिर से मशक्कत करनी पड़ती है। इसके अलावा कातिबों का कामकाज भी ठप हो जाता है। बृहस्पतिवार को रजिस्ट्री विभाग में दिनभर सर्वर खराब रहने से रजिस्ट्री का कामकाज पूरी तरह से बाधित रहा।
विज्ञापन
बैंक जिन संपत्तियों को बंधक बनाते हैं, उनके बैनामों का रिकार्ड भेजने में देरी होती है। इससे गड़बड़ियां हो रही थी। इसे रोकने के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसके काम करते ही बैंकों से सीधे ऑनलाइन रजिस्ट्रियां मिल जाएंगी। -अमरेश त्रिपाठी, डीआईजी स्टांप