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साइबर कैफे की लापरवाही छात्रों पर पड़ रही भारी
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बरेली। साइबर कैफे वालों की लापरवाही छात्रों की जेब भी काट रही है और उनको परेशानी भी डाल रही है। जल्दबाजी में दोहरी फीस भी चुकानी पड़ रही है और फॉर्म में गलतियों की भी भरमार है। अब छात्र उनको संशोधित कराने के लिए कॉलेजों के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि विश्वविद्यालय ने कह दिया कि जिन छात्रों की एक ही कोर्स की दो बार फीस जमा हो गई है, उसे वापस करा दिया जाएगा।
दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र परीक्षा फॉर्म के लिए साइबर कैफे वालों पर भी निर्भर रहते हैं। ज्यादा फॉर्म भरने के चक्कर में साइबर कैफे वाले लापरवाही करते हैं। छात्रों का कहना है कि मोबाइल नंबर भी सही नहीं डाला। भुगतान अपने खाते से करते हैं तो कई बार एरर दिखाकर दो बार फीस ले लेते हैं। वहीं दूसरी बड़ी समस्या प्राइवेट फॉर्म में आ रही है। साइबर कैफे वाले सेटिंग वाले कॉलेज से ही उनके फॉर्म भर रहे हैं। विश्वविद्यालय में कई ऐेेसे मामले पहुंचे। छात्र ने बरेली या किसी अन्य अनुदानित या राजकीय कॉलेज से फॉर्म भरवाया, लेकिन कॉलेजों ने अपनी मर्जी से फॉर्म भर दिया। दर्जनों शिकायतें तो कॉलेज बदलवाने की सामने आ रही हैं। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार का कहना है कि अगर फॉर्म में गलती हुई तो कॉलेज लॉगिन से उसे सही करा लें। उसके बाद ही फॉर्म जमा करें। बिना संशोधित के छात्रों को मुश्किल होगी। हालांकि कुछ जानकारी ही कॉलेज स्तर पर संशोधित हो सकती है।
फॉर्म की हार्ड कॉपी कॉलेज में जरूर जमा करें
पिछले साल फॉर्म की हार्ड कॉपी जमा करने में छात्रों से चूक हो गई थी जिस कारण उनके रोल नंबर तक रुक गए थे। बड़ी मुश्किल से उनको परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली थी। इस बार भी तमाम छात्र ऑनलाइन फॉर्म भरके हार्ड कॉपी कॉलेजों में नहीं जमा कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने निर्देश जारी किए हैं कि अगर हार्ड कॉपी नहीं जमा की तो उनके रोल नंबर रोक दिए जाएंगे।
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दरअसल ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र परीक्षा फॉर्म के लिए साइबर कैफे वालों पर भी निर्भर रहते हैं। ज्यादा फॉर्म भरने के चक्कर में साइबर कैफे वाले लापरवाही करते हैं। छात्रों का कहना है कि मोबाइल नंबर भी सही नहीं डाला। भुगतान अपने खाते से करते हैं तो कई बार एरर दिखाकर दो बार फीस ले लेते हैं। वहीं दूसरी बड़ी समस्या प्राइवेट फॉर्म में आ रही है। साइबर कैफे वाले सेटिंग वाले कॉलेज से ही उनके फॉर्म भर रहे हैं। विश्वविद्यालय में कई ऐेेसे मामले पहुंचे। छात्र ने बरेली या किसी अन्य अनुदानित या राजकीय कॉलेज से फॉर्म भरवाया, लेकिन कॉलेजों ने अपनी मर्जी से फॉर्म भर दिया। दर्जनों शिकायतें तो कॉलेज बदलवाने की सामने आ रही हैं। परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार का कहना है कि अगर फॉर्म में गलती हुई तो कॉलेज लॉगिन से उसे सही करा लें। उसके बाद ही फॉर्म जमा करें। बिना संशोधित के छात्रों को मुश्किल होगी। हालांकि कुछ जानकारी ही कॉलेज स्तर पर संशोधित हो सकती है।
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फॉर्म की हार्ड कॉपी कॉलेज में जरूर जमा करें
पिछले साल फॉर्म की हार्ड कॉपी जमा करने में छात्रों से चूक हो गई थी जिस कारण उनके रोल नंबर तक रुक गए थे। बड़ी मुश्किल से उनको परीक्षा में बैठने की अनुमति मिली थी। इस बार भी तमाम छात्र ऑनलाइन फॉर्म भरके हार्ड कॉपी कॉलेजों में नहीं जमा कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने निर्देश जारी किए हैं कि अगर हार्ड कॉपी नहीं जमा की तो उनके रोल नंबर रोक दिए जाएंगे।
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