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एफएसडीए अब जागाः अफसरों को मालूम ही नहीं खेसारी आती कहां से है

Sun, 06 Jan 2019 01:30 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sun, 06 Jan 2019 01:30 AM IST
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एफएसडीए अब जागाः अफसरों को मालूम ही नहीं खेसारी आती कहां से है
बरेली। मंडल भर में अरहर और चने की आड़ में खेसारी दाल बड़े पैमाने पर खपाई जा रही है। इसकी खरीद फरोख्त भी बकायदा आढ़ती करते हैं। जबकि यह दाल यूपी में प्रतिबंधित है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका इस्तेमाल सेहत के साथ खिलवाड़ करना है। खेसारी दाल से बना बेसन भी हर दिन बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होता है। लेकिन एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन) अफसर अब तक यही पता नहीं लगा सके कि यह प्रतिबंधित दाल कहां से आती है? इसे लेकर सहायक आयुक्त ने तीखी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि चार माह पहले खेसारी दाल पकड़े जाने के बावजूद संबंधित अफसरों ने दाल आने के स्रोत और ट्रेडिंग की जानकारी क्यों नहीं जुटाई।
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बरेली मंडल में हर दिन दो करोड़ रुपये से अधिक का बेसन कारोबार होता है। इसमें मटर और खेसारी दाल का अनुपात बड़ी तादाद में बताया जाता है। चार माह पहले एफएसडीए टीम ने कालीबाड़ी और चौपुला चौराहा स्थित कारोबारियों के स्टाक में मौजूद खेसारी दाल के नमूने लिए थे। व्यापारियों ने खेसारी दाल बताकर ही नमूने दिए थे। जो लैब में अनसेफ पाए गए। यानी इसका इस्तेमाल करना काफी खतरनाक है। इस अवैध कारोबार के पकड़े जाने के बावजूद एफएसडीए अधिकारियों ने यह जानना भी उचित नहीं समझा कि बरेली और आसपास के जिलों में खेसारी दाल कहां से मंगाई जाती है। इसके साथ ही, कितनी खपत है। अमर उजाला ने खेसारी दाल के कारोबार समेत उसके प्रभाव की जानकारी दी तो एफएसडीए विभाग में खलबली मची।
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जवाब तलब
सहायक आयुक्त एफएसडीए संजय पांडे ने प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए जिला अभिहीत अधिकारी कार्यालय से जानकारी मांगी कि खेसारी दाल का कारोबार कहां होता है और माल कहां से आता है। जिला कार्यालय इसकी जानकारी नहीं दे सका। इस पर उन्होंने नाराजगी जताई और कारोबार संबंधी विस्तृत जानकारी तलब की। पांडे ने बताया कि इस मामले में जिला अभिहीत अधिकारी को लिखित रूप से भेजा जाएगा।
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