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प्रदूषण से बचाव का एक मात्र उपाय पौधरोपण
Updated Tue, 06 Jun 2017 11:11 PM IST
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कादरचौक (बदायूं)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कादरचौक में हुई पर्यावरण गोष्ठी में डॉ. अरविंद धवल ने कविता पाठ कर सभी को पौधारोपण करने का संदेश दिया। साथ ही पौधारोपण से मानव जीवन को जोड़ते हुए भाव विभोर कर दिया। संबोधन में उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में हमारे भारत में सदैव ही वृक्षों की पूजा होती रही है। उस समय से ही भारतीय समाज में वृक्षों के संरक्षण पर जोर दिया जाता रहा है।
बीपीएम नाजिम खान ने कहा कि वृक्षों से ही प्राणदायिनी गैस मिलती है। हम पर आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देने की नैतिक जिम्मेदारी है। संजीव भारद्वाज ने कहा कि जो पहल आज हो रही है उसे सतत रूप में चलाते रहने की आवश्यकता है।
संजीव जौहरी कहा कि जीवन दायिनी शक्ति को बचाने के लिए वृक्षों का संरक्षण करना आवश्यक है। यूनिसेफ के डीएमसी सुभाष सिंह ने कहा कि वैचारिक प्रदूषण भी अब बढ़ता हुआ एक संकट है। चिकित्सा विभाग की ओर से इस तरह की पहल अपने आप में प्रशंसनीय है। वृक्षों के रोपण के लिए मात्र पांच जून ही नही सभी दिवस एक समान हैं। सभी तरह के प्रदूषणों से बचाव का एक मात्र उपाय पौधरोपण ही है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण गंगवार ने कहा कि प्रकृति को नष्ट करने से विकास नहीं होना चाहिए क्योंकि प्रकृति से छेड़छाड़ मानव जीवन के लिए घातक है। पौधरोपण से भी महत्वपूर्ण उनका संरक्षण करना है। उन्होंने प्रत्येक नए पौधे को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए उन्हें गोद लेने की सलाह दी। अध्यापक प्रवीण कुमार ने सभी को फलों के बीजो को ऐसी जगह पर फेंकने की बात कही जहां पर पानी की उपलब्धता हो, समय अनुकूल आने पर उन बीजों से वृक्ष बनने की संभावना अधिक रहती है। कार्यक्रम के तहत परिसर में 50 पौधे लगाए गए। इस अवसर पर कन्हइया लाल, प्रशांत जौहरी, गौरव, सुशील, अनुज, मुन्नी देवी, शबनम परवीन आदि उपस्थित रहे।
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बीपीएम नाजिम खान ने कहा कि वृक्षों से ही प्राणदायिनी गैस मिलती है। हम पर आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देने की नैतिक जिम्मेदारी है। संजीव भारद्वाज ने कहा कि जो पहल आज हो रही है उसे सतत रूप में चलाते रहने की आवश्यकता है।
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संजीव जौहरी कहा कि जीवन दायिनी शक्ति को बचाने के लिए वृक्षों का संरक्षण करना आवश्यक है। यूनिसेफ के डीएमसी सुभाष सिंह ने कहा कि वैचारिक प्रदूषण भी अब बढ़ता हुआ एक संकट है। चिकित्सा विभाग की ओर से इस तरह की पहल अपने आप में प्रशंसनीय है। वृक्षों के रोपण के लिए मात्र पांच जून ही नही सभी दिवस एक समान हैं। सभी तरह के प्रदूषणों से बचाव का एक मात्र उपाय पौधरोपण ही है। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण गंगवार ने कहा कि प्रकृति को नष्ट करने से विकास नहीं होना चाहिए क्योंकि प्रकृति से छेड़छाड़ मानव जीवन के लिए घातक है। पौधरोपण से भी महत्वपूर्ण उनका संरक्षण करना है। उन्होंने प्रत्येक नए पौधे को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए उन्हें गोद लेने की सलाह दी। अध्यापक प्रवीण कुमार ने सभी को फलों के बीजो को ऐसी जगह पर फेंकने की बात कही जहां पर पानी की उपलब्धता हो, समय अनुकूल आने पर उन बीजों से वृक्ष बनने की संभावना अधिक रहती है। कार्यक्रम के तहत परिसर में 50 पौधे लगाए गए। इस अवसर पर कन्हइया लाल, प्रशांत जौहरी, गौरव, सुशील, अनुज, मुन्नी देवी, शबनम परवीन आदि उपस्थित रहे।
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