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एक जलसे से हुई आजान की शुरुआत, अफवाह बनी
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बरेली। शहर के पुराना शहर इलाके के सैलानी के पास एक जलसा चल रहा था। वहां एक मौलाना ने रात लगभग साढ़े दस बजे अजान पर अपनी तकरीर शुरू की। वह तकरीर करते हुए अजान की एक-एक लाइन अजान देने के तर्ज में पढ़ते फिर उसके मायने और फजीलत बताते। यह सिलसिला चल ही रहा था कि यहां की अजान पर कुछ मस्जिदों से अजान होना शुरू हो गई। यहीं से अफवाहों का सिलसिला शुरू हुआ।
जब पुराना शहर की मस्जिदों से अजानें शुरू हुई तो लोग एक दूसरे से पूछने लगे कि क्या बात है अजान क्यों हो रही है। किसी ने कह दिया हो सकता है कोई तूफान या जलजला आने वाला हो। बस फिर किया था लोगों ने एक दूसरे को फोन और व्हाट्सएप पर मैसेज भेजना शुरू कर दिया। जिस जलसे में अजान की आवाज से ये अफवाह उठी, वहीं कुछ लोगों ने जाकर कहा कि जलजला आ रहा है। फिर तो वह जलसा भी बंद हो गया और लोग वहां से उठ उठ कर इधर उधर हो गए।
अफवाहों पर मस्जिद के इमामों ने क्यों दी अजान
बरेली। शहर की मस्जिदों में अफवाहों पर हुई अजान पर खानकाह वामिकिया के सज्जादानशीं मौलाना असल मियां वामिकी ने मस्जिद के इमाम और जिम्मेदारों पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बे-जरूरत मस्जिदों के लाउडस्पीकर से बे-वक्त अजान क्यों दी गई। पुराने शहर की एक मस्जिद से जवाब मिला कि मोहल्ले के चंद लोगों ने आकर उन पर जोर दिया कि और मस्जिदों में अजान हो रही है आप भी दीजिए। वामिकी ने फिर पूछा कि बिना किसी जिम्मेदार के एलान किए ये अजान देना क्या शरीयतन दुरुस्त है। उन्होंने कहा कि इमाम खुद नाइबे रसूल हैं , वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
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जब पुराना शहर की मस्जिदों से अजानें शुरू हुई तो लोग एक दूसरे से पूछने लगे कि क्या बात है अजान क्यों हो रही है। किसी ने कह दिया हो सकता है कोई तूफान या जलजला आने वाला हो। बस फिर किया था लोगों ने एक दूसरे को फोन और व्हाट्सएप पर मैसेज भेजना शुरू कर दिया। जिस जलसे में अजान की आवाज से ये अफवाह उठी, वहीं कुछ लोगों ने जाकर कहा कि जलजला आ रहा है। फिर तो वह जलसा भी बंद हो गया और लोग वहां से उठ उठ कर इधर उधर हो गए।
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अफवाहों पर मस्जिद के इमामों ने क्यों दी अजान
बरेली। शहर की मस्जिदों में अफवाहों पर हुई अजान पर खानकाह वामिकिया के सज्जादानशीं मौलाना असल मियां वामिकी ने मस्जिद के इमाम और जिम्मेदारों पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बे-जरूरत मस्जिदों के लाउडस्पीकर से बे-वक्त अजान क्यों दी गई। पुराने शहर की एक मस्जिद से जवाब मिला कि मोहल्ले के चंद लोगों ने आकर उन पर जोर दिया कि और मस्जिदों में अजान हो रही है आप भी दीजिए। वामिकी ने फिर पूछा कि बिना किसी जिम्मेदार के एलान किए ये अजान देना क्या शरीयतन दुरुस्त है। उन्होंने कहा कि इमाम खुद नाइबे रसूल हैं , वे अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
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