{"_id":"5aee0cde4f1c1b65098b8061","slug":"141525550302-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंकों ने चूरन के नोटों से खुद को बचाया पर ग्राहकों को नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंकों ने चूरन के नोटों से खुद को बचाया पर ग्राहकों को नहीं
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sun, 06 May 2018 01:46 AM IST
विज्ञापन
एटीएम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नकली नोट बैंक में न आएं, बैंकों ने यह इंतजाम तो कर लिया लेकिन ग्राहकों को नकली नोट न मिले, इसकी परवाह नहीं की। दरअसल बैंक शाखाओं में नकली नोटों की आमद रोकने के लिए जो अपडेटेड सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जा रहा है, उसे एटीएम में अपडेट नहीं किया गया है। यह सॉफ्टवेयर नकली, चूरन वाले नोट या खराब नोटों को एटीएम में ही अलग डंप कर देता है। बैंकों की कैश डिपॉजिट मशीनों (सीडीएम) में यही सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किया जा रहा है।
एटीएम का पुराना सॉफ्टवेयर नकली नोटों को रोकने के लिए अपडेट नहीं था। ऐसे में एटीएम बॉक्स में अगर कैश फीड करने के दौरान अगर नकली नोट भी रख दिए जाएं तो वेभी ग्राहकों को मिल जाते हैं। एटीएम की इसी खामी का फायदा उन आउटसोर्सिंग एजेंसी को मिल रहा है, जो कॉन्ट्रैक्ट के तहत बैंक से कैश लेकर एटीएम में उसकी फीडिंग करती हैं। हाल में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के सुभाषनगर के एक एटीएम में भी चूरन वाले नोट निकलने का मामला सामने आ चुका है। इस एटीएम में नकली नोट पकड़ने वाले सॉफ्टेवयर को अपडेट नहीं किया गया था। सूत्रों की मानें तो नोटबंदी के बाद दो हजार और पांच सौ के नए नोट जारी होने के बाद बैंकों को अपने एटीएम के सॉफ्टेवयर अपडेट करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तमाम बैंकों के अफसरों ने इसकी सुध ही नहीं ली। इसलिए एटीएम से नकली नोट निकलने का सिलसिला नहीं थम रहा है।
हालांकि बैंकों ने कैश डिपॉजिट मशीन को अपडेट करने में इस तरह की लापरवाही नहीं बरती है। एसबीआई, पीएनबी, आईसीआईसीआई सहित अन्य तमाम बैंकों ने अपनी सीडीएम को अपडेट कर रखा है। इसमें कैश जमा करने वाले ग्राहक के नोट में अगर जरा सी भी खामी होती है तो ये मशीन उसे काउंटिंग के दौरान फौरन बाहर कर देती है। ग्राहकों का कहना है कि बैंकों के पास नकली कैश न पहुंचे, इसका सिस्टम अपडेट करने में कोई देरी नहीं की गई, लेकिन एटीएम से कैश निकालने वाले ग्राहकों को चूरन वाले नोट न मिलने, इसे लेकर तमाम बैंक लापरवाही बनी है।
विज्ञापन
आउटसोर्सिंग एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के सुभाषनगर के एटीएम से चूरन वाले नोट निकलने के मामले में बैंक की काफी फजीहत हुई है। करीब 15 दिन पहले इस एटीएम से तीन ग्राहकों को पांच-पांच सौ रुपये के नकली नोट मिल गए थे। यूबीआई के बैंक प्रबंधक बच्चन शॉ की जांच में एटीएम में कैश फीडिंग का काम करने वाली सिक्योरिट्रंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की एजेंसी को दोषी पाया गया।ा इसके बाद से ही बैंक ने इस एजेंसी को अपने एटीएम में कैश फीडिंग करने के काम पर रोक लगा दी है। इधर बैंक के कोलकाता हेडक्वार्टर ने इस एजेंसी का अब कांट्रेक्ट भी निरस्त कर दिया हैं। हालांकि एजेंसी स्टाफ ने इस मामले में बैंक अफसरों पर भी आरोप लगाए हैं। बैंक प्रबंधक ने एजेंसी स्टाफ के लगाए गए आरोपों की रिपोर्ट भी मुख्यालय भेज दी गई है।
एटीएम से चूरन वाले नोट मिलने के मामले में कैश फीडिंग करने वाली एजेंसी का कांट्रेक्ट खत्म कर दिया गया है। शायद इसी कारण एजेंसी का स्टाफ बैंक अधिकारियों के खिलाफ उतर आया है। बैंक के उच्चाधिकारियों से आदेश मिलने के बाद मामले में एजेंसी स्टाफ पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी। - बच्चन शॉ, बैंक प्रबंधक, यूबीआई मेन ब्रांच
विज्ञापन
एटीएम का पुराना सॉफ्टवेयर नकली नोटों को रोकने के लिए अपडेट नहीं था। ऐसे में एटीएम बॉक्स में अगर कैश फीड करने के दौरान अगर नकली नोट भी रख दिए जाएं तो वेभी ग्राहकों को मिल जाते हैं। एटीएम की इसी खामी का फायदा उन आउटसोर्सिंग एजेंसी को मिल रहा है, जो कॉन्ट्रैक्ट के तहत बैंक से कैश लेकर एटीएम में उसकी फीडिंग करती हैं। हाल में यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के सुभाषनगर के एक एटीएम में भी चूरन वाले नोट निकलने का मामला सामने आ चुका है। इस एटीएम में नकली नोट पकड़ने वाले सॉफ्टेवयर को अपडेट नहीं किया गया था। सूत्रों की मानें तो नोटबंदी के बाद दो हजार और पांच सौ के नए नोट जारी होने के बाद बैंकों को अपने एटीएम के सॉफ्टेवयर अपडेट करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन तमाम बैंकों के अफसरों ने इसकी सुध ही नहीं ली। इसलिए एटीएम से नकली नोट निकलने का सिलसिला नहीं थम रहा है।
विज्ञापन
हालांकि बैंकों ने कैश डिपॉजिट मशीन को अपडेट करने में इस तरह की लापरवाही नहीं बरती है। एसबीआई, पीएनबी, आईसीआईसीआई सहित अन्य तमाम बैंकों ने अपनी सीडीएम को अपडेट कर रखा है। इसमें कैश जमा करने वाले ग्राहक के नोट में अगर जरा सी भी खामी होती है तो ये मशीन उसे काउंटिंग के दौरान फौरन बाहर कर देती है। ग्राहकों का कहना है कि बैंकों के पास नकली कैश न पहुंचे, इसका सिस्टम अपडेट करने में कोई देरी नहीं की गई, लेकिन एटीएम से कैश निकालने वाले ग्राहकों को चूरन वाले नोट न मिलने, इसे लेकर तमाम बैंक लापरवाही बनी है।
विज्ञापन
आउटसोर्सिंग एजेंसी का कॉन्ट्रैक्ट रद्द
यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया के सुभाषनगर के एटीएम से चूरन वाले नोट निकलने के मामले में बैंक की काफी फजीहत हुई है। करीब 15 दिन पहले इस एटीएम से तीन ग्राहकों को पांच-पांच सौ रुपये के नकली नोट मिल गए थे। यूबीआई के बैंक प्रबंधक बच्चन शॉ की जांच में एटीएम में कैश फीडिंग का काम करने वाली सिक्योरिट्रंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नाम की एजेंसी को दोषी पाया गया।ा इसके बाद से ही बैंक ने इस एजेंसी को अपने एटीएम में कैश फीडिंग करने के काम पर रोक लगा दी है। इधर बैंक के कोलकाता हेडक्वार्टर ने इस एजेंसी का अब कांट्रेक्ट भी निरस्त कर दिया हैं। हालांकि एजेंसी स्टाफ ने इस मामले में बैंक अफसरों पर भी आरोप लगाए हैं। बैंक प्रबंधक ने एजेंसी स्टाफ के लगाए गए आरोपों की रिपोर्ट भी मुख्यालय भेज दी गई है।
एटीएम से चूरन वाले नोट मिलने के मामले में कैश फीडिंग करने वाली एजेंसी का कांट्रेक्ट खत्म कर दिया गया है। शायद इसी कारण एजेंसी का स्टाफ बैंक अधिकारियों के खिलाफ उतर आया है। बैंक के उच्चाधिकारियों से आदेश मिलने के बाद मामले में एजेंसी स्टाफ पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी। - बच्चन शॉ, बैंक प्रबंधक, यूबीआई मेन ब्रांच