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तोड़े गए ठिरिया के स्लॉटर हाउस में पशु का कटना फिर शुरू

Thu, 22 Nov 2018 01:43 AM IST
Updated Thu, 22 Nov 2018 01:43 AM IST
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तोड़े गए ठिरिया के स्लॉटर हाउस में पशु का कटना फिर शुरू
बरेली। मोहनपुर-ठिरिया में जिस अवैध स्लॉटर हाउस को सात महीने पहले बड़े पैमाने पर उपद्रव के बीच जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर तुड़वा दिया था, वहां बाउंड्रीवाल बनाकर दोबारा स्लॉटिंग शुरू कर दी गई है। ठिरिया नगर पंचायत ने यहां पार्क बनाने की घोषणा की थी। पार्क तो बना नहीं, अब पुलिस-प्रशासन की साठगांठ से यहां रोज सैकड़ों पशुओं का कटान हो रहा है।
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जिला प्रशासन ने 15 मार्च 2018 को मोहनपुर-ठिरिया स्थित इस स्लॉटर हाउस को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया था। उस दौरान नगर पंचायत की चेयरमैन तारा बी, उनके पति महफूज ठेकेदार समेत तमाम लोगों ने इसका विरोध कर पुलिस-प्रशासन की टीम पर हमला कर दिया था। इसको लेकर मौजूदा चेयरमैन तारा बी, उसके पति महफूज ठेकेदार, उनका बेटा तहसीन, पूर्व चेयरमैन निसार अली, उसके बेटे इमरान, हिस्ट्रीशीटर एवं पशु तस्कर टुइयां कुरैशी समेत 62 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। स्लॉटर हाउस टूटने के बाद चेयरमैन ने यहां पर बच्चों के लिए पार्क बनाने की बात कही थी। मगर यहां बाउंड्रीवॉल बनाकर दोबारा पशुओं का कटान शुरू कर दिया गया है। रात 12 बजे से सुबह 4-5 बजे तक बेखौफ पशु काटे जा रहे हैं।
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हिस्सेदारी सबकी, गांव वालों को भी सस्ता मांस
अवैध स्लॉटर हाउस में सबका हिस्सा है। नगर पंचायत की जगह है, रोकटोक न करने के लिए पुलिस का संरक्षण है और काम करने के लिए आसपास के कसाई हैं। इसी तरह आसपास के लोगों को यहां से सस्ता मांस मिलता है, जिसके चलते कोई शिकायत नहीं करता।
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अब दो जगहों पर काटे जा रहे पशु
अवैध स्लॉटर हाउस में पहले सिर्फ एक ही स्थान पर पशु काटे जाते थे। मगर अब यहां दो स्थानों पर पशुओं का कटान हो रहा है। स्लॉटर हाउस वाली जगह के अलावा खाली गोदाम के बाहर खड़ंजे पर भी जानवर काटे जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अब कटान पहले से कहीं ज्यादा स्थानों पर हो रहा है।


अगस्त 2015 में बंद करने का हुआ था आदेश
पांच मई 2015 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने ठिरिया नगर पंचायत द्वारा संचालित स्लॉटर हाउस का निरीक्षण किया था। टीम ने पाया कि दस जानवरों की अनुमति वाले इस स्लॉटर हाउस में खुले आसमान के नीचे सैकड़ों पशु काटे जा रहे हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर आठ अगस्त 2015 को इसे बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया। मगर यह सिर्फ कागजों में ही बंद हुआ, अफसरों की मिलीभगत से इसका संचालन जारी रहा। मार्च 2018 में ‘अमर उजाला’ ने इसका खुलासा किया तो 15 मार्च को जिला प्रशासन की टीम ने बुल्डोजर चलाकर इसे ध्वस्त कर दिया।
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