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कालाधन रोकने के लिए ड्राफ्ट पर होगा भेजने वाले का नाम
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Sat, 14 Jul 2018 12:18 AM IST
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मनी लॉन्ड्रिंग यानी गुपचुप तरीके से एक से दूसरी जगह रकम ट्रांसफर पर शिकंजा कसने के लिए आरबीआई के हाल के निर्देश से हड़कंप मचा हुआ है। आरबीआई की गाइड लाइंस के तहत अब बैंक ड्राफ्ट और बैंकर्स चेक बनवाने वाले का नाम भी लिखना होगा। बैंकों को यह सिस्टम लागू करने के लिए 15 सितंबर तक का वक्त दिया गया है।
बैंक अफसरों का कहना है कि बैंक ड्राफ्ट में बनवाने वाले का नाम दर्ज नहीं होता। न ही 50 हजार से कम रुपये भेजने के लिए पैन की जरूरत होती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति पचास हजार से कम के कई ड्राफ्ट बनवाता है और उसे किसी खाते में भेजता है तो उसका रिकार्ड आसानी से नहीं मिल पाता। इससे भी कालाधन को बढ़ावा मिल रहा है। डिमांड ड्राफ्ट पर अब तक उसी व्यक्ति का नाम लिखा होता था, जिसके खाते में धनराशि जमा होती थी। डिमांड ड्राफ्ट से जुड़ा यह निर्देश सामान्य बैंक और भुगतान बैंक दोनों पर लागू होगा। आरबीआई ने बैंकों को गाइड लाइंस जारी की है कि पंद्रह सितंबर से जो भी डिमांड ड्राफ्ट, पे आर्डर और बैंकर्स चेक बनवाता है तो उस पर बनवाने वाले का नाम भी दर्ज होगा।
आरबीआई ने केवाईसी में भी संशोधन किया है। केवाईसी के मास्टर डायरेक्शन की धारा में बदलाव को जोड़ा गया है कि डिमांड ड्राफ्ट और बैंकर्स चेक पर दोनों ही पक्षों के नाम दर्ज हो, ताकि जरूरत पड़ने पर जरूर जांच की जा सके। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आरबीआई की इस सख्ती का मकसद कालेधन पर रोक लगाना है।
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बैंक अफसरों का कहना है कि बैंक ड्राफ्ट में बनवाने वाले का नाम दर्ज नहीं होता। न ही 50 हजार से कम रुपये भेजने के लिए पैन की जरूरत होती है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति पचास हजार से कम के कई ड्राफ्ट बनवाता है और उसे किसी खाते में भेजता है तो उसका रिकार्ड आसानी से नहीं मिल पाता। इससे भी कालाधन को बढ़ावा मिल रहा है। डिमांड ड्राफ्ट पर अब तक उसी व्यक्ति का नाम लिखा होता था, जिसके खाते में धनराशि जमा होती थी। डिमांड ड्राफ्ट से जुड़ा यह निर्देश सामान्य बैंक और भुगतान बैंक दोनों पर लागू होगा। आरबीआई ने बैंकों को गाइड लाइंस जारी की है कि पंद्रह सितंबर से जो भी डिमांड ड्राफ्ट, पे आर्डर और बैंकर्स चेक बनवाता है तो उस पर बनवाने वाले का नाम भी दर्ज होगा।
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आरबीआई ने केवाईसी में भी संशोधन किया है। केवाईसी के मास्टर डायरेक्शन की धारा में बदलाव को जोड़ा गया है कि डिमांड ड्राफ्ट और बैंकर्स चेक पर दोनों ही पक्षों के नाम दर्ज हो, ताकि जरूरत पड़ने पर जरूर जांच की जा सके। बैंक अधिकारियों का कहना है कि आरबीआई की इस सख्ती का मकसद कालेधन पर रोक लगाना है।
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