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गर्व से कह रहे ‘हम हैं हिंदुस्तानी’
सबा जैदी, बरेली
Updated Tue, 15 Aug 2017 02:26 AM IST
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गर्व से कह रहे ‘हम हैं हिंदुस्तानी’
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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हिंदी हैं हमवतन हैं, हिंदोस्तां हमारा...। देशभक्ति का यह जज्बा किसी के कहने या सिखाने से नहीं आता। यह तो वह जज्बात हैं जो खुद-ब-खुद दिलों में रहते हैं। उमरा और जियारत करके सऊदी अरब, ईरान और इराक से लौटे शहर के कई मुस्लिमों ने वहां न सिर्फ हिंदुस्तानी संस्कृति बयां की, बल्कि देशभक्ति के तराने भी गुनगुनाए। साथ ही मुस्लिमों के सबसे पवित्र स्थल माने जाने वाले मक्का शरीफ में तिरंगा भी लहराया।
हिंदुस्तान को आजादी दिलाने में वैसे तो हिंदू और मुस्लिम दोनों ने ही कुर्बानियों की बेहतरीन मिसालें पेश की हैं, लेकिन सांप्रदायिक माहौल खराब कर देश की ख्याति को नुकसान पहुंचाने की नाकाम कोशिशें भी हुईं। इसी को देखते हुए कुछ युवाओं ने मुस्लिम देशों में हिंदुस्तान की एकता और यहां की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने का जिम्मा उठाया है। बरेली के मोहल्ला पुल काजी बड़ा बाजार के रहने वाले फाइक शम्सी सऊदी अरब में रहकर काम कर रहे हैं। वह कुछ समय पहले ही उमरा करने मक्का शहर गए थे। उन्होंने तिरंगा फहराकर वहां लोगों से हिंदुस्तान की संस्कृति के बारे में चर्चा की। फाइक कहते हैं कि कई लोगों को यह लगता है कि हिंदुस्तान में मुस्लिमों पर जुल्म हो रहा है, मैंने उनकी गलतफहमी दूर की, क्योंकि हिंदुस्तान में धर्म को मानने की जितनी आजादी है, वह कहीं और नहीं है। वहीं, बरेली की बेटी मरियम ईरान में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। वह ईरान में हिंदुस्तान की आजादी का जश्न मनाती हैं। इस बार भी उन्होंने 15 अगस्त पर अपने दोस्तों के साथ झंडा फहराकर मिठाई बांटने का कार्यक्रम बनाया है।
इराक में झंडा फहराकर किया
मुल्क से प्यार का इजहार
पीलीभीत निवासी कमर अब्बास एनईआर रेलवे में क्रू कंटोलर हैं। वह अपनी पत्नी शबीना और बेटे जाफर के साथ इराक (करबला) की जियारत के लिए गए थे। उन्होंने वहां तिरंगा फहराकर अपने मुल्क से प्यार का इजहार किया। तिरंगा लहराता हुआ देख इराक में बसने वाले हिंदुस्तानियों ने उसे बोसा दिया और सर आंखों पर लगाया। कमर बताते हैं कि इराक के लोग हिंदी और हिंदुस्तानी लोगों की बहुत कद्र करते हैं। उन्हें यहां के त्योहार और कल्चर बेहद पसंद हैं। उन्होंने पूछा कि हिंदुस्तान में धार्मिक जुलूसों पर पाबंदी नहीं है क्या? क्योंकि यह एक गैर मुस्लिम देश है। हमने उनकी गलतफहमी दूर की। बताया कि हिंदू-मुस्लिम मिलकर ईद और दीवाली मनाते हैं। उनके बेटे जाफर ने इतिहास और ऐतिहासिक चीजों के बारे में जानकारी देकर हिंदुस्तान आने की दावत भी दी। कमर अब्बास ने पीलीभीत आकर अपने विभाग के लोगों को तबर्रुक बांटा।
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हिंदी हैं हमवतन हैं, हिंदोस्तां हमारा...। देशभक्ति का यह जज्बा किसी के कहने या सिखाने से नहीं आता। यह तो वह जज्बात हैं जो खुद-ब-खुद दिलों में रहते हैं। उमरा और जियारत करके सऊदी अरब, ईरान और इराक से लौटे शहर के कई मुस्लिमों ने वहां न सिर्फ हिंदुस्तानी संस्कृति बयां की, बल्कि देशभक्ति के तराने भी गुनगुनाए। साथ ही मुस्लिमों के सबसे पवित्र स्थल माने जाने वाले मक्का शरीफ में तिरंगा भी लहराया।
हिंदुस्तान को आजादी दिलाने में वैसे तो हिंदू और मुस्लिम दोनों ने ही कुर्बानियों की बेहतरीन मिसालें पेश की हैं, लेकिन सांप्रदायिक माहौल खराब कर देश की ख्याति को नुकसान पहुंचाने की नाकाम कोशिशें भी हुईं। इसी को देखते हुए कुछ युवाओं ने मुस्लिम देशों में हिंदुस्तान की एकता और यहां की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने का जिम्मा उठाया है। बरेली के मोहल्ला पुल काजी बड़ा बाजार के रहने वाले फाइक शम्सी सऊदी अरब में रहकर काम कर रहे हैं। वह कुछ समय पहले ही उमरा करने मक्का शहर गए थे। उन्होंने तिरंगा फहराकर वहां लोगों से हिंदुस्तान की संस्कृति के बारे में चर्चा की। फाइक कहते हैं कि कई लोगों को यह लगता है कि हिंदुस्तान में मुस्लिमों पर जुल्म हो रहा है, मैंने उनकी गलतफहमी दूर की, क्योंकि हिंदुस्तान में धर्म को मानने की जितनी आजादी है, वह कहीं और नहीं है। वहीं, बरेली की बेटी मरियम ईरान में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। वह ईरान में हिंदुस्तान की आजादी का जश्न मनाती हैं। इस बार भी उन्होंने 15 अगस्त पर अपने दोस्तों के साथ झंडा फहराकर मिठाई बांटने का कार्यक्रम बनाया है।
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इराक में झंडा फहराकर किया
मुल्क से प्यार का इजहार
पीलीभीत निवासी कमर अब्बास एनईआर रेलवे में क्रू कंटोलर हैं। वह अपनी पत्नी शबीना और बेटे जाफर के साथ इराक (करबला) की जियारत के लिए गए थे। उन्होंने वहां तिरंगा फहराकर अपने मुल्क से प्यार का इजहार किया। तिरंगा लहराता हुआ देख इराक में बसने वाले हिंदुस्तानियों ने उसे बोसा दिया और सर आंखों पर लगाया। कमर बताते हैं कि इराक के लोग हिंदी और हिंदुस्तानी लोगों की बहुत कद्र करते हैं। उन्हें यहां के त्योहार और कल्चर बेहद पसंद हैं। उन्होंने पूछा कि हिंदुस्तान में धार्मिक जुलूसों पर पाबंदी नहीं है क्या? क्योंकि यह एक गैर मुस्लिम देश है। हमने उनकी गलतफहमी दूर की। बताया कि हिंदू-मुस्लिम मिलकर ईद और दीवाली मनाते हैं। उनके बेटे जाफर ने इतिहास और ऐतिहासिक चीजों के बारे में जानकारी देकर हिंदुस्तान आने की दावत भी दी। कमर अब्बास ने पीलीभीत आकर अपने विभाग के लोगों को तबर्रुक बांटा।
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