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हेराफेरी करके बढ़ाए नंबर, अब विजिलेंस करेगी अंदर
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बरेली। निजी कॉलेज के छात्र की मार्कशीट बनाते समय नंबर में हेराफेरी करने के आरोपी डाटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ विजिलेंस मुकदमा चलाएगी। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय में हुई कार्य परिषद की मीटिंग में इसकी मंजूरी दे दी गई। बताया जा रहा है विश्वविद्यालय में इस तरह का यह पहला मामला था।
नोएडा का प्रियदर्शिनी कॉलेज वर्ष 1998 में रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध था। उस दौरान वहां पढ़ने वाले बीटेक के एक छात्र की मार्कशीट बनाते समय विश्वविद्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर ने नंबर बढ़ा दिए। कॉलेज के प्राचार्य ने शासन में शिकायत की तो मामले की विजिलेंस जांच शुरू हो गई। जांच में आरोप सही पाया गया तो विजिलेंस ने तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर ओपी द्विवेदी को दोषी ठहराते हुए विश्वविद्यालय से उस पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी। इसको लेकर बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय में कार्य परिषद की बैठक बुलाकर यह मुद्दा रखा गया जिसे मंजूरी दे दी गई। बता दें कि नंबरों की हेराफेरी को लेकर विश्वविद्यालय में इस तरह के मामले कई बार चर्चाओं में रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब विजिलेंस की जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने की मंजूरी दी गई है। वहीं इस मामले में कुछ दिन पूर्व ओपी द्विवेदी ने कुलपति को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए अभियोग चलाने की मंजूरी न देने की बात कही थी।
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नोएडा का प्रियदर्शिनी कॉलेज वर्ष 1998 में रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध था। उस दौरान वहां पढ़ने वाले बीटेक के एक छात्र की मार्कशीट बनाते समय विश्वविद्यालय के डाटा एंट्री ऑपरेटर ने नंबर बढ़ा दिए। कॉलेज के प्राचार्य ने शासन में शिकायत की तो मामले की विजिलेंस जांच शुरू हो गई। जांच में आरोप सही पाया गया तो विजिलेंस ने तत्कालीन डाटा एंट्री ऑपरेटर ओपी द्विवेदी को दोषी ठहराते हुए विश्वविद्यालय से उस पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी। इसको लेकर बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय में कार्य परिषद की बैठक बुलाकर यह मुद्दा रखा गया जिसे मंजूरी दे दी गई। बता दें कि नंबरों की हेराफेरी को लेकर विश्वविद्यालय में इस तरह के मामले कई बार चर्चाओं में रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब विजिलेंस की जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज कराने की मंजूरी दी गई है। वहीं इस मामले में कुछ दिन पूर्व ओपी द्विवेदी ने कुलपति को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए अभियोग चलाने की मंजूरी न देने की बात कही थी।
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