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बेटियों की सुरक्षा का संदेश लेकर साइकिल पर निकलीं आंध्र की ज्योति
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बरेली। आंध्र प्रदेश के छोटे से गांव येलूरु की ज्योति रोंगला बेटियों की सुरक्षा का संदेश लेकर साइकिल यात्रा पर निकली हैं। उनका मानना है कि देश की सड़कें बेटियों के लिए महफूज हैं। वह वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के साथ पूरे देश को यह संदेश देना चाहती हैं। मुरादाबाद से होते हुए वह बुधवार को बरेली पहुंचीं।
ज्योति बताती हैं कि एमबीए करने के बाद वह एक आईटी कंपनी में एचआर डिपार्टमेंट में जॉब करतीं थी। उनका सपना पर्वतारोही बनने का था। हालांकि, उन्होंने अपना सपना पूरा किया, लेकिन वर्ल्ड रिकॉर्ड नहीं बना सकीं। 2017 में वह हैदराबाद से साइकिल यात्रा पर निकलीं। वह 18 हजार किलोमीटर का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ना चाहती हैं। तीन महीने साइकिल चलाने के बाद उनके कंधे में दिक्कत हो गई, जिसके चलते उनको यात्रा रोकनी पड़ी। जनवरी, 2019 में उन्होंने दिल्ली से दोबारा यात्रा शुरू की। अब तक 13 हजार किलोमीटर साइकिल चला चुकी हैं। रोहतक, पंजाब, यमुनानगर, रुड़की, बिजनौर, मुरादाबाद होते हुए वह बुधवार को बरेली पहुंचीं। पिता सूर्या राव कस्टम में थे। मां यमुना गांव में सरपंच हैं। ज्योति पूरे देश का भ्रमण कर तीस हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहती हैं।
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ज्योति बताती हैं कि एमबीए करने के बाद वह एक आईटी कंपनी में एचआर डिपार्टमेंट में जॉब करतीं थी। उनका सपना पर्वतारोही बनने का था। हालांकि, उन्होंने अपना सपना पूरा किया, लेकिन वर्ल्ड रिकॉर्ड नहीं बना सकीं। 2017 में वह हैदराबाद से साइकिल यात्रा पर निकलीं। वह 18 हजार किलोमीटर का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ना चाहती हैं। तीन महीने साइकिल चलाने के बाद उनके कंधे में दिक्कत हो गई, जिसके चलते उनको यात्रा रोकनी पड़ी। जनवरी, 2019 में उन्होंने दिल्ली से दोबारा यात्रा शुरू की। अब तक 13 हजार किलोमीटर साइकिल चला चुकी हैं। रोहतक, पंजाब, यमुनानगर, रुड़की, बिजनौर, मुरादाबाद होते हुए वह बुधवार को बरेली पहुंचीं। पिता सूर्या राव कस्टम में थे। मां यमुना गांव में सरपंच हैं। ज्योति पूरे देश का भ्रमण कर तीस हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना चाहती हैं।
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