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बरेली कॉलेज में अब फुल टाइम प्रिंसिपल, कई मेंबर होंगे आउट
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बरेली। बरेली कॉलेज की सत्ता जल्द बदलने के आसार दिखाई दे रहे हैं। कॉलेज में भ्रष्टाचार के मामलों और प्रबंध समिति के चुनाव पर उठे विवादों के बीच कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने शासन को पत्र भेजकर कॉलेज में फुल टाइम प्रिंसिपल तैनात करने की सिफारिश कर दी है। दूसरी तरफ नियमों की अनदेखी कर बोर्ड में सदस्य बनाए गए लोगों को भी बाहर करने की तैयारी है। कमिश्नर इसके लिए कॉलेज के बायलॉज का रिव्यू करा रहे हैं।
पहले करोड़ों के गबन और फिर बोर्ड ऑफ कंट्रोल के 14 सदस्यों को अवैध घोषित किए जाने पर बरेली कॉलेज का माहौल काफी गरमाया हुआ है। इस बीच प्रबंधन की ओर से भी जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। विश्वविद्यालय के पर्यवेक्षक की ओर से पुराना चुनाव भी अवैध करार दे दिया गया है। इसके चलते प्रबंधन ने विश्वविद्यालय के निर्देशों को मानने से ही इंकार कर दिया है। कमिश्नर ने बताया कि कॉलेज में फुलटाइम प्रिंसिपल के लिए शासन को पत्र लिखा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के पर्यवेक्षक प्रो. एके जेटली से भी बात कर बायलॉज की जानकारी ली है। उनका कहना है कि कोई भी काम बिना नियम और अनुमति नहीं हो सकता। बायलॉज विश्वविद्यालय से अप्रूवड होना चाहिए और उसी के अनुसार सदस्यों का चयन हो। उन्होंने कहा बायलॉज में क्या नियम थे, कब संशोधन हुए, अनुमोदन हुआ या नहीं, सभी का रिव्यू किया जा रहा है। बोर्ड के 55 सदस्यों की टीम में नियम लांघकर आने वाले लोग बाहर किए जाएंगे।
बरेली कॉलेज का पूरा मामला संज्ञान में है। कॉलेज में फुल टाइम प्रिंसिपल के लिए शासन को लिखा है। जिन सदस्यों का चयन नियमानुसार नहीं हुआ है, उन्हें बाहर किया जाएगा। गैरविवादित और साफ छवि के लोगों को ही बोर्ड में लाया जाएगा। बायलॉज का रिव्यू करा रहे हैं। विश्वविद्यालय से भी बात की है।
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- रणवीर प्रसाद, कमिश्नर
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पहले करोड़ों के गबन और फिर बोर्ड ऑफ कंट्रोल के 14 सदस्यों को अवैध घोषित किए जाने पर बरेली कॉलेज का माहौल काफी गरमाया हुआ है। इस बीच प्रबंधन की ओर से भी जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। विश्वविद्यालय के पर्यवेक्षक की ओर से पुराना चुनाव भी अवैध करार दे दिया गया है। इसके चलते प्रबंधन ने विश्वविद्यालय के निर्देशों को मानने से ही इंकार कर दिया है। कमिश्नर ने बताया कि कॉलेज में फुलटाइम प्रिंसिपल के लिए शासन को पत्र लिखा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के पर्यवेक्षक प्रो. एके जेटली से भी बात कर बायलॉज की जानकारी ली है। उनका कहना है कि कोई भी काम बिना नियम और अनुमति नहीं हो सकता। बायलॉज विश्वविद्यालय से अप्रूवड होना चाहिए और उसी के अनुसार सदस्यों का चयन हो। उन्होंने कहा बायलॉज में क्या नियम थे, कब संशोधन हुए, अनुमोदन हुआ या नहीं, सभी का रिव्यू किया जा रहा है। बोर्ड के 55 सदस्यों की टीम में नियम लांघकर आने वाले लोग बाहर किए जाएंगे।
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बरेली कॉलेज का पूरा मामला संज्ञान में है। कॉलेज में फुल टाइम प्रिंसिपल के लिए शासन को लिखा है। जिन सदस्यों का चयन नियमानुसार नहीं हुआ है, उन्हें बाहर किया जाएगा। गैरविवादित और साफ छवि के लोगों को ही बोर्ड में लाया जाएगा। बायलॉज का रिव्यू करा रहे हैं। विश्वविद्यालय से भी बात की है।
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- रणवीर प्रसाद, कमिश्नर