{"_id":"5b19771e4f1c1ba06e8b7022","slug":"11528395550-bareilly-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कालाधन पर नकेल कसने के लिए ड्रॉफ्ट के साथ आधार देने में सख्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कालाधन पर नकेल कसने के लिए ड्रॉफ्ट के साथ आधार देने में सख्ती
Updated Thu, 07 Jun 2018 11:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
काले धन के खेल पर एक और नकेल
ड्राफ्ट बनवाने पर देना होगा आधार
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। काले धन पर शिकंजा कसने के लिए बैंकों में ड्रॉफ्ट के लिए भी आधार नंबर की अनिवार्यता सख्ती से लागू कर दी गई है। अब ग्राहक चाहे कितनी छोटी धनराशि का ड्रॉफ्ट बनवाए, उसे बैंक को अपनी यूनिक आईडी देनी होगी। एसबीआई मेन ब्रांच के अफसरों का कहना है कि तमाम ग्राहकों ने इस पर कड़ी आपत्ति की, लेकिन फिर भी इसे पूरी कड़ाई के साथ से लागू कर दिया गया है।
पहले 50 हजार से कम धनराशि के ड्राफ्ट बनाने में आधार की जरूरत नहीं होती थी। इसी कारण ड्राफ्ट काले धन के खेल का हिस्सा बन गए। बैंक अफसर कहते हैं कि चेक का भुगतान तो अकाउंट से होता था लेकिन अगर कोई छोटी धनराशि के कई ड्राफ्ट बनवाकर कहीं भुगतान कर देता था तो बैंकों के लिए यह जानना मुश्किल होता था कि किसी व्यक्ति ने कितने ड्राफ्ट बनवाकर कितना पैसा ट्रांसफर किया है। इस पर शिकंजा कसने के लिए बैंकों ने ड्रॉफ्ट को भी आधार से जोड़ दिया है। अब यह जानना आसान होगा कि एक व्यक्ति ने कितनी धनराशि के कितने ड्राफ्ट बनवाए हैं। यह नियम लागू होने के बाद बैंकों में स्टाफ और ग्राहकों के बीच तनातनी भी हो रही है।
विज्ञापन
ड्राफ्ट बनवाने पर देना होगा आधार
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। काले धन पर शिकंजा कसने के लिए बैंकों में ड्रॉफ्ट के लिए भी आधार नंबर की अनिवार्यता सख्ती से लागू कर दी गई है। अब ग्राहक चाहे कितनी छोटी धनराशि का ड्रॉफ्ट बनवाए, उसे बैंक को अपनी यूनिक आईडी देनी होगी। एसबीआई मेन ब्रांच के अफसरों का कहना है कि तमाम ग्राहकों ने इस पर कड़ी आपत्ति की, लेकिन फिर भी इसे पूरी कड़ाई के साथ से लागू कर दिया गया है।
पहले 50 हजार से कम धनराशि के ड्राफ्ट बनाने में आधार की जरूरत नहीं होती थी। इसी कारण ड्राफ्ट काले धन के खेल का हिस्सा बन गए। बैंक अफसर कहते हैं कि चेक का भुगतान तो अकाउंट से होता था लेकिन अगर कोई छोटी धनराशि के कई ड्राफ्ट बनवाकर कहीं भुगतान कर देता था तो बैंकों के लिए यह जानना मुश्किल होता था कि किसी व्यक्ति ने कितने ड्राफ्ट बनवाकर कितना पैसा ट्रांसफर किया है। इस पर शिकंजा कसने के लिए बैंकों ने ड्रॉफ्ट को भी आधार से जोड़ दिया है। अब यह जानना आसान होगा कि एक व्यक्ति ने कितनी धनराशि के कितने ड्राफ्ट बनवाए हैं। यह नियम लागू होने के बाद बैंकों में स्टाफ और ग्राहकों के बीच तनातनी भी हो रही है।
विज्ञापन