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भितरघात से सब आहत
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बरेली। लोकसभा चुनाव 2019 का मतदान हो चुका है, अब परिणाम आने का इंतजार है। मगर भितरघात से सब प्रत्याशी आहत हैं। फिर चाहें भाजपा हो या सपा। किसी भी पार्टी का प्रत्याशी इससे अछूता नहीं रहा। इसकी टीस उनके मन में भी है। चुनाव के दौरान प्रत्याशियों को इन दिग्गज नेताओं की कमी खलती रही, लेकिन वे चुनाव मैदान में नजर ही नहीं आए। हालांकि, कड़ी टक्कर के बीच प्रत्याशी इनमें से कुछ नेताओं को साधने का प्रयास भी करते रहे, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इसको लेकर चुनाव में खूब चर्चा भी रही और अब मामला पार्टी संगठन तक ले जाने की तैयारी है।
सपा में नजर न आने वालों में मुस्लिम समाज के कद्दावर पूर्व विधायक के साथ ही पड़ोसी जिले के लोधी समाज के नेता, कई पूर्व पदाधिकारी एवं कुछ पार्षद शामिल रहे। हालांकि पूर्व जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव का कहना है कि इनमें से दो नेता तो बीमार ही रहे। मगर पार्षदों एवं एक मुस्लिम महिला नेता पर वह कुछ भी कहने से बचते नजर आए। उनका कहना था कि चुनाव की समीक्षा करेंगे तो इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर भी आलाकमान को भेजेंगे। वहां से ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं अपनी ही पार्टी के नेताओं का पूरा सहयोग न मिलने और पार्टी में गुटबाजी को लेकर भगवत सरन गंगवार भी आहत हैं। मगर वह इस मामले की कहीं शिकायत न करने की बात कह रहे हैं।
ऐसे ही भाजपा में एक बड़े कद्दावर नेता को छोड़कर सभी एकजुट होकर संतोष गंगवार को चुनाव लड़ाते नजर आए। कभी जो उनके खिलाफ लगातार बयानबाजी करते थे, वे भी चुनाव में साथ दिखे। ऐसे में इन कद्दावर नेता की गैरमौजूदगी संतोष गंगवार को भी खलती रही, लेकिन वह कुछ बोलने से बचते रहे। कांग्रेस का जिला संगठन तो शहर क्षेत्र को छोड़कर आंवला में ही सक्रिय नजर आया।
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नेताआें का दर्द
जंग में जो साथ छोड़ देते हैं उन्हें घरवाले छोड़ देते हैं: भगवत
यह चुनाव है, जिसमें कुछ सामर्थ्यवान कई बार नाराज हो जाते हैं। मगर कई बार कुछ ऐसे भी नाराज हो जाते हैं जिनमें कोई सामर्थ्य ही नहीं है। खैर, चुनाव में यह चलता रहता है। मैं तो कहता हूं कि सब मेरे साथ थे, अंसारी बिरादरी ने भी मेरा साथ दिया। सभी ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाई। चुनाव भी एक जंग की तरह है। जंग में खाना बनाने वाले से लेकर तोप चलाने वाले तक, सबका योगदान रहता है। ऐसे में किसी का कम-ज्यादा योगदान नहीं होता। मगर मेरा इतना जरूर कहना है कि जंग में जो साथ छोड़ देते हैं, उन्हें घरवाले भी छोड़ देते हैं।
एक नेता को छोड़ सबने दिया साथ, उनका भी ‘प्यार-स्नेह’ मिलता रहा : संतोष
बरेली। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री और भाजपा लोकसभा प्रत्याशी संतोष गंगवार ने कहा कि जनता का प्रेम और सहानुभूति इस बार भी भाजपा और मोदी जी के साथ है। वह टिकट घोषित होने से 15 दिन पहले से ही जनता के बीच घूम रहे हैं। जनता का रुख हमेशा सकारात्मक रहा। अपने आवास पर बातचीत करते हुए संतोष गंगवार ने कहा कि उनको पूरे संगठन और सभी पार्टी नेताओं ने चुनाव लड़ाया। एक नेता शहर में नहीं थे। वह बीमार थे, लेकिन उनका भी ‘प्यार-स्नेह’ पूरे चुनाव में मिलता रहा। डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. सीपीएस चौहान समेत दर्जनों ऐसे नए कार्यकर्ता भी इस बार चुनाव में रोजाना सुबह पांच बजे से आधी रात के बाद तक लगे रहते थे, जो पिछले चुनाव में नहीं थे। ऐसे कार्यकर्ताओं को देखकर वह आश्चर्यचकित थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनाव में पूरी भाजपा एकजुट थी। इसलिए कुछ अगर किसी वजह से साथ नहीं भी रह पाए तो उनका प्रेम हमेशा मिला।
अभी परिणाम नहीं आए : ऐरन
प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि लोकसभा चुनाव के अभी परिणाम सामने नहीं आए हैं। हमें हर जगह ही खूब वोट मिले हैं। सभी ने काम किया है। संगठन ने भी जीतोड़ मेहनत की है। हमें संगठन संबंधी कोई शिकायत अब तक नहीं मिली है।
बिना संगठन लड़ा चुनाव, खूब सामने आए मतभेद
बरेली। लोकसभा चुनाव के दौरान इस बार कुछ सपा नेता एकजुट नहीं हो सके तो कुछ में समय-समय पर मनमुटाव की बात सामने आती रही। दो बार तो ऐसे मौके भी सामने आए जब नेता खुलकर ही लड़ पड़े जबकि इस बार संगठन के नाम पर न तो जिला इकाई गठित थी और न ही महानगर इकाई। लोगों में चर्चा है कि चुनाव के दौरान संगठन न होना पार्टी के इतिहास में पहली बार हुआ है। इसके चलते चुनाव संपन्न होने के बाद भितरघात और संगठन न होने को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
सपा से वीरपाल सिंह यादव के अलग होने के बाद तत्कालीन जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और उनके बीच जमकर बयानबाजी हुई। साथ ही, सपा नेताओं के मतभेद उभरकर सामने आने लगे। परिणामस्वरूप प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने पिछले साल अक्टूबर में जिला एवं महानगर इकाई को भंग कर दिया। इसके बाद तो मतभेद और ज्यादा बढ़ गए। दावेदार जिला एवं महानगर अध्यक्ष पद के लिए लखनऊ दौड़ लगाने लगे। इसी बीच लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गईं, लेकिन मतभेद कम नहीं हुए। भगवत सरन को प्रत्याशी घोषित करने के बाद सपा संगठन ने चुनाव के लिए संचालन समिति बना दी। इसमें पूर्व जिलाध्यक्ष, पूर्व महानगर अध्यक्ष समेत दर्जन भर से ज्यादा नेताओं को शामिल किया गया। इसके बावजूद मतभेद दूर नहीं हुआ। परिणाम स्वरूप चुनाव के दौरान भगवत सरन के कार्यालय पर एक बार महिला नेता नीरज तिवारी ने उपेक्षा की बात करके पूर्व जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव एवं एक पूर्व मंत्री पर बिफर गईं। वहीं दोबारा रात में मीटिंग के दौरान कुछ मुस्लिम नेता उन पर बिफर गए और संगठन में अनदेखी का आरोप तक लगा दिया। उस समय तो यह सारे मामले शांत हो गए लेकिन कुछ नेताओं की निष्क्रियता के चलते मतदान के बाद अब इन पर एक बार फिर इन चर्चा शुरू हो गई है। इस मामले में भगवत सरन गंगवार का कहना है कि संगठन कोई बड़ा मुद्दा नहीं है और न ही मतभेद जैसी कोई बात है। जिन लोगों के मन कुछ खराब भी थे, मुझे तो वे लोग भी अच्छे मन से चुनाव लड़ाते रहे।
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सपा में नजर न आने वालों में मुस्लिम समाज के कद्दावर पूर्व विधायक के साथ ही पड़ोसी जिले के लोधी समाज के नेता, कई पूर्व पदाधिकारी एवं कुछ पार्षद शामिल रहे। हालांकि पूर्व जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव का कहना है कि इनमें से दो नेता तो बीमार ही रहे। मगर पार्षदों एवं एक मुस्लिम महिला नेता पर वह कुछ भी कहने से बचते नजर आए। उनका कहना था कि चुनाव की समीक्षा करेंगे तो इसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर भी आलाकमान को भेजेंगे। वहां से ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। वहीं अपनी ही पार्टी के नेताओं का पूरा सहयोग न मिलने और पार्टी में गुटबाजी को लेकर भगवत सरन गंगवार भी आहत हैं। मगर वह इस मामले की कहीं शिकायत न करने की बात कह रहे हैं।
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ऐसे ही भाजपा में एक बड़े कद्दावर नेता को छोड़कर सभी एकजुट होकर संतोष गंगवार को चुनाव लड़ाते नजर आए। कभी जो उनके खिलाफ लगातार बयानबाजी करते थे, वे भी चुनाव में साथ दिखे। ऐसे में इन कद्दावर नेता की गैरमौजूदगी संतोष गंगवार को भी खलती रही, लेकिन वह कुछ बोलने से बचते रहे। कांग्रेस का जिला संगठन तो शहर क्षेत्र को छोड़कर आंवला में ही सक्रिय नजर आया।
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नेताआें का दर्द
जंग में जो साथ छोड़ देते हैं उन्हें घरवाले छोड़ देते हैं: भगवत
यह चुनाव है, जिसमें कुछ सामर्थ्यवान कई बार नाराज हो जाते हैं। मगर कई बार कुछ ऐसे भी नाराज हो जाते हैं जिनमें कोई सामर्थ्य ही नहीं है। खैर, चुनाव में यह चलता रहता है। मैं तो कहता हूं कि सब मेरे साथ थे, अंसारी बिरादरी ने भी मेरा साथ दिया। सभी ने अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभाई। चुनाव भी एक जंग की तरह है। जंग में खाना बनाने वाले से लेकर तोप चलाने वाले तक, सबका योगदान रहता है। ऐसे में किसी का कम-ज्यादा योगदान नहीं होता। मगर मेरा इतना जरूर कहना है कि जंग में जो साथ छोड़ देते हैं, उन्हें घरवाले भी छोड़ देते हैं।
एक नेता को छोड़ सबने दिया साथ, उनका भी ‘प्यार-स्नेह’ मिलता रहा : संतोष
बरेली। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री और भाजपा लोकसभा प्रत्याशी संतोष गंगवार ने कहा कि जनता का प्रेम और सहानुभूति इस बार भी भाजपा और मोदी जी के साथ है। वह टिकट घोषित होने से 15 दिन पहले से ही जनता के बीच घूम रहे हैं। जनता का रुख हमेशा सकारात्मक रहा। अपने आवास पर बातचीत करते हुए संतोष गंगवार ने कहा कि उनको पूरे संगठन और सभी पार्टी नेताओं ने चुनाव लड़ाया। एक नेता शहर में नहीं थे। वह बीमार थे, लेकिन उनका भी ‘प्यार-स्नेह’ पूरे चुनाव में मिलता रहा। डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. सीपीएस चौहान समेत दर्जनों ऐसे नए कार्यकर्ता भी इस बार चुनाव में रोजाना सुबह पांच बजे से आधी रात के बाद तक लगे रहते थे, जो पिछले चुनाव में नहीं थे। ऐसे कार्यकर्ताओं को देखकर वह आश्चर्यचकित थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चुनाव में पूरी भाजपा एकजुट थी। इसलिए कुछ अगर किसी वजह से साथ नहीं भी रह पाए तो उनका प्रेम हमेशा मिला।
अभी परिणाम नहीं आए : ऐरन
प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि लोकसभा चुनाव के अभी परिणाम सामने नहीं आए हैं। हमें हर जगह ही खूब वोट मिले हैं। सभी ने काम किया है। संगठन ने भी जीतोड़ मेहनत की है। हमें संगठन संबंधी कोई शिकायत अब तक नहीं मिली है।
बिना संगठन लड़ा चुनाव, खूब सामने आए मतभेद
बरेली। लोकसभा चुनाव के दौरान इस बार कुछ सपा नेता एकजुट नहीं हो सके तो कुछ में समय-समय पर मनमुटाव की बात सामने आती रही। दो बार तो ऐसे मौके भी सामने आए जब नेता खुलकर ही लड़ पड़े जबकि इस बार संगठन के नाम पर न तो जिला इकाई गठित थी और न ही महानगर इकाई। लोगों में चर्चा है कि चुनाव के दौरान संगठन न होना पार्टी के इतिहास में पहली बार हुआ है। इसके चलते चुनाव संपन्न होने के बाद भितरघात और संगठन न होने को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
सपा से वीरपाल सिंह यादव के अलग होने के बाद तत्कालीन जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और उनके बीच जमकर बयानबाजी हुई। साथ ही, सपा नेताओं के मतभेद उभरकर सामने आने लगे। परिणामस्वरूप प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने पिछले साल अक्टूबर में जिला एवं महानगर इकाई को भंग कर दिया। इसके बाद तो मतभेद और ज्यादा बढ़ गए। दावेदार जिला एवं महानगर अध्यक्ष पद के लिए लखनऊ दौड़ लगाने लगे। इसी बीच लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गईं, लेकिन मतभेद कम नहीं हुए। भगवत सरन को प्रत्याशी घोषित करने के बाद सपा संगठन ने चुनाव के लिए संचालन समिति बना दी। इसमें पूर्व जिलाध्यक्ष, पूर्व महानगर अध्यक्ष समेत दर्जन भर से ज्यादा नेताओं को शामिल किया गया। इसके बावजूद मतभेद दूर नहीं हुआ। परिणाम स्वरूप चुनाव के दौरान भगवत सरन के कार्यालय पर एक बार महिला नेता नीरज तिवारी ने उपेक्षा की बात करके पूर्व जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव एवं एक पूर्व मंत्री पर बिफर गईं। वहीं दोबारा रात में मीटिंग के दौरान कुछ मुस्लिम नेता उन पर बिफर गए और संगठन में अनदेखी का आरोप तक लगा दिया। उस समय तो यह सारे मामले शांत हो गए लेकिन कुछ नेताओं की निष्क्रियता के चलते मतदान के बाद अब इन पर एक बार फिर इन चर्चा शुरू हो गई है। इस मामले में भगवत सरन गंगवार का कहना है कि संगठन कोई बड़ा मुद्दा नहीं है और न ही मतभेद जैसी कोई बात है। जिन लोगों के मन कुछ खराब भी थे, मुझे तो वे लोग भी अच्छे मन से चुनाव लड़ाते रहे।